21 अगस्त 2026
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यूजीसी मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई: केंद्र को काउंटर एफिडेविट के लिए 4 हफ्ते का समय

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यूजीसी मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई: केंद्र को काउंटर एफिडेविट के लिए 4 हफ्ते का समय

सारांश

यूजीसी मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र को 4 हफ्ते का समय दिया। साथ ही, वकील सत्यम पांडे ने 2019 की आबिदा सलीम तड़वी की पीआईएल की स्वीकार्यता पर सवाल उठाते हुए तर्क दिया कि व्यक्तिगत हित रखने वाले पक्ष की याचिका निचली अदालत के ट्रायल को प्रभावित कर सकती है।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 20 अगस्त 2026 को यूजीसी मामले में केंद्र सरकार को काउंटर एफिडेविट दाखिल करने के लिए 4 सप्ताह का समय दिया।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार की ओर से यह समय-सीमा माँगी थी, जिसे अदालत ने मंजूर किया।
वकील सत्यम पांडे ने आबिदा सलीम तड़वी की 2019 की पीआईएल की मेंटेनेबिलिटी पर सवाल उठाए — तर्क दिया कि याचिकाकर्ता का व्यक्तिगत हित पीआईएल की भावना के विपरीत है।
पायल सलीम तड़वी की कथित जाति उत्पीड़न से जुड़ी आत्महत्या इस मामले की पृष्ठभूमि में है; निचली अदालत में ट्रायल जारी है।
मामला 4 सप्ताह बाद पुनः सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सूचीबद्ध होगा।

सर्वोच्च न्यायालय ने 20 अगस्त 2026 को यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) से जुड़े एक अहम मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को अपना काउंटर एफिडेविट दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय प्रदान किया। सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यह समय-सीमा माँगी थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही मामले से जुड़े अन्य सभी पक्षों को भी अपने-अपने जवाब और काउंटर एफिडेविट दाखिल करने की अनुमति दी गई है।

मुख्य घटनाक्रम

सुनवाई के बाद वकील सत्यम पांडे ने बताया कि अदालत ने केंद्र सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वह चार सप्ताह के भीतर अपना काउंटर एफिडेविट प्रस्तुत करे। मामले से संबद्ध अन्य पक्षों को भी इसी अवधि में अपने जवाब दाखिल करने की छूट दी गई है। इसके बाद मामला पुनः अदालत के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा।

याचिका की स्वीकार्यता पर सवाल

सुनवाई के दौरान वकील सत्यम पांडे ने 2019 में दायर आबिदा सलीम तड़वी की याचिका की मेंटेनेबिलिटी पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने तर्क दिया कि यह याचिका एक जनहित याचिका (पीआईएल) के रूप में दाखिल की गई है, और पीआईएल में याचिकाकर्ता का कोई व्यक्तिगत हित नहीं होना चाहिए। गौरतलब है कि इसी याचिका के आधार पर यूजीसी का ड्राफ्ट तैयार करने का आदेश पारित हुआ था।

पांडे ने अदालत को बताया कि आबिदा सलीम तड़वी, पायल सलीम तड़वी की माँ हैं। पायल सलीम तड़वी की कथित तौर पर जाति उत्पीड़न से परेशान होकर आत्महत्या किए जाने की बात इस मामले से जुड़ी है। ऐसे में उनका तर्क था कि याचिकाकर्ता का इस मामले में प्रत्यक्ष व्यक्तिगत हित है, जो पीआईएल की मूल भावना के विपरीत है।

निचली अदालत के ट्रायल पर असर की आशंका

वकील सत्यम पांडे ने यह भी तर्क दिया कि इस पीआईएल से एक ऐसा सामाजिक परसेप्शन बन सकता है जिसमें निचली अदालत में ट्रायल का सामना कर रहे लोगों को पहले से ही दोषी मान लिया जाए। उन्होंने कहा कि भारतीय कानून का मूल सिद्धांत — 'जब तक दोष सिद्ध न हो, निर्दोष माना जाए' — ऐसे माहौल में कमज़ोर पड़ सकता है। इसी आधार पर उन्होंने अदालत से माँग की कि व्यक्तिगत हित रखने वाले पक्षों द्वारा दायर पीआईएल को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए और संबंधित याचिका खारिज की जाए।

