2 नवंबर 2026
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यूपी की फिलिस्तीन से तुलना गैर-जिम्मेदाराना: मौलाना खालिद रशीद, मुसलमान सम्मान से जी रहे हैं

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यूपी की फिलिस्तीन से तुलना गैर-जिम्मेदाराना: मौलाना खालिद रशीद, मुसलमान सम्मान से जी रहे हैं

सारांश

इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने यूपी की फिलिस्तीन से तुलना को तथ्यहीन और गैर-संजीदा बताया। उनका कहना है कि मुसलमान मेहनत और हुनर से सम्मानपूर्वक जी रहे हैं — और भारत में कोई उन्हें दूसरे दर्जे का नागरिक नहीं बना सकता।

मुख्य बातें

मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने 2 नवंबर 2026 को लखनऊ में उत्तर प्रदेश की फिलिस्तीन से तुलना को 'बेहद गैर-संजीदा' और गैर-जिम्मेदाराना करार दिया।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में मुसलमान पूरी इज्जत और वकार के साथ जीवन जी रहे हैं और अपने हुनर व मेहनत से रोजी-रोटी कमा रहे हैं।
मुसलमानों को दूसरे दर्जे का नागरिक बनाने के दावों को उन्होंने खारिज करते हुए कहा कि भारत में ऐसा करना किसी के वश में नहीं है।
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की शादी पर टिप्पणी को उन्होंने 'अनावश्यक बयानबाजी' बताया और इसे निजी मामला कहा।
सपा नेता आजम खान के मामले में उन्होंने न्यायपालिका से न्याय की उम्मीद जताई और कहा कि दस बार विधायक-सांसद रहे नेता के साथ हो रहा व्यवहार अनुचित है।

इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के अध्यक्ष और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने 2 नवंबर 2026 को लखनऊ में उत्तर प्रदेश की तुलना फिलिस्तीन से किए जाने को 'बेहद गैर-संजीदा और गैर-जिम्मेदाराना' करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश में मुसलमान पूरी इज्जत और वकार के साथ अपनी जिंदगी गुजार रहे हैं और ऐसी तुलनाएँ न केवल तथ्यहीन हैं, बल्कि समुदाय की छवि को भी नुकसान पहुँचाती हैं।

यूपी-फिलिस्तीन तुलना पर कड़ी आपत्ति

मौलाना खालिद रशीद ने कहा कि उत्तर प्रदेश में मुसलमान एक स्वतंत्र और सम्मानित कौम की तरह रह रहे हैं। उनके अनुसार, यह कहना कि मुसलमान 'दरी बिछाने का काम करते हैं' या 'देश में दूसरे दर्जे के नागरिक बन गए हैं' — पूरी तरह बेमानी और अनावश्यक है। उन्होंने कहा, मुसलमान अपने हुनर और मेहनत के दम पर रोजी-रोटी कमा रहे हैं और सम्मानपूर्वक जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब सोशल मीडिया और कुछ राजनीतिक बयानों में उत्तर प्रदेश की स्थिति को लेकर तीखी बहस चल रही है। मौलाना ने ऐसी बयानबाजी को समुदाय के हित में नहीं बताया।

दूसरे दर्जे के नागरिक के आरोपों को नकारा

मुस्लिम समुदाय को दूसरे दर्जे का नागरिक बनाए जाने के आरोपों पर मौलाना खालिद रशीद ने कहा कि भारत जैसे महान लोकतांत्रिक देश में किसी के पास इतनी ताकत नहीं है कि वह किसी समुदाय को दूसरे दर्जे का नागरिक बना सके। उन्होंने कहा कि मुसलमानों में हर स्तर पर नेतृत्व मौजूद है और देश के संसाधनों पर उनका उतना ही अधिकार है जितना किसी भी अन्य नागरिक का।

गौरतलब है कि ऐसे आरोप राष्ट्रीय स्तर पर बार-बार उठाए जाते रहे हैं, और यह पहली बार नहीं है जब किसी प्रमुख मुस्लिम धर्मगुरु ने इन्हें खारिज किया हो। मौलाना ने समुदाय की आत्मनिर्भरता और संघर्षशीलता को रेखांकित करते हुए कहा कि मुसलमान अपने संसाधनों और परिश्रम के बल पर जीवनयापन करने में पूरी तरह सक्षम हैं।

