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RBI ने VRRR नीलामी से ₹2.23 लाख करोड़ अवशोषित किए, बैंकिंग तरलता घटाने की कोशिश

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RBI ने VRRR नीलामी से ₹2.23 लाख करोड़ अवशोषित किए, बैंकिंग तरलता घटाने की कोशिश

सारांश

RBI ने शुक्रवार को VRRR नीलामी के ज़रिये ₹2.23 लाख करोड़ की अतिरिक्त नकदी 5.24% दर पर अवशोषित की — इसी सप्ताह ₹3.93 लाख करोड़ की पिछली नीलामी के बाद। OMO बिक्री और आगामी दो और नीलामियों के साथ, केंद्रीय बैंक ₹6.94 लाख करोड़ की अधिशेष तरलता को क्रमबद्ध तरीके से घटाने की कोशिश में है।

मुख्य बातें

RBI ने 18 सितंबर 2026 को VRRR नीलामी के ज़रिये ₹2,22,629 करोड़ (लगभग ₹2.23 लाख करोड़) अवशोषित किए।
सभी बोलियाँ 5.24 प्रतिशत की भारित औसत दर पर स्वीकार की गईं; निर्धारित राशि ₹2.25 लाख करोड़ थी।
इसी सप्ताह पहले हुई VRRR नीलामी में ₹3.93 लाख करोड़ अवशोषित किए गए थे।
17 सितंबर तक बैंकिंग प्रणाली में अधिशेष तरलता ₹6.94 लाख करोड़ , जो 11 सितंबर को ₹10.73 लाख करोड़ थी।
RBI ने एक दिन पहले OMO नीलामी में ₹50,000 करोड़ की सरकारी प्रतिभूतियाँ बेचीं; 21 और 28 सितंबर को ₹25,000-25,000 करोड़ की दो और OMO बिक्री निर्धारित।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 18 सितंबर 2026 को घोषणा की कि उसने बैंकिंग प्रणाली की अतिरिक्त नकदी को नियंत्रित करने और अल्पकालिक मुद्रा बाज़ार दरों को नीतिगत रेपो दर के अनुरूप बनाए रखने के लिए वैरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) नीलामी के माध्यम से ₹2.23 लाख करोड़ अवशोषित किए हैं। यह कदम केंद्रीय बैंक की उस व्यापक तरलता प्रबंधन रणनीति का हिस्सा है, जो पिछले कई हफ्तों से जारी है।

नीलामी का विवरण

RBI की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस VRRR नीलामी में ₹2.25 लाख करोड़ की निर्धारित राशि के मुकाबले बैंकों से ₹2,22,629 करोड़ की बोलियाँ प्राप्त हुईं। केंद्रीय बैंक ने सभी प्राप्त बोलियों को स्वीकार करते हुए यह समूची राशि 5.24 प्रतिशत की भारित औसत दर पर अवशोषित की।

गौरतलब है कि RBI पिछले एक महीने से लगातार VRRR नीलामियाँ आयोजित कर रहा है। इस सप्ताह की शुरुआत में भी एक अन्य VRRR नीलामी के ज़रिये ₹3.93 लाख करोड़ की नकदी अवशोषित की गई थी, जिसमें ₹5 लाख करोड़ की निर्धारित राशि के मुकाबले ₹3,93,352 करोड़ की बोलियाँ मिली थीं और पूरी राशि 5.24 प्रतिशत की कट-ऑफ एवं भारित औसत दर पर स्वीकार की गई थी।

बैंकिंग प्रणाली में अधिशेष तरलता की स्थिति

RBI के आँकड़ों के अनुसार, 17 सितंबर 2026 तक बैंकिंग प्रणाली में लगभग ₹6.94 लाख करोड़ की अधिशेष तरलता मौजूद थी। तुलनात्मक रूप से, 11 सितंबर तक यह आँकड़ा ₹10.73 लाख करोड़ था। यह स्पष्ट करता है कि हाल की तरलता अवशोषण कार्रवाइयों के कारण अतिरिक्त नकदी में उल्लेखनीय कमी आई है।

यह ऐसे समय में आया है जब ओवरनाइट मनी मार्केट दरें नीतिगत रेपो दर से नीचे खिसकने की आशंका बनी हुई है, जो मौद्रिक नीति के प्रसारण को कमज़ोर कर सकती है।

ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO) बिक्री

यह ताज़ा VRRR कार्रवाई एक दिन पहले की गई ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO) नीलामी के तुरंत बाद हुई है, जिसके तहत RBI ने ₹50,000 करोड़ की सरकारी प्रतिभूतियाँ बेची थीं। इसके अलावा, केंद्रीय बैंक ने अपनी तरलता प्रबंधन रणनीति के तहत 21 सितंबर और 28 सितंबर को ₹25,000-25,000 करोड़ की दो अतिरिक्त OMO बिक्री भी निर्धारित की है।

आगे की संभावनाएँ

विशेषज्ञों के अनुसार, RBI की यह रणनीति दर्शाती है कि केंद्रीय बैंक मौद्रिक नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए तरलता की स्थिति पर कड़ी नज़र बनाए हुए है। आगामी OMO बिक्री और VRRR नीलामियों के परिणाम यह तय करेंगे कि बैंकिंग प्रणाली की अधिशेष नकदी किस हद तक घटाई जा सकती है और मनी मार्केट दरें रेपो दर के कितने करीब रहती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो दर कटौती का असर आम उधारकर्ता तक नहीं पहुँचता। हालाँकि एक सप्ताह में ₹10.73 लाख करोड़ से ₹6.94 लाख करोड़ पर आना उल्लेखनीय है, लेकिन यह स्तर अभी भी असाधारण रूप से ऊँचा है। असली सवाल यह है कि इतनी भारी अधिशेष तरलता आई कहाँ से — सरकारी खर्च, विदेशी पूँजी प्रवाह या ऋण वृद्धि में सुस्ती — और क्या VRRR और OMO जैसे अल्पकालिक उपाय इसकी संरचनागत जड़ को संबोधित करते हैं। बाज़ार को आगामी OMO नीलामियों की कड़ी से संकेत मिलेंगे कि RBI तरलता को कब तक और कितना खींचने