19 सितंबर 2026
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मऊगंज में हाथी की करंट से मौत: खुली बिजली लाइन ने ली जान, वन्यजीव सुरक्षा पर उठे सवाल

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मऊगंज में हाथी की करंट से मौत: खुली बिजली लाइन ने ली जान, वन्यजीव सुरक्षा पर उठे सवाल

सारांश

मध्य प्रदेश के मऊगंज में एक जंगली मादा हाथी की खुली बिजली तार से करंट लगकर मौत हो गई। बांधवगढ़ से आया यह जोड़ा छह महीनों से रीवा, सीधी और मऊगंज के जंगलों में था। वन्यजीव कार्यकर्ताओं ने निगरानी में चूक बताते हुए जवाबदेही और तत्काल इंसुलेटेड बिजली लाइनों की माँग की।

मुख्य बातें

मऊगंज जिले के मलकपुर गांव के पास 19 सितंबर 2026 को एक जंगली मादा हाथी की खुली बिजली तार से करंट लगकर मौत हो गई।
हाथी ने एक आदिवासी घर के पास अमरूद के पेड़ से पत्ते खाने की कोशिश में सूंड से तार छू दी, जिससे तत्काल मौत हुई।
DFO लोकेश नीरापुरे ने कानूनी कार्रवाई और पोस्टमार्टम की पुष्टि की; घटनास्थल वन विकास निगम के अधिकार क्षेत्र में है।
वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे के अनुसार मृत हाथी बांधवगढ़ क्षेत्र से आए जोड़े का हिस्सा थी, जो करीब छह महीनों से मऊगंज, रीवा और सीधी में विचरण कर रही थी।
यह जोड़ा 14 सितंबर को तुर्रा पहाड़ पार कर सीधी के जंगलों में दाखिल हुआ था और शुक्रवार रात मलकपुर लौट रहा था।
वन्यजीव संगठनों ने हाथी आवागमन क्षेत्रों में बिजली लाइनों की तत्काल समीक्षा और इंसुलेटेड तारों की माँग की है।

मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले में मलकपुर गांव के निकट 19 सितंबर 2026 को एक जंगली मादा हाथी की खुली बिजली की तार से करंट लगने के कारण मौत हो गई। वन्यजीव कार्यकर्ताओं के अनुसार, हाथी ने एक आदिवासी निवासी के घर के पास अमरूद के पेड़ से पत्ते खाने की कोशिश करते समय अपनी सूंड खुली बिजली की तार से छू दी, जिससे उसकी तत्काल मौत हो गई। इस घटना ने मऊगंज-सीधी सीमा से सटे वन क्षेत्रों में हाथियों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता पैदा कर दी है।

घटनाक्रम: कैसे हुई मौत

घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय ग्रामीण मौके पर पहुंचे और इसके बाद वन विभाग की एक टीम ने इलाके में पहुंचकर आवश्यक कार्रवाई शुरू की। जिला वन अधिकारी (DFO) लोकेश नीरापुरे ने पुष्टि की कि हाथी की मौत के मामले में विधिसम्मत कार्रवाई की जा रही है और मलकपुर के पास पोस्टमार्टम किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि घटनास्थल वन विकास निगम के अधिकार क्षेत्र में आता है और इसे मऊगंज जिले में वन क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया गया है।

हाथी की पहचान और विचरण का इतिहास

वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने बताया कि मृत हाथी एक मादा थी, जो अपने साथी के साथ बांधवगढ़ इलाके से एक जोड़े के रूप में विचरण कर रही थी। यह जोड़ा 14 सितंबर को मऊगंज के हनुमाना इलाके में तुर्रा पहाड़ पार करने के बाद सीधी के जंगलों में दाखिल हुआ था। लगभग पाँच दिन मऊगंज-सीधी सीमा के वन क्षेत्रों में रहने के बाद ये हाथी शुक्रवार रात मलकपुर की ओर लौट रहे थे।

जानकारी के अनुसार, यह जोड़ा करीब छह महीनों से मऊगंज, रीवा और सीधी के वन क्षेत्रों में विचरण कर रहा था। हनुमाना इलाके में इन हाथियों के कई गांवों से गुजरने के दौरान फसल और मकानों को नुकसान पहुंचने की घटनाएं भी सामने आई थीं।

