डिजिलॉकर पर 72.43 करोड़ रजिस्टर्ड यूजर्स, उमंग पर 798 करोड़ लेनदेन; संसद में सरकार ने दिए आँकड़े
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार की दो प्रमुख डिजिटल पहल — डिजिलॉकर और उमंग (UMANG) — ने उपयोगकर्ता संख्या और लेनदेन के मामले में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। 12 अगस्त 2026 को राज्यसभा में दिए गए एक लिखित उत्तर में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि डिजिलॉकर पर अब 72.43 करोड़ से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता हैं, जबकि पिछले तीन वर्षों में 72.86 करोड़ दस्तावेज़ एक्सेस लेनदेन दर्ज किए गए हैं। यह आँकड़े भारत के डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना की व्यापक पहुँच को रेखांकित करते हैं।
उमंग प्लेटफॉर्म की बढ़ती रफ़्तार
वैष्णव के अनुसार, उमंग प्लेटफॉर्म पर वर्तमान में 11.66 करोड़ से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता हैं। पिछले तीन वर्षों में इस प्लेटफॉर्म पर लगभग 798 करोड़ लेनदेन दर्ज किए गए हैं — जो इसे नागरिक सेवाओं के लिए भारत के सबसे सक्रिय डिजिटल माध्यमों में से एक बनाता है। 31 जुलाई 2026 तक उमंग पर 2,575 सरकारी सेवाएँ उपलब्ध हैं, जिनमें 880 केंद्र सरकार और 1,695 राज्य सरकारों से संबंधित हैं।
डिजिलॉकर पर दस्तावेज़ और सेवाओं का विस्तार
डिजिलॉकर प्लेटफॉर्म पर अब 5,437 प्रकार के दस्तावेज़ और सेवाएँ उपलब्ध हैं। इनमें 661 केंद्र सरकार और 4,776 राज्य सरकारों से जुड़ी हैं। मंत्री ने बताया कि दोनों प्लेटफॉर्म आधार, ई-साइन, API सेतु और अन्य डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर से एकीकृत हैं, जिससे नागरिकों को सुरक्षित प्रमाणीकरण, डिजिटल दस्तावेज़ सत्यापन और सहमति-आधारित साझाकरण की सुविधा मिलती है।
कॉमन सर्विस सेंटर और महिला सशक्तिकरण
ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों तक डिजिटल सेवाओं की पहुँच बढ़ाने के लिए सरकार ने कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) नेटवर्क का विस्तार किया है। 30 जून 2026 तक देश की ग्राम पंचायत स्तर पर 4,07,122 CSC संचालित हो रहे थे। उल्लेखनीय है कि इनमें से 70,069 केंद्र महिलाओं द्वारा चलाए जा रहे हैं — जो डिजिटल समावेशन के साथ-साथ महिला उद्यमिता का भी प्रतीक है।
डिजिटल इंडिया की पृष्ठभूमि और आगे की राह
वैष्णव ने बताया कि जुलाई 2015 में शुरू किए गए डिजिटल इंडिया कार्यक्रम का उद्देश्य नागरिकों को तकनीक के माध्यम से सशक्त बनाना और सरकारी सेवाओं को सुलभ बनाना था। गौरतलब है कि एक दशक बाद ये आँकड़े उस दिशा में हुई प्रगति का संकेत देते हैं। दोनों प्लेटफॉर्म मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल के ज़रिए उपलब्ध हैं, जिससे नागरिक कागज़ी प्रक्रियाओं और सरकारी दफ़्तरों के चक्करों से बड़े पैमाने पर मुक्त हुए हैं। आने वाले समय में इन प्लेटफॉर्म्स पर सेवाओं और उपयोगकर्ताओं की संख्या में और विस्तार की संभावना है।