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आयुष दवाओं की गुणवत्ता पर सरकार सख्त: 'आयुष सुरक्षा पोर्टल' लॉन्च, ई-कॉमर्स पर नए नियम लागू

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आयुष दवाओं की गुणवत्ता पर सरकार सख्त: 'आयुष सुरक्षा पोर्टल' लॉन्च, ई-कॉमर्स पर नए नियम लागू

सारांश

सरकार ने आयुष दवाओं की निगरानी के लिए 'आयुष सुरक्षा पोर्टल' लॉन्च किया और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर वैध प्रिस्क्रिप्शन अनिवार्य कर दिया। CDSCO में विशेष आयुष वर्टिकल और अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान को नोडल एजेंसी बनाने से नियामक ढाँचा अब कहीं अधिक सख्त हो गया है।

मुख्य बातें

आयुष सुरक्षा पोर्टल लॉन्च किया गया — भ्रामक विज्ञापनों और दवाओं के दुष्प्रभावों की रियल-टाइम निगरानी के लिए।
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर आयुष दवाओं की बिक्री के लिए पंजीकृत चिकित्सक का वैध प्रिस्क्रिप्शन अपलोड करना अनिवार्य।
अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान को भ्रामक विज्ञापनों पर नोटिस जारी करने की नोडल एजेंसी नामित किया गया।
CDSCO में विशेष आयुष वर्टिकल गठित; उत्पादों को 'आयुष स्टैंडर्ड' और 'आयुष प्रीमियम' प्रमाणपत्र मिलेंगे।
आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने 21 जुलाई को राज्यसभा में ये जानकारियाँ दीं।

केंद्र सरकार ने 21 जुलाई 2026 को आयुष दवाओं की गुणवत्ता और नियामक अनुपालन को मज़बूत करने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं, जिनमें भ्रामक विज्ञापनों और दुष्प्रभावों की रियल-टाइम निगरानी के लिए 'आयुष सुरक्षा पोर्टल' की शुरुआत और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर आयुष दवाओं की बिक्री के लिए वैध प्रिस्क्रिप्शन अनिवार्य करना शामिल है। राज्यसभा में आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने ये जानकारियाँ साझा कीं।

मौजूदा नियामक ढाँचा

ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 और ड्रग्स रूल्स, 1945 में आयुर्वेद, सिद्ध, सोवा-रिग्पा, यूनानी और होम्योपैथी दवाओं के लिए विशेष नियामक प्रावधान पहले से मौजूद हैं। इन प्रावधानों के तहत निर्माताओं को उत्पादन से पहले निर्धारित लाइसेंसिंग शर्तों का पालन अनिवार्य रूप से करना होता है।

राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के ड्रग इंस्पेक्टर नियमित रूप से निर्माण इकाइयों और खुदरा दुकानों से दवाओं के नमूने एकत्र कर उन्हें प्रयोगशालाओं में गुणवत्ता जाँच के लिए भेजते हैं। यदि कोई नमूना निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरता, तो संबंधित निर्माता या विक्रेता के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाती है।

आयुष सुरक्षा पोर्टल और नोडल एजेंसी

आयुष मंत्रालय ने भ्रामक विज्ञापनों और दवाओं के संभावित दुष्प्रभावों की रियल-टाइम रिपोर्टिंग के लिए 'आयुष सुरक्षा पोर्टल' लॉन्च किया है। इसके साथ ही अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान को भ्रामक विज्ञापनों के मामलों में डिजिटल माध्यमों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को नोटिस जारी करने के लिए नोडल एजेंसी नामित किया गया है।

गौरतलब है कि आयुष उत्पादों के भ्रामक दावों की शिकायतें पिछले कुछ वर्षों में तेज़ी से बढ़ी हैं, विशेष रूप से कोविड-19 महामारी के बाद, जब बाज़ार में अप्रमाणित उत्पादों की बाढ़ आ गई थी। यह पोर्टल उसी पृष्ठभूमि में एक सुधारात्मक कदम है।

ई-कॉमर्स पर नए नियम

सरकार ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को निर्देश दिया है कि वे आयुष दवाओं की बिक्री केवल तभी अनुमत करें, जब उपभोक्ता किसी पंजीकृत आयुर्वेद, सिद्ध या यूनानी चिकित्सक द्वारा जारी वैध प्रिस्क्रिप्शन अपलोड करे — जहाँ यह आवश्यक हो। यह कदम ऑनलाइन बाज़ार में बिना किसी चिकित्सकीय परामर्श के बिकने वाली दवाओं पर लगाम लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

गुणवत्ता प्रमाणन और विशेष आयुष वर्टिकल

सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) में एक विशेष आयुष वर्टिकल स्थापित किया गया है, जो इस क्षेत्र की दवाओं की निगरानी के लिए समर्पित है। इसके अतिरिक्त, क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया की गुणवत्ता प्रमाणन योजना के तहत तृतीय पक्ष मूल्यांकन के बाद आयुष उत्पादों को 'आयुष स्टैंडर्ड' और 'आयुष प्रीमियम' प्रमाणपत्र प्रदान किए जाते हैं।

मंत्रालय 'आयुष औषधि गुणवत्ता एवं उत्पादन संवर्धन योजना' नामक केंद्रीय क्षेत्र की योजना भी संचालित कर रहा है, जिसका उद्देश्य दवाओं का मानकीकरण, गुणवत्ता आधारित उत्पादन, परीक्षण व्यवस्था और नियामक ढाँचे को सुदृढ़ करना है।

जन-जागरूकता और आगे की राह

मंत्रालय के अधीन सभी अनुसंधान परिषदें और राष्ट्रीय संस्थान आयुष पद्धतियों से जुड़ी प्रमाण-आधारित जानकारी को सूचना, शिक्षा और संचार गतिविधियों, शोध पत्रिकाओं, जनजागरूकता कार्यक्रमों तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म के ज़रिये आम लोगों तक पहुँचा रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के वैज्ञानिक मानकीकरण की माँग तेज़ हो रही है और भारत इस क्षेत्र में अपनी साख बनाने का प्रयास कर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी — क्योंकि ई-कॉमर्स पर प्रिस्क्रिप्शन अनिवार्यता को लागू करना तकनीकी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चुनौतीपूर्ण है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि आयुष बाज़ार के तेज़ी से विस्तार के बीच नियामक क्षमता उसी अनुपात में नहीं बढ़ी है, जो इन सुधारों की सफलता की सबसे बड़ी बाधा बन सकती है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आयुष सुरक्षा पोर्टल क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
आयुष सुरक्षा पोर्टल आयुष मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया एक डिजिटल मंच है, जो आयुष दवाओं से जुड़े भ्रामक विज्ञापनों और संभावित दुष्प्रभावों की रियल-टाइम रिपोर्टिंग और निगरानी के लिए बनाया गया है। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं और नियामकों को एक साझा मंच पर लाना है।
ई-कॉमर्स पर आयुष दवाओं की बिक्री के लिए नए नियम क्या हैं?
सरकार ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को निर्देश दिया है कि जहाँ आवश्यक हो, वहाँ आयुष दवाओं की बिक्री केवल तभी अनुमत की जाए जब उपभोक्ता पंजीकृत आयुर्वेद, सिद्ध या यूनानी चिकित्सक द्वारा जारी वैध प्रिस्क्रिप्शन अपलोड करे। यह कदम बिना चिकित्सकीय परामर्श के ऑनलाइन दवा बिक्री पर रोक लगाने के लिए उठाया गया है।
आयुष दवाओं के भ्रामक विज्ञापनों पर कार्रवाई कौन करेगा?
अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान को भ्रामक विज्ञापनों के मामलों में डिजिटल माध्यमों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को नोटिस जारी करने के लिए नोडल एजेंसी नामित किया गया है। इसके अलावा, आयुष सुरक्षा पोर्टल के माध्यम से भी ऐसी शिकायतें दर्ज की जा सकती हैं।
'आयुष स्टैंडर्ड' और 'आयुष प्रीमियम' प्रमाणपत्र क्या हैं?
ये प्रमाणपत्र क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया की गुणवत्ता प्रमाणन योजना के तहत तृतीय पक्ष मूल्यांकन के बाद आयुष उत्पादों को प्रदान किए जाते हैं। 'आयुष स्टैंडर्ड' और 'आयुष प्रीमियम' दो अलग-अलग स्तर के प्रमाणपत्र हैं, जो उत्पाद की गुणवत्ता की स्वतंत्र पुष्टि करते हैं।
CDSCO में आयुष वर्टिकल क्यों बनाया गया?
सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) में विशेष आयुष वर्टिकल इसलिए बनाया गया है ताकि आयुष दवाओं की सुरक्षा और गुणवत्ता की निगरानी एक समर्पित और विशेषज्ञ इकाई द्वारा की जा सके। यह आयुष क्षेत्र को एलोपैथिक दवाओं के साथ-साथ स्वतंत्र नियामक ध्यान दिलाने का प्रयास है।
राष्ट्र प्रेस
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