निगरानी में चूक का आरोप

वन्यजीव कार्यकर्ता दुबे ने आरोप लगाया कि यह घटना हाथियों की आवाजाही पर निगरानी में गंभीर चूक को उजागर करती है। उन्होंने कहा कि जिस इलाके से हाथी आते-जाते थे, वहाँ खुले बिजली के तार की मौजूदगी के लिए संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। उन्होंने वन्यजीव आवासों के आसपास बिजली लाइनों के बारे में कड़ी निगरानी और एहतियाती उपायों की माँग की।

व्यापक चिंता: मध्य प्रदेश के वन गलियारे

दुबे ने यह भी कहा कि इस घटना ने मध्य प्रदेश के अन्य वन गलियारों से गुजरने वाले जंगली हाथियों की सुरक्षा पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं पहले से चिंता का विषय रही हैं। गौरतलब है कि खुली बिजली लाइनों से वन्यजीवों की मौत की यह घटना राष्ट्रीय स्तर पर वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों की खामियों की ओर ध्यान खींचती है।

आगे क्या होगा

हाथी का पोस्टमार्टम संपन्न होने के बाद अंतिम रिपोर्ट वन विभाग को सौंपी जाएगी। मामले में कानूनी कार्रवाई जारी है। वन्यजीव संगठनों ने वन विभाग से इस क्षेत्र में बिजली लाइनों का तत्काल सर्वेक्षण करने और खुले तारों को सुरक्षित बनाने की माँग की है। हाथियों के आवागमन वाले क्षेत्रों में अंडरग्राउंड केबलिंग या इंसुलेटेड तारों के इस्तेमाल पर विचार की अपील भी की जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी इसे अपग्रेड करने की प्राथमिकता न विद्युत विभाग को है, न वन विभाग को। मध्य प्रदेश में हाथियों की संख्या बढ़ रही है और उनका विचरण क्षेत्र भी फैल रहा है, लेकिन इसके अनुपात में न निगरानी तंत्र विकसित हुआ है, न बुनियादी ढांचा। जवाबदेही का सवाल भी अनुत्तरित रहता है — वन विकास निगम और वन विभाग के बीच अधिकार क्षेत्र की लड़ाई में जानवर की जान चली जाती है। जब तक हाथी-मानव संघर्ष क्षेत्रों में बिजली लाइनों को इंसुलेट करने या भूमिगत करने की बाध्यता नीति नहीं बनती, ऐसी मौतें रुकेंगी नहीं।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मऊगंज में हाथी की मौत कैसे हुई?
मलकपुर गांव के पास एक मादा हाथी ने एक आदिवासी घर के समीप अमरूद के पेड़ से पत्ते खाने की कोशिश में अपनी सूंड खुली बिजली की तार से छू दी, जिससे करंट लगने के कारण उसकी तत्काल मौत हो गई। घटना 19 सितंबर 2026 की है।
यह हाथी कहाँ से आया था और इस इलाके में क्यों था?
वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे के अनुसार, यह मादा हाथी बांधवगढ़ इलाके से आए एक जोड़े का हिस्सा थी। यह जोड़ा करीब छह महीनों से मऊगंज, रीवा और सीधी के वन क्षेत्रों में विचरण कर रहा था और 14 सितंबर को तुर्रा पहाड़ पार कर सीधी के जंगलों में दाखिल हुआ था।
वन विभाग ने इस मामले में क्या कार्रवाई की?
DFO लोकेश नीरापुरे ने पुष्टि की है कि मामले में कानूनी कार्रवाई की जा रही है और मलकपुर के पास हाथी का पोस्टमार्टम किया जाएगा। घटनास्थल वन विकास निगम के अधिकार क्षेत्र में पड़ता है।
इस घटना से वन्यजीव सुरक्षा पर क्या सवाल उठे हैं?
वन्यजीव कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि हाथियों के आवागमन वाले क्षेत्र में खुली बिजली लाइन की मौजूदगी निगरानी में गंभीर चूक दर्शाती है। उन्होंने वन गलियारों में बिजली लाइनों का तत्काल सर्वेक्षण और इंसुलेटेड या भूमिगत केबलिंग अपनाने की माँग की है।
क्या मध्य प्रदेश में हाथियों के करंट से मरने की यह पहली घटना है?
स्रोत के अनुसार, इस घटना ने मध्य प्रदेश के अन्य वन गलियारों में हाथियों की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा की हैं, जो संकेत देता है कि खुली बिजली लाइनों से वन्यजीवों को खतरा पहले से मौजूद एक समस्या है। इस विशेष मामले की कानूनी जाँच जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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