उमर अब्दुल्ला की शादी पर विवादित बयान की निंदा

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की शादी को लेकर मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी के बयान पर मौलाना खालिद रशीद ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और संविधान प्रत्येक नागरिक को कानून के दायरे में अपनी पसंद से विवाह करने की स्वतंत्रता देता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि उमर अब्दुल्ला या कोई भी व्यक्ति किससे शादी करता है, यह पूरी तरह उसका निजी मामला है। उनके अनुसार, इस विषय पर अनावश्यक बयानबाजी करने का किसी को भी अधिकार नहीं है।

आजम खान के मामले पर चिंता

समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता आजम खान और उनके परिवार की परिस्थितियों पर मौलाना ने गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आजम खान दस बार विधायक और सांसद रह चुके हैं तथा कैबिनेट मंत्री के रूप में भी अपनी सेवाएँ दे चुके हैं। ऐसे अनुभवी और वरिष्ठ नेता के साथ जो व्यवहार हो रहा है, वह अनुचित और अन्यायपूर्ण है।

मौलाना ने उम्मीद जताई कि न्यायपालिका के माध्यम से आजम खान को न्याय और उनके अधिकार मिलेंगे। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब आजम खान का परिवार लंबे समय से अदालती मामलों का सामना कर रहा है।

आगे क्या

मौलाना खालिद रशीद के ये बयान मुस्लिम धार्मिक नेतृत्व के उस वर्ग की राय को सामने रखते हैं जो सामुदायिक मनोबल और राष्ट्रीय एकता पर जोर देता है। उनके अनुसार, समुदाय की असली ताकत उसकी मेहनत, हुनर और संविधान के प्रति आस्था में है — न कि तुलनात्मक राजनीतिक बयानबाजी में। आने वाले दिनों में आजम खान मामले में न्यायिक घटनाक्रम पर सबकी नजर रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

दूसरी तरफ वे जो संवैधानिक ढाँचे में भरोसा रखकर आत्मनिर्भरता की बात करते हैं। यूपी की फिलिस्तीन से तुलना जैसे बयान भले ही ध्यान खींचते हों, लेकिन मौलाना की आपत्ति यह संकेत देती है कि अतिशयोक्तिपूर्ण तुलनाएँ समुदाय की वास्तविक समस्याओं को ढक देती हैं। आजम खान मामले में न्यायपालिका पर जताया भरोसा इस बात का प्रमाण है कि धार्मिक नेतृत्व का एक हिस्सा संस्थागत रास्तों पर जोर देता है — यह बारीकी मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर छूट जाती है।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना खालिद रशीद ने यूपी की फिलिस्तीन से तुलना पर क्या कहा?
मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने इस तुलना को 'बेहद गैर-संजीदा और गैर-जिम्मेदाराना' बताया। उनके अनुसार उत्तर प्रदेश में मुसलमान पूरी इज्जत और वकार के साथ रह रहे हैं और ऐसी तुलनाएँ समुदाय की वास्तविक स्थिति को गलत तरीके से पेश करती हैं।
क्या मौलाना ने मुसलमानों को दूसरे दर्जे का नागरिक बनाए जाने के दावों को स्वीकार किया?
नहीं। मौलाना खालिद रशीद ने इन दावों को पूरी तरह खारिज किया। उन्होंने कहा कि भारत जैसे महान लोकतंत्र में किसी के पास इतनी ताकत नहीं कि वह मुसलमानों को दूसरे दर्जे का नागरिक बना सके, और देश के संसाधनों पर मुसलमानों का उतना ही अधिकार है जितना किसी अन्य नागरिक का।
उमर अब्दुल्ला की शादी पर मौलाना का क्या रुख है?
मौलाना खालिद रशीद ने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की शादी पर दी गई टिप्पणियों को 'अनावश्यक बयानबाजी' बताया। उन्होंने कहा कि भारत के संविधान के तहत विवाह हर नागरिक का निजी मामला है और इस पर किसी को हस्तक्षेप का अधिकार नहीं।
आजम खान के मामले में मौलाना खालिद रशीद ने क्या कहा?
मौलाना ने सपा नेता आजम खान और उनके परिवार के प्रति हो रहे व्यवहार को अनुचित और अन्यायपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि दस बार विधायक-सांसद और कैबिनेट मंत्री रहे नेता के साथ ऐसा बर्ताव नहीं होना चाहिए, और उन्हें न्यायपालिका से न्याय मिलने की उम्मीद है।
मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली कौन हैं?
मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के अध्यक्ष और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के सदस्य हैं। वे लखनऊ स्थित एक प्रमुख इस्लामी विद्वान हैं जो सामाजिक और धार्मिक मुद्दों पर सक्रिय रूप से विचार व्यक्त करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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