13 सितंबर 2026
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ब्रिक्स 2026 अध्यक्षता: भारत-खाड़ी साझेदारी तेल से आगे टेक्नोलॉजी, खाद्य सुरक्षा तक

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ब्रिक्स 2026 अध्यक्षता: भारत-खाड़ी साझेदारी तेल से आगे टेक्नोलॉजी, खाद्य सुरक्षा तक

सारांश

ब्रिक्स 2026 की अध्यक्षता भारत के लिए महज़ एक राजनयिक पड़ाव नहीं — यह खाड़ी देशों के साथ दशकों पुराने तेल-केंद्रित रिश्तों को तकनीक, खाद्य सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा की बहुआयामी साझेदारी में बदलने का सुनहरा मौका है। जीसीसी FTA वार्ता इस बदलाव को संस्थागत रूप दे रही है।

मुख्य बातें

ब्रिक्स 2026 अध्यक्षता के तहत भारत खाड़ी देशों के साथ संबंधों को तेल से आगे टेक्नोलॉजी, खाद्य सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा तक विस्तारित कर रहा है।
मई 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूएई यात्रा में कच्चे तेल, एलएनजी व एलपीजी सहयोग गहरा हुआ और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार में यूएई भागीदारी पर सहमति बनी।
फरवरी 2026 में भारत ने जीसीसी के साथ व्यापक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के लिए औपचारिक वार्ता शुरू की, जिसमें 6 खाड़ी देश शामिल हैं।
विस्तारित ब्रिक्स में सऊदी अरब और यूएई की उपस्थिति से समूह का वैश्विक ऊर्जा-वित्त परिदृश्य में महत्व बढ़ा है।
भारत खाड़ी से कच्चा तेल, एलएनजी आयात करता है; बदले में खाद्य पदार्थ, फार्मास्यूटिकल्स, मशीनरी व डिजिटल सेवाएं निर्यात करता है।
क्षेत्रीय तनावों के चलते होर्मुज़ जलडमरूमध्य की ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार पर ध्यान फिर बढ़ा है।

भारत की ब्रिक्स 2026 अध्यक्षता खाड़ी देशों के साथ दशकों पुराने तेल-केंद्रित संबंधों को एक बहुआयामी रणनीतिक साझेदारी में बदलने की दिशा में निर्णायक मोड़ साबित हो रही है — जिसमें अब निवेश, टेक्नोलॉजी, खाद्य सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे क्षेत्र शामिल हैं। 12 सितंबर 2026 को प्रकाशित एक नई रिपोर्ट में यह विश्लेषण सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में ऊर्जा संबंध रिश्तों की बुनियाद तो बने हुए हैं, किंतु सहयोग के नए रणनीतिक आयाम तेज़ी से उभर रहे हैं।

ऊर्जा से परे: स्वच्छ तकनीक में नई भागीदारी

रिपोर्ट में कहा गया है कि 'सौर उपकरण, ग्रीन हाइड्रोजन, बैटरी स्टोरेज और कम-कार्बन टेक्नोलॉजी सहित क्षेत्रों में खाड़ी की पूंजी और नवीकरणीय ऊर्जा विशेषज्ञता को भारत की इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग और बाज़ार के आकार के साथ जोड़ा जा सकता है।' यह उस वैश्विक ऊर्जा-परिवर्तन की पृष्ठभूमि में आया है जिसमें खाड़ी देश स्वयं जीवाश्म-ईंधन पर निर्भरता घटाने की कोशिश कर रहे हैं।

मई 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूएई यात्रा के दौरान दोनों देशों ने कच्चे तेल, एलएनजी और एलपीजी पर सहयोग गहरा किया। साथ ही भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार में यूएई की भागीदारी बढ़ाने पर सहमति बनी और रणनीतिक गैस भंडार की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।

खाद्य सुरक्षा: कृषि और लॉजिस्टिक्स में नया मोर्चा

रिपोर्ट के अनुसार, खाद्य सुरक्षा सहयोग का एक उभरता हुआ क्षेत्र है, जो खाड़ी की माँग को भारत की कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षमताओं से जोड़ सकता है। भंडारण, लॉजिस्टिक्स और भरोसेमंद सप्लाई चेन में निवेश की संभावनाएं तलाश की जा सकती हैं। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएँ भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण दबाव में हैं।

भू-राजनीतिक संदर्भ और होर्मुज़ का महत्व

रिपोर्ट ने कार्यक्रम के समय को भी महत्वपूर्ण बताया — क्षेत्रीय तनावों ने ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार और होर्मुज़ जलडमरूमध्य के ज़रिए सुरक्षित जहाज़रानी पर फिर से ध्यान खींचा है। खाड़ी देश अपनी अर्थव्यवस्थाओं में विविधता ला रहे हैं, उन्नत टेक्नोलॉजी में निवेश कर रहे हैं और एशिया के साथ कारोबारी संबंध मज़बूत कर रहे हैं।