पृष्ठभूमि

यह मामला यूजीसी के उस ड्राफ्ट से जुड़ा है जिसे सर्वोच्च न्यायालय के एक पूर्व आदेश के तहत तैयार किया गया था। 2019 में दायर आबिदा सलीम तड़वी की याचिका को इस प्रक्रिया का आधार माना जाता है। यह ऐसे समय में आया है जब उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति-आधारित भेदभाव और उत्पीड़न के मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस जारी है।

आगे क्या होगा

अब यह मामला चार सप्ताह बाद सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष पुनः सूचीबद्ध होगा। इस अवधि में केंद्र सरकार अपना काउंटर एफिडेविट दाखिल करेगी और अन्य संबंधित पक्ष भी अपने जवाब प्रस्तुत कर सकेंगे। मामले की अगली सुनवाई में पीआईएल की स्वीकार्यता पर अदालत का रुख स्पष्ट होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके केंद्र में एक बड़ा कानूनी सवाल है — क्या व्यक्तिगत पीड़ा को जनहित याचिका का माध्यम बनाया जा सकता है? वकील सत्यम पांडे की दलील यदि अदालत मानती है, तो यह उन तमाम पीआईएल के लिए एक नज़ीर बन सकती है जहाँ याचिकाकर्ता का खुद का हित दाँव पर हो। दूसरी ओर, जाति उत्पीड़न जैसे संवेदनशील मुद्दों पर पीड़ित परिवारों की आवाज़ को 'व्यक्तिगत हित' बताकर खारिज करने का प्रयास भी सामाजिक न्याय की दृष्टि से गंभीर सवाल खड़े करता है। अदालत का अगला कदम इस संतुलन को कैसे साधता है — यही इस मामले की असली परीक्षा होगी।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूजीसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?
सर्वोच्च न्यायालय ने 20 अगस्त 2026 को केंद्र सरकार को यूजीसी मामले में काउंटर एफिडेविट दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया। मामले से जुड़े अन्य पक्षों को भी इसी अवधि में अपने जवाब दाखिल करने की अनुमति दी गई है।
आबिदा सलीम तड़वी की पीआईएल किस बारे में है?
आबिदा सलीम तड़वी ने 2019 में यह याचिका दायर की थी। वे पायल सलीम तड़वी की माँ हैं, जिनकी कथित तौर पर जाति उत्पीड़न से परेशान होकर आत्महत्या किए जाने की बात इस मामले से जुड़ी है। इसी याचिका के आधार पर यूजीसी का ड्राफ्ट तैयार करने का आदेश पारित हुआ था।
वकील सत्यम पांडे ने पीआईएल की स्वीकार्यता पर क्या तर्क दिया?
सत्यम पांडे ने तर्क दिया कि जनहित याचिका में याचिकाकर्ता का कोई व्यक्तिगत हित नहीं होना चाहिए। उनका कहना था कि आबिदा तड़वी का इस मामले में प्रत्यक्ष व्यक्तिगत संबंध है, जिससे निचली अदालत में चल रहे ट्रायल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और आरोपियों को पहले से दोषी मानने जैसा माहौल बन सकता है।
इस मामले में अगली सुनवाई कब होगी?
वकील सत्यम पांडे के अनुसार, यह मामला चार सप्ताह बाद सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष पुनः सूचीबद्ध होगा। इस दौरान केंद्र सरकार और अन्य पक्ष अपने-अपने काउंटर एफिडेविट और जवाब दाखिल करेंगे।
यूजीसी ड्राफ्ट का इस मामले से क्या संबंध है?
आबिदा सलीम तड़वी की 2019 की याचिका के आधार पर सर्वोच्च न्यायालय ने यूजीसी का एक ड्राफ्ट तैयार करने का आदेश दिया था। अब उसी याचिका की मेंटेनेबिलिटी और यूजीसी के उस ड्राफ्ट की वैधता इस मामले के केंद्र में है।
राष्ट्र प्रेस
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