सेंसेक्स 539 अंक टूटा, 76,933 पर बंद; पश्चिम एशिया तनाव और मेटल-सीमेंट की गिरावट से बाजार लगातार दूसरे दिन लाल
सारांश
मुख्य बातें
बीएसई सेंसेक्स गुरुवार, 27 अगस्त को 539.35 अंक यानी 0.70 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,933.59 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी50 116.90 अंक यानी 0.48 प्रतिशत फिसलकर 24,090.85 पर आ गया। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनावों और वैश्विक बाजारों के मिले-जुले संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार लगातार दूसरे कारोबारी दिन गिरावट के साथ बंद हुआ।
मुख्य घटनाक्रम
मेटल, पीएसयू बैंक और सीमेंट क्षेत्रों में बिकवाली के दबाव ने बाजार की चाल को नकारात्मक बनाए रखा। सेक्टरवार देखें तो निफ्टी सीमेंट में सबसे अधिक 1.33 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। इसके अलावा निफ्टी पीएसयू बैंक में 0.94 प्रतिशत, निफ्टी मेटल में 0.86 प्रतिशत और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में 0.51 प्रतिशत की कमज़ोरी रही।
व्यापक बाजार में भी दबाव बना रहा — निफ्टी मिडकैप 100 में 0.10 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.13 प्रतिशत की गिरावट आई। हालाँकि, निफ्टी फार्मा, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और निफ्टी प्राइवेट बैंक ने बेहतर प्रदर्शन किया।
टॉप गेनर्स और लूज़र्स
निफ्टी50 में अदाणी इंटरप्राइजेस, कोटक महिंद्रा बैंक, अदाणी पोर्ट्स, सिप्ला और बीईएल के शेयर दिन के शीर्ष लाभ में रहे। दूसरी तरफ, हिंडाल्को, एचडीएफसी बैंक, महिंद्रा एंड महिंद्रा, श्रीराम फाइनेंस, ग्रासिम इंडस्ट्रीज, एचसीएल टेक, भारती एयरटेल और रिलायंस के शेयर सबसे अधिक नुकसान उठाने वाले रहे।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
एक बाजार विशेषज्ञ के अनुसार, एक्सपायरी से जुड़ी उठा-पटक और मध्य-पूर्व में किसी कूटनीतिक सफलता की अनुपस्थिति के चलते बाजार फिलहाल एक सीमित दायरे में बना हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि हालाँकि कंपनियों की आय अनुमानों में ऊर्जा की ऊँची कीमतों का असर काफी हद तक समाहित हो चुका है, लेकिन हाल ही में कच्चे तेल की कीमतों और दीर्घकालिक बॉन्ड यील्ड में आई कमी से महंगाई के मोर्चे पर राहत मिलने की संभावना बनी है।
विशेषज्ञ ने आगे कहा कि एफआईआई का निवेश और कंपनियों की आय में लगातार मजबूती भारतीय शेयरों, खासकर मिड-कैप शेयरों के लिए सहारा बनी हुई है। उनके अनुसार, मिड-कैप के कई क्षेत्र वैश्विक अनिश्चितताओं से काफी हद तक अप्रभावित हैं और घरेलू माँग से लाभ उठा रहे हैं।
जैक्सन होल पर नज़र
विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशक फेड के नए चेयरमैन केविन वॉर्श के आगामी जैक्सन होल सम्मेलन में दिए जाने वाले भाषण पर बारीकी से नज़र रखेंगे। इस भाषण से महंगाई, ब्याज दरों और नीतिगत दृष्टिकोण पर संकेत मिल सकते हैं, जिनका असर वैश्विक जोखिम भावना और उभरते बाजारों में पूंजी प्रवाह पर पड़ सकता है। आने वाले कारोबारी सत्रों में इन वैश्विक संकेतों की दिशा ही घरेलू बाजार की चाल तय करेगी।