एम्फैसिस ने कोफोर्ज के खिलाफ अमेरिकी अदालत में दायर की याचिका, एग्जीक्यूटिव भर्ती और डेटा दुरुपयोग के आरोप

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एम्फैसिस ने कोफोर्ज के खिलाफ अमेरिकी अदालत में दायर की याचिका, एग्जीक्यूटिव भर्ती और डेटा दुरुपयोग के आरोप

सारांश

एम्फैसिस ने अमेरिकी अदालत में कोफोर्ज के खिलाफ याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि प्रतिद्वंद्वी फर्म ने उसके वरिष्ठ अधिकारियों को भर्ती कर और संवेदनशील ग्राहक डेटा का उपयोग कर अनुचित लाभ उठाया। पूर्व VP बृजेश खेरगमकर को चार्ल्स श्वाब प्रोजेक्ट से एक साल के लिए बाहर रखने की माँग इस मामले का केंद्रबिंदु है।

मुख्य बातें

एम्फैसिस ने कोफोर्ज के खिलाफ अमेरिकी अदालत में मार्च 2025 में याचिका दायर की।
आरोप है कि कोफोर्ज ने एम्फैसिस के पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों को भर्ती कर साझा ग्राहक चार्ल्स श्वाब की गोपनीय जानकारी हासिल की।
पूर्व उपाध्यक्ष बृजेश खेरगमकर को एक वर्ष के लिए चार्ल्स श्वाब के आउटसोर्सिंग कार्यों से प्रतिबंधित करने की माँग की गई है।
कोफोर्ज ने सभी आरोपों से इनकार किया और प्रतिदावों के मूल्यांकन का संकेत दिया।
2023 में विप्रो-जतिन दलाल और 2024 में इंफोसिस-कॉग्निजेंट विवाद जैसे मामले आईटी क्षेत्र में इस प्रवृत्ति को दर्शाते हैं।

आईटी सर्विसेज कंपनी एम्फैसिस ने प्रतिद्वंद्वी फर्म कोफोर्ज के खिलाफ अमेरिकी अदालत में याचिका दायर की है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि कोफोर्ज ने एम्फैसिस के पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों की भर्ती कर और ग्राहकों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी हासिल कर संविदात्मक दायित्वों का उल्लंघन किया। मार्च 2025 में दायर किए गए इन कानूनी दस्तावेजों का खुलासा कई रिपोर्ट्स में हुआ है।

मुकदमे की मुख्य माँगें

रिपोर्टों के अनुसार, एम्फैसिस ने अदालत से माँग की है कि कोफोर्ज को उसके दो पूर्व अधिकारियों को साझा ग्राहक चार्ल्स श्वाब से जुड़े प्रोजेक्टों पर नियुक्त करने से रोका जाए। चार्ल्स श्वाब एक ऐसी कंपनी है जिसे दोनों आईटी फर्में अपनी सेवाएँ प्रदान करती हैं।

एम्फैसिस ने यह भी अनुरोध किया है कि उन नियुक्तियों के ज़रिए कथित तौर पर प्राप्त गोपनीय व्यावसायिक जानकारी के किसी भी उपयोग पर तत्काल रोक लगाई जाए। इसके अतिरिक्त, कंपनी ने आर्थिक मुआवजे के साथ-साथ कानूनी लागत और वकील की फीस की भी माँग की है।

पूर्व उपाध्यक्ष बृजेश खेरगमकर पर आरोप

मुकदमे में एम्फैसिस के पूर्व उपाध्यक्ष बृजेश खेरगमकर का नाम विशेष रूप से शामिल किया गया है। एम्फैसिस ने माँग की है कि उन्हें एक वर्ष की अवधि के लिए कोफोर्ज के माध्यम से चार्ल्स श्वाब के आउटसोर्सिंग कार्यों में भाग लेने से प्रतिबंधित किया जाए।

कंपनी का तर्क है कि इस तरह की नियुक्ति उनके पूर्व अनुबंध में निर्धारित शर्तों का उल्लंघन करती है। एम्फैसिस का आगे आरोप है कि कोफोर्ज ने कई वरिष्ठ कर्मचारियों की भर्ती कर अनुचित व्यावसायिक लाभ उठाया, जिनके पास रणनीतिक और ग्राहक-विशिष्ट जानकारी तक पहुँच थी।

कोफोर्ज का रुख

कोफोर्ज ने सभी आरोपों से इनकार किया है। रिपोर्टों के अनुसार, कंपनी इस मामले में अपना और अपने कर्मचारी का जोरदार बचाव करने का इरादा रखती है और संभावित प्रतिदावों का भी मूल्यांकन कर रही है।

