विजयवाड़ा में ग्राम-वार्ड कर्मचारियों का 'चलो विजयवाड़ा' प्रदर्शन, पुलिस लाठीचार्ज; 141 हिरासत में, एक SI की मौत
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में 27 सितंबर 2026 को ग्राम और वार्ड सचिवालय कर्मचारियों ने 'चलो विजयवाड़ा' प्रदर्शन के तहत धरना चौक पर एकत्र होकर पदोन्नति और दो लंबित वेतन वृद्धि की मांग की, जिसके बाद कर्मचारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया, 141 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, और ड्यूटी पर तैनात सर्किल इंस्पेक्टर अहमद अली की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई।
मुख्य घटनाक्रम
रविवार को बड़ी संख्या में कर्मचारी — जिनमें महिलाएँ भी शामिल थीं — धरना चौक, विजयवाड़ा पर जमा हुए और तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार से अपनी लंबित मांगें पूरी करने की माँग की। जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की कोशिश की, तो कर्मचारियों ने विरोध किया, जिसके बाद झड़प हुई और पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। इस हिंसक झड़प में कई प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी घायल बताए जा रहे हैं।
धरना स्थल पर ड्यूटी के दौरान सर्किल इंस्पेक्टर अहमद अली को अचानक दिल का दौरा पड़ा और वे जमीन पर गिर गए। सहयोगी उन्हें तत्काल निकटवर्ती अस्पताल ले गए, किंतु रास्ते में ही उनकी मृत्यु हो गई।
कर्मचारियों की मांगें
कर्मचारियों की प्रमुख माँगों में पदोन्नति और दो लंबित वेतन वृद्धि शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने सत्ता में आने पर कर्मचारियों का वेतन दोगुना करने का वादा किया था, लेकिन वह वादा अब तक पूरा नहीं हुआ। साथ ही कर्मचारी 15,004 सचिवालयों को पुनर्गठित कर 7,715 समूहों में बदलने के सरकारी फैसले का भी विरोध कर रहे हैं, जिससे कथित तौर पर करीब 30,000 कर्मचारियों की नौकरी पर खतरा है।
गौरतलब है कि यह सचिवालय व्यवस्था पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी के कार्यकाल में शुरू की गई थी, जिसके तहत नागरिकों को उनके घर तक 540 सरकारी सेवाएँ उपलब्ध कराई जाती थीं।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज की कड़ी निंदा की। YSRCP एमएलसी लेल्ला अप्पी रेड्डी ने आरोप लगाया कि TDP के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार अपने चुनावी वादों से मुकर गई है और जायज माँगें उठाने वाले कर्मचारियों के विरुद्ध पुलिस का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कहा, 'कर्मचारी अपनी जायज मांगों के लिए लड़ रहे थे। पुलिस ने ग्राम और वार्ड सचिवालय के नेताओं और प्रदर्शन में सक्रिय रूप से शामिल लोगों को रोकने में मनमानी की और धरना चौक पर प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों के साथ सख्ती से पेश आई।'
अप्पी रेड्डी ने यह भी कहा कि कम से कम 141 लोगों को हिरासत में लिया गया और मुख्यमंत्री नायडू व उनके पुत्र नारा लोकेश उस दौरान बाहर थे, जबकि किसी भी मंत्री ने कर्मचारियों की समस्या सुलझाने की पहल नहीं की।
YSRCP एससी सेल के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व विधायक टीजेआर सुधाकर बाबू ने सभी हिरासत में लिए गए कर्मचारियों की बिना शर्त रिहाई की माँग की। उन्होंने महिला कर्मचारियों को पुलिस थानों में रखे जाने और सड़कों पर घसीटे जाने की घटनाओं की आलोचना की।
आम कर्मचारियों पर असर
सुधाकर बाबू के अनुसार राज्य सरकार न केवल पदोन्नति और वेतन वृद्धि देने में विफल रही है, बल्कि कर्मचारियों पर जरूरत से अधिक काम का बोझ भी डाला जा रहा है और उन्हें छुट्टियाँ नहीं दी जा रहीं। यह ऐसे कर्मचारी हैं जिन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान अग्रिम मोर्चे पर काम करते हुए अपनी जान जोखिम में डाली थी।
क्या होगा आगे
फिलहाल राज्य सरकार की ओर से कर्मचारियों से बातचीत का कोई संकेत सामने नहीं आया है। विपक्षी दलों ने हिरासत में लिए गए कर्मचारियों की रिहाई और सरकार से वार्ता की माँग तेज कर दी है। यह आंदोलन आने वाले दिनों में और विस्तार ले सकता है, क्योंकि कर्मचारियों ने संकेत दिया है कि जब तक उनकी माँगें नहीं मानी जातीं, वे प्रदर्शन जारी रखेंगे।