1 अगस्त 2026
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लखनऊ: LDA के JE और सुपरवाइजर ₹7.50 लाख रिश्वत लेते गिरफ्तार, विजिलेंस का छापा

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लखनऊ: LDA के JE और सुपरवाइजर ₹7.50 लाख रिश्वत लेते गिरफ्तार, विजिलेंस का छापा

सारांश

उत्तर प्रदेश विजिलेंस टीम ने लखनऊ में LDA के अवर अभियंता और दो अन्य कर्मचारियों को ₹7.50 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा। आरोपियों ने निर्माणाधीन स्थल का काम रुकवाकर ₹15 लाख की माँग की थी, जिसकी शिकायत पर विजिलेंस ने छापा मारा।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश विजिलेंस टीम ने 1 अगस्त 2026 को लखनऊ में LDA के तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपियों में अवर अभियंता दिनेश कुमार वर्मा , सुपरवाइजर चंद्र प्रकाश और श्रवण कुमार शामिल हैं।
आरोपियों ने शिकायतकर्ता से ₹15 लाख की रिश्वत माँगी थी; पहली किश्त के रूप में ₹7.50 लाख लेते पकड़े गए।
रिश्वत की ₹7.50 लाख की रकम आरोपियों के पास से बरामद की गई।
मामले की जाँच जारी है; अन्य संलिप्त व्यक्तियों की तलाश की जा रही है।

उत्तर प्रदेश विजिलेंस टीम ने 1 अगस्त 2026 को लखनऊ में लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के अवर अभियंता (JE) दिनेश कुमार वर्मा, सुपरवाइजर चंद्र प्रकाश और श्रवण कुमार को ₹7.50 लाख की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। तीनों आरोपियों के पास से रिश्वत की यह रकम भी बरामद की गई है।

मामले की पृष्ठभूमि

विजिलेंस टीम को एक शिकायतकर्ता ने सूचना दी थी कि LDA के अवर अभियंता दिनेश कुमार वर्मा उसके निर्माणाधीन स्थल पर पहुँचे और काम बंद करने का आदेश दे दिया। शिकायतकर्ता के अनुसार, इसके बाद कर्मचारियों के माध्यम से संदेश भेजा गया कि श्रवण कुमार ने जनसुनवाई (आईजीआरएस) पोर्टल पर उनके निर्माण के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई है, इसलिए बेहतर होगा कि श्रवण कुमार से 'निपटारा' कर लिया जाए।

रिश्वत की माँग और सौदेबाज़ी

श्रवण कुमार ने शिकायतकर्ता को राम मनोहर लोहिया अस्पताल के गेट पर बुलाकर कहा कि अवर अभियंता से बात हो गई है और ₹15 लाख देने पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। इसके बाद शिकायतकर्ता जब LDA कार्यालय पहुँचा, तो वहाँ दिनेश कुमार वर्मा और चंद्र प्रकाश दोनों मौजूद थे। वर्मा ने भी ₹15 लाख की माँग दोहराई और आगे की बात सुपरवाइजर चंद्र प्रकाश से करने को कहा।

सुपरवाइजर ने सभी को मिलाकर ₹15 लाख देने का दबाव बनाया। शिकायतकर्ता ने असमर्थता जताते हुए कहा कि वह यह रकम ₹7.50-7.50 लाख की दो किश्तों में देगा। इसके बाद शिकायतकर्ता ने विजिलेंस टीम से संपर्क कर पूरे मामले की जानकारी दी।

विजिलेंस की कार्रवाई

शिकायत मिलते ही विजिलेंस टीम ने जाँच शुरू की और छापेमारी कर तीनों आरोपियों — दिनेश कुमार वर्मा, चंद्र प्रकाश और श्रवण कुमार — को ₹7.50 लाख की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा। बरामद रकम आरोपियों के पास से ही मिली है। अधिकारियों के अनुसार, अभी तीनों के विरुद्ध कार्रवाई जारी है और मामले की विभिन्न पहलुओं से जाँच की जा रही है।

आम जनता पर असर

यह मामला उजागर करता है कि किस प्रकार सरकारी पोर्टल पर दर्ज शिकायतों का उपयोग कथित तौर पर भ्रष्ट तत्वों द्वारा आम नागरिकों को दबाव में लाने के लिए किया जा रहा है। LDA जैसी संस्था, जो नागरिकों के निर्माण कार्यों को नियमित करने के लिए है, में इस तरह के आरोप जनविश्वास को गहरी चोट पहुँचाते हैं।

आगे की जाँच

विजिलेंस विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पूरे मामले की गहन जाँच की जा रही है और यह देखा जा रहा है कि इस रिश्वत नेटवर्क में और कोई व्यक्ति शामिल तो नहीं है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियाँ भी हो सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस पूरी व्यवस्था की पोल खोलती है जिसमें जनसुनवाई पोर्टल जैसे पारदर्शिता के उपकरणों को कथित तौर पर आम नागरिकों को ब्लैकमेल करने के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। LDA जैसी संस्था में यदि निर्माण अनुमति प्रक्रिया इतनी असुरक्षित है कि निर्माणकर्ता को ₹15 लाख की माँग झेलनी पड़े, तो यह केवल व्यक्तिगत भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि संस्थागत विफलता है। विजिलेंस की त्वरित कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन असली सवाल यह है कि ऐसे नेटवर्क कितने समय से चल रहे थे और ऊपर तक इनकी पहुँच कहाँ तक है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लखनऊ में LDA के किन कर्मचारियों को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया?
विजिलेंस टीम ने LDA के अवर अभियंता दिनेश कुमार वर्मा, सुपरवाइजर चंद्र प्रकाश और श्रवण कुमार को गिरफ्तार किया। तीनों को ₹7.50 लाख की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया।
आरोपियों ने कितनी रिश्वत माँगी थी और कितनी लेते पकड़े गए?
आरोपियों ने शिकायतकर्ता से कुल ₹15 लाख की माँग की थी। शिकायतकर्ता ने दो किश्तों में देने की बात कही और पहली किश्त ₹7.50 लाख लेते समय तीनों विजिलेंस के जाल में फँस गए।
शिकायतकर्ता से रिश्वत क्यों माँगी जा रही थी?
शिकायतकर्ता के अनुसार, LDA के अवर अभियंता ने उसके निर्माणाधीन स्थल का काम रुकवा दिया था। इसके बाद आरोपियों ने जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज शिकायत का हवाला देकर कार्रवाई न करने के एवज में ₹15 लाख की माँग रखी।
इस मामले में विजिलेंस टीम ने क्या कार्रवाई की?
शिकायत मिलने पर विजिलेंस टीम ने जाँच शुरू कर छापा मारा और तीनों आरोपियों को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के पास से ₹7.50 लाख की रकम भी बरामद की गई और मामले की जाँच जारी है।
क्या इस मामले में और गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं?
अधिकारियों के अनुसार, पूरे मामले की विभिन्न पहलुओं से जाँच की जा रही है। यह देखा जा रहा है कि इस रिश्वत नेटवर्क में और कोई व्यक्ति शामिल तो नहीं है, इसलिए आने वाले दिनों में और कार्रवाई संभव है।
राष्ट्र प्रेस
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