आईटी उद्योग में बढ़ते कानूनी विवाद

गौरतलब है कि हाल के वर्षों में भारतीय आईटी उद्योग में इसी तरह के कानूनी विवाद बढ़े हैं। 2024 में, इंफोसिस ने कॉग्निजेंट के खिलाफ प्रतिस्पर्धा-विरोधी आचरण और कार्यकारी भर्ती का आरोप लगाते हुए प्रतिदावा दायर किया था। इससे पहले 2023 में, विप्रो ने पूर्व सीएफओ जतिन दलाल के कॉग्निजेंट में शामिल होने के बाद संविदात्मक प्रतिबद्धताओं के कथित उल्लंघन का हवाला देते हुए उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही शुरू की थी।

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब भारतीय आईटी कंपनियाँ वैश्विक बाज़ार में ग्राहकों और प्रतिभाशाली कर्मचारियों को लेकर कड़ी प्रतिस्पर्धा में हैं। आने वाले महीनों में अदालत का फैसला इस क्षेत्र में नॉन-कम्पीट और गोपनीयता समझौतों की सीमाओं को परिभाषित करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो दर्शाता है कि प्रतिभा की छीना-झपटी अब अदालती दरवाज़ों तक पहुँच रही है। असली सवाल यह है कि क्या भारतीय आईटी कंपनियाँ अपने गोपनीयता और नॉन-कम्पीट अनुबंधों को अमेरिकी कानूनी ढाँचे में प्रभावी ढंग से लागू करवा सकती हैं — जहाँ अदालतें अक्सर कर्मचारी की गतिशीलता को प्राथमिकता देती हैं। बिना स्पष्ट नीतिगत ढाँचे के, ये कानूनी लड़ाइयाँ महँगी और अनिश्चित साबित हो सकती हैं।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एम्फैसिस ने कोफोर्ज के खिलाफ अमेरिकी अदालत में क्यों याचिका दायर की?
एम्फैसिस का आरोप है कि कोफोर्ज ने उसके पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों को भर्ती कर साझा ग्राहक चार्ल्स श्वाब से जुड़ी गोपनीय व्यावसायिक जानकारी हासिल की और इस तरह संविदात्मक दायित्वों का उल्लंघन किया। कंपनी ने निषेधात्मक राहत, आर्थिक मुआवजे और कानूनी लागत की माँग की है।
बृजेश खेरगमकर इस मामले में कैसे शामिल हैं?
बृजेश खेरगमकर एम्फैसिस के पूर्व उपाध्यक्ष हैं जिन्होंने कोफोर्ज में शामिल होने के बाद चार्ल्स श्वाब के आउटसोर्सिंग कार्यों में भूमिका निभाई। एम्फैसिस ने अदालत से माँग की है कि उन्हें एक वर्ष की अवधि के लिए इन कार्यों में भाग लेने से प्रतिबंधित किया जाए, यह तर्क देते हुए कि यह उनके पूर्व अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन है।
कोफोर्ज ने इन आरोपों पर क्या कहा है?
कोफोर्ज ने सभी आरोपों से इनकार किया है। रिपोर्टों के अनुसार, कंपनी इस मामले में अपना और अपने कर्मचारी का जोरदार बचाव करने का इरादा रखती है और संभावित प्रतिदावों का भी मूल्यांकन कर रही है।
आईटी उद्योग में इससे पहले ऐसे कौन से विवाद सामने आए हैं?
2024 में इंफोसिस ने कॉग्निजेंट के खिलाफ प्रतिस्पर्धा-विरोधी आचरण और कार्यकारी भर्ती का आरोप लगाते हुए प्रतिदावा दायर किया था। 2023 में विप्रो ने पूर्व सीएफओ जतिन दलाल के कॉग्निजेंट में शामिल होने पर संविदात्मक उल्लंघन का हवाला देते हुए कानूनी कार्यवाही शुरू की थी।
इस मुकदमे का भारतीय आईटी उद्योग पर क्या असर हो सकता है?
अदालत का फैसला नॉन-कम्पीट और गोपनीयता समझौतों की सीमाओं को परिभाषित करने में अहम भूमिका निभा सकता है। यह मामला भारतीय आईटी कंपनियों को अपने अनुबंधों की शर्तों को और अधिक स्पष्ट और कानूनी रूप से मजबूत बनाने के लिए प्रेरित कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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