विस्तारित ब्रिक्स में सऊदी अरब और यूएई के ज़रिए खाड़ी का प्रतिनिधित्व है, जिससे समूह का वैश्विक ऊर्जा और वित्तीय परिदृश्य में महत्व और बढ़ता है। भारत के सभी छह जीसीसी देशों के साथ गहरे संबंध हैं, जो उसे खाड़ी और व्यापक ब्रिक्स समुदाय के बीच एक स्वाभाविक सेतु की भूमिका देते हैं।

द्विपक्षीय व्यापार का मानवीय आधार

खाड़ी देश भारत की आर्थिक वृद्धि के लिए कच्चा तेल, एलएनजी और पेट्रोलियम उत्पाद उपलब्ध कराते हैं, जबकि भारत खाद्य पदार्थ, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग सामान, टेक्सटाइल, मशीनरी और डिजिटल सेवाएं प्रदान करता है। लाखों भारतीय खाड़ी में रहकर आजीविका कमाते हैं या कारोबार चलाते हैं, जो इन रिश्तों को एक मज़बूत मानवीय आधार देता है।

भारत-जीसीसी मुक्त व्यापार समझौता: नई शुरुआत

गौरतलब है कि भारत-खाड़ी संबंध फरवरी 2026 में और मज़बूत हुए, जब भारत ने जीसीसी के साथ संदर्भ की शर्तों पर हस्ताक्षर किए और एक व्यापक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के लिए औपचारिक वार्ता शुरू की। इस समझौते में बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और यूएई शामिल हैं। यदि यह FTA पूरा होता है, तो यह भारत के व्यापारिक इतिहास के सबसे बड़े क्षेत्रीय समझौतों में से एक होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी व्यापार का बड़ा हिस्सा हाइड्रोकार्बन पर टिका रहा है। असली कसौटी यह होगी कि ग्रीन हाइड्रोजन और बैटरी स्टोरेज जैसे क्षेत्रों में वास्तविक निवेश प्रवाह कब और कितना आता है। जीसीसी FTA वार्ता एक सकारात्मक संस्थागत कदम है, लेकिन भारत के FTA वार्ताओं का इतिहास बताता है कि समापन में वर्षों लग सकते हैं। ब्रिक्स अध्यक्षता एक खिड़की खोलती है — सवाल यह है कि उससे कितनी धूप आती है।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रिक्स 2026 की अध्यक्षता में भारत-खाड़ी साझेदारी कैसे बदल रही है?
भारत की ब्रिक्स 2026 अध्यक्षता के तहत खाड़ी देशों के साथ सहयोग ऐतिहासिक तेल-गैस व्यापार से आगे बढ़कर टेक्नोलॉजी, खाद्य सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और क्षेत्रीय स्थिरता तक विस्तारित हो रहा है। 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में इन नए रणनीतिक क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है।
भारत-जीसीसी मुक्त व्यापार समझौते की स्थिति क्या है?
फरवरी 2026 में भारत ने जीसीसी के साथ संदर्भ की शर्तों पर हस्ताक्षर कर औपचारिक FTA वार्ता शुरू की। इस समझौते में बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और यूएई — कुल छह देश शामिल हैं।
खाड़ी देशों के साथ स्वच्छ ऊर्जा सहयोग में क्या संभावनाएं हैं?
रिपोर्ट के अनुसार, सौर उपकरण, ग्रीन हाइड्रोजन, बैटरी स्टोरेज और कम-कार्बन टेक्नोलॉजी में खाड़ी की पूंजी व नवीकरणीय ऊर्जा विशेषज्ञता को भारत की इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग और बड़े बाज़ार से जोड़ा जा सकता है। मई 2026 में मोदी की यूएई यात्रा में रणनीतिक ऊर्जा भंडार पर भी चर्चा हुई।
विस्तारित ब्रिक्स में खाड़ी देशों की भूमिका क्या है?
विस्तारित ब्रिक्स में सऊदी अरब और यूएई के ज़रिए खाड़ी का प्रतिनिधित्व है, जिससे समूह का वैश्विक ऊर्जा और वित्तीय परिदृश्य में महत्व बढ़ा है। भारत सभी छह जीसीसी देशों के साथ मज़बूत संबंध रखने के कारण खाड़ी और ब्रिक्स के बीच स्वाभाविक सेतु की भूमिका निभाता है।
खाड़ी देशों के साथ भारत के व्यापार की मानवीय नींव क्या है?
लाखों भारतीय नागरिक खाड़ी देशों में रहकर आजीविका कमाते हैं या कारोबार चलाते हैं, जो इन रिश्तों को केवल सरकारी-स्तरीय नहीं बल्कि मज़बूत मानवीय आधार देता है। यह प्रवासी समुदाय दोनों पक्षों के आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को जीवंत बनाए रखता है।
राष्ट्र प्रेस
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