सरकारी प्रतिभूतियों पर विदेशी निवेशकों को टैक्स छूट: कैपिटल गेन और ब्याज आयकर से मुक्ति, 1 अप्रैल 2026 से लागू
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 5 जून 2026 को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट (BIS) को भारतीय सरकारी प्रतिभूतियों (G-Securities) में निवेश पर कैपिटल गेन टैक्स और ब्याज आयकर से पूर्ण छूट देने की घोषणा की। यह राहत 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी मानी जाएगी। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब उभरते बाज़ारों में रुपए का प्रदर्शन दबाव में है और वैश्विक अस्थिरता के कारण कच्चे तेल की कीमतें ऊँचे स्तर पर बनी हुई हैं।
सरकारी प्रतिभूतियाँ क्या होती हैं
सरकारी प्रतिभूतियाँ (G-Secs) वे ऋण उपकरण हैं जिन्हें केंद्र या राज्य सरकार धन जुटाने के लिए जारी करती है। इनमें ट्रेजरी बिल, डेटेड सिक्योरिटीज और सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड शामिल हैं। चूँकि ये सरकार द्वारा जारी किए जाते हैं, इसलिए ये भारतीय रुपए में होते हैं और इन पर रिटर्न भी रुपए में ही प्राप्त होता है।
विदेशी निवेशक मुख्यतः दो मार्गों से इनमें निवेश कर सकते हैं — फुली एक्सेसिबल रूट (FAR) और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा अनुमत सामान्य निवेश मार्ग।
पहले क्या था टैक्स ढाँचा
इस घोषणा से पहले, FII और BIS को सरकारी प्रतिभूतियाँ बेचने पर अर्जित आय पर 12.5 प्रतिशत का लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स और ब्याज आय पर 20 प्रतिशत का आयकर चुकाना पड़ता था। अब इन दोनों मदों पर पूर्ण कर-छूट लागू होगी।
मौजूदा विदेशी निवेश की स्थिति
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, 12 मई 2026 तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय सरकारी प्रतिभूतियों में कुल ₹3.75 लाख करोड़ का निवेश किया था, जो कुल बकाया का लगभग 3.34 प्रतिशत है। इसमें से ₹3.21 लाख करोड़ FAR के ज़रिए और शेष ₹54,000 करोड़ सामान्य निवेश मार्ग से आए हैं।
इस फैसले का असर क्या होगा
विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम दीर्घकालिक विदेशी निवेशकों को भारतीय बॉन्ड बाज़ार की ओर आकर्षित करेगा। कर-बोझ हटने से निवेश की शुद्ध आय बढ़ेगी, जिससे भारतीय प्रतिभूतियाँ वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगी। इससे रुपए में स्थिरता आने की भी उम्मीद है, क्योंकि बड़े और स्थायी पूँजी प्रवाह मुद्रा की अस्थिरता को कम करते हैं।
गौरतलब है कि यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक बॉन्ड सूचकांकों में अपनी उपस्थिति बढ़ा रहा है और विदेशी पूँजी प्रवाह को दीर्घकालिक आधार देने की कोशिश कर रहा है।
आगे क्या होगा
यह छूट 1 अप्रैल 2026 से पूर्वव्यापी रूप से लागू होगी, जिसका अर्थ है कि चालू वित्त वर्ष में पहले से किए गए निवेश पर भी इसका लाभ मिलेगा। बाज़ार विशेषज्ञ इस बात पर नज़र रखेंगे कि क्या यह नीतिगत बदलाव अगले कुछ तिमाहियों में FII निवेश के आँकड़ों में उल्लेखनीय वृद्धि लाता है।