17 अगस्त 2026
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वंदे मातरम विवाद: रामदास अठावले बोले — सोनिया गांधी माफी माँगें, देश का अपमान हुआ

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वंदे मातरम विवाद: रामदास अठावले बोले — सोनिया गांधी माफी माँगें, देश का अपमान हुआ

सारांश

केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने नागपुर में सोनिया गांधी से 'वंदे मातरम' के कथित अपमान पर माफी की माँग की। साथ ही उन्होंने 'बौद्धिक नक्सलवाद' को संविधान विरोधी बताते हुए कहा कि सरकार ने 99 प्रतिशत नक्सलियों को मुख्यधारा में लाया है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने 17 अगस्त 2026 को नागपुर में सोनिया गांधी से 'वंदे मातरम' के कथित अपमान पर सार्वजनिक माफी माँगने की माँग की।
अठावले के अनुसार 'वंदे मातरम' से स्वतंत्रता आंदोलन को बड़ी ताकत मिली थी और इसका अपमान देश का अपमान है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने 99 प्रतिशत नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने में सफलता पाई है।
'बौद्धिक नक्सलवाद' को डॉ.
भीमराव आंबेडकर के संविधान की भावना के विरुद्ध बताया।
अठावले ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया में आस्था रखते हुए सभी को देश के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया।

केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने 17 अगस्त 2026 को नागपुर में कहा कि कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी को 'वंदे मातरम' के कथित अपमान पर सार्वजनिक माफी माँगनी चाहिए। उनके अनुसार इस घटना से न केवल कांग्रेस, बल्कि पूरे देश का अपमान हुआ है।

मुख्य बयान

अठावले ने कहा कि सोनिया गांधी एक जिम्मेदार राष्ट्रीय नेता हैं और कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रही हैं। उन्होंने कहा, '15 अगस्त का दिन अभिमान और गर्व का दिन है। 'वंदे मातरम' से आज़ादी के आंदोलन को बड़ी ताकत मिली थी — इसी नारे पर लाखों लोग अंग्रेज़ों के खिलाफ उठ खड़े हुए थे। ऐसे राष्ट्रीय प्रतीक का अपमान किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।'

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मामला केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय भावना से जुड़ा है। उनके अनुसार सोनिया गांधी को माफी माँगकर इस विवाद को समाप्त करना चाहिए।

बौद्धिक नक्सलवाद पर अठावले का रुख

प्रधानमंत्री के 'दिमागी नक्सल' या 'बौद्धिक नक्सलवाद' संबंधी बयान पर उठे विवाद पर अठावले ने कहा कि सरकार ने 99 प्रतिशत नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने में सफलता पाई है। उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री का आशय यह था कि नक्सलवादी विचारधारा को साहित्य या लेखन के माध्यम से बढ़ावा नहीं मिलना चाहिए।'

उन्होंने डॉ. भीमराव आंबेडकर का संदर्भ देते हुए कहा कि बाबा साहब ने हमेशा शांतिपूर्ण आंदोलन की वकालत की थी। उनके अनुसार बौद्धिक नक्सलवाद संविधान की भावना के विरुद्ध है और इसे समाप्त किया जाना ज़रूरी है।

लोकतंत्र और संविधान पर जोर

अठावले ने कहा कि जनादेश जिसे मिलता है, वही सत्ता में आता है — यही लोकतंत्र की नींव है। उन्होंने कहा, 'बाबा साहब के संविधान के साथ कोई धोखा नहीं होना चाहिए। लोकतांत्रिक प्रक्रिया में आस्था रखते हुए सबको मिलकर देश के लिए काम करना चाहिए।'

राजनीतिक संदर्भ

यह बयान ऐसे समय आया है जब 15 अगस्त 2026 के स्वतंत्रता दिवस समारोहों के बाद 'वंदे मातरम' और 'बौद्धिक नक्सलवाद' जैसे मुद्दों पर राजनीतिक बहस तेज़ हो गई है। गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके सहयोगी दलों ने इन विषयों को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में रखा है, जबकि विपक्षी दल इसे राजनीतिक ध्रुवीकरण का प्रयास बता रहे हैं। आने वाले दिनों में इस विवाद पर कांग्रेस की आधिकारिक प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो दर्शाता है कि सत्तारूढ़ गठबंधन राष्ट्रीय प्रतीकों को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में बनाए रखना चाहता है। 'बौद्धिक नक्सलवाद' की अवधारणा पर बहस नई नहीं है, लेकिन इसे प्रधानमंत्री के भाषण से जोड़कर मुख्यधारा में लाना एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा लगता है। सवाल यह है कि 'बौद्धिक असहमति' और 'बौद्धिक नक्सलवाद' के बीच की रेखा कौन तय करेगा — और क्या यह परिभाषा संवैधानिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में रहेगी, यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है जिसका उत्तर अभी बाकी है।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रामदास अठावले ने सोनिया गांधी से माफी क्यों माँगने को कहा?
केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले के अनुसार सोनिया गांधी ने 'वंदे मातरम' का अपमान किया, जिससे देश और कांग्रेस दोनों की छवि को नुकसान पहुँचा। उनका कहना है कि 'वंदे मातरम' स्वतंत्रता संग्राम की नींव रहा है और इसके अपमान को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
'बौद्धिक नक्सलवाद' या 'दिमागी नक्सल' क्या है?
अठावले के अनुसार 'बौद्धिक नक्सलवाद' उस विचारधारा को कहते हैं जो लेखन या साहित्य के माध्यम से नक्सली आंदोलन को बढ़ावा देती है। प्रधानमंत्री ने इसे समाप्त करने की बात कही है, जिसे अठावले ने संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए ज़रूरी बताया।
अठावले ने नक्सलवाद पर सरकार की क्या उपलब्धि बताई?
रामदास अठावले ने दावा किया कि सरकार ने 99 प्रतिशत नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने में सफलता पाई है। उन्होंने कहा कि देशभर के नक्सलवादी अब मुख्यधारा में आ रहे हैं।
अठावले ने डॉ. आंबेडकर का संदर्भ क्यों दिया?
अठावले ने डॉ. भीमराव आंबेडकर का हवाला देते हुए कहा कि बाबा साहब ने हमेशा शांतिपूर्ण आंदोलन की वकालत की थी। उनके अनुसार नक्सली विचारधारा को बढ़ावा देना आंबेडकर के संविधान की भावना के विरुद्ध है।
यह विवाद किस राजनीतिक पृष्ठभूमि में सामने आया है?
यह बयान 15 अगस्त 2026 के स्वतंत्रता दिवस समारोहों के बाद आया है, जब 'वंदे मातरम' और 'बौद्धिक नक्सलवाद' को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ हुई है। विपक्षी दल इसे राजनीतिक ध्रुवीकरण का प्रयास बता रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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