यूपी विधान परिषद में फुटपाथ अतिक्रमण और शिक्षा पर घमासान, सपा का वाकआउट
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश विधान परिषद के मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार, 4 अगस्त 2026 को लखनऊ में सदन के भीतर दो बड़े मुद्दों पर तीखी बहस छिड़ी — प्रदेश के शहरों में फुटपाथों पर बढ़ता अतिक्रमण और सरकारी शिक्षा व्यवस्था की कथित बदहाली। समाजवादी पार्टी (सपा) के सदस्य सरकार के जवाब से असंतुष्ट होकर सदन से वाकआउट कर गए।
फुटपाथ अतिक्रमण: भाजपा सदस्य की माँग
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सदस्य विजय बहादुर पाठक ने नियम-110 के तहत सदन का ध्यान प्रदेश के नगरों में फुटपाथों और सार्वजनिक मार्गों पर बढ़ते अतिक्रमण की ओर आकृष्ट कराया। उन्होंने कहा कि लखनऊ, गाजियाबाद, प्रयागराज, वाराणसी, आगरा, मेरठ और कानपुर सहित अधिकांश शहरों में अवैध पार्किंग, अस्थायी-स्थायी कब्जों और व्यावसायिक गतिविधियों के कारण महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों और स्कूली बच्चों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
पाठक ने सरकार से प्रदेशव्यापी विशेष अभियान चलाकर फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त कराने, नियमित कार्रवाई सुनिश्चित करने और लापरवाह अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की माँग की। सदन में प्रश्नकाल शांतिपूर्वक संपन्न हुआ।
AI कंपनी के साथ ₹25,000 करोड़ के MOU पर सवाल
सपा सदस्य आशुतोष सिन्हा ने राज्य सरकार द्वारा एक AI कंपनी के साथ ₹25,000 करोड़ के एमओयू का मुद्दा उठाया। औद्योगिक विकास मंत्री के जवाब से असंतुष्ट सिन्हा पर सभापति कुंवर मानवेन्द्र सिंह ने कहा कि इस पूरे प्रकरण की जाँच कराई जानी चाहिए कि एमओयू कराने की पात्रता थी या नहीं। यह टिप्पणी उल्लेखनीय है क्योंकि सभापति स्वयं सत्ता पक्ष के निकट माने जाते हैं।
शिक्षा पर तीखी नोकझोंक और सपा का वाकआउट
शून्यकाल में ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने तदर्थ नियुक्त प्रधानाचार्यों के विनियमितीकरण का मुद्दा उठाया। नेता सदन एवं उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बताया कि इस संबंध में शासनादेश जारी किया जा चुका है। सभापति ने मामले को सदन की शिक्षा संबंधी समिति के समक्ष रखकर अगस्त माह में ही बैठक कर समाधान निकालने के निर्देश दिए।
इसके बाद सपा सदस्यों ने कार्यस्थगन प्रस्ताव के ज़रिये प्रदेश में शिक्षा के गिरते स्तर का मुद्दा उठाया। किरण पाल कश्यप, डॉ. मान सिंह यादव, आशुतोष सिन्हा और लाल बिहारी यादव ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के कारण सरकारी शिक्षा व्यवस्था कमज़ोर हो रही है, शिक्षकों की कमी है, स्कूल बंद किए जा रहे हैं और निजी शिक्षण संस्थानों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
सरकार की ओर से बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि प्रदेश में शिक्षा का स्तर बेहतर हुआ है और किसी भी परिषदीय विद्यालय को बंद नहीं किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है।
मंत्री के जवाब से असंतुष्ट सपा सदस्य सरकार पर गलतबयानी का आरोप लगाते हुए सदन से वाकआउट कर गए। सत्ता पक्ष के सदस्यों ने कहा कि विपक्ष सरकार का पक्ष सुनने का धैर्य नहीं रखता। सभापति ने भी विपक्ष से जवाब सुनने की नसीहत देते हुए मंत्री को अपना वक्तव्य जारी रखने के निर्देश दिए।
SCERT-DIET प्रवक्ताओं का ग्रेड-पे मुद्दा
निर्दलीय सदस्यों राजबहादुर सिंह चंदेल और डॉ. आकाश अग्रवाल ने SCERT और DIET में कार्यरत प्रवक्ताओं को 6,000 ग्रेड-पे का लाभ दिए जाने का मुद्दा उठाया। सभापति ने इस विषय को भी शिक्षा संबंधी समिति के समक्ष भेजते हुए समाधान तलाशने के निर्देश दिए।
अनुपूरक अनुदान और सदन स्थगन
नेता सदन केशव प्रसाद मौर्य ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के अनुपूरक अनुदान की माँगें सदन में प्रस्तुत कीं। भोजनावकाश के बाद कार्यसूची के अन्य मदों का निस्तारण किया गया और याचिकाओं को संबंधित समिति को भेजने के बाद सदन की कार्यवाही बुधवार पूर्वाह्न 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। गौरतलब है कि मानसून सत्र के शुरुआती दिनों में ही इतने बड़े मुद्दों पर टकराव यह संकेत देता है कि आगे के दिन और अधिक हंगामेदार हो सकते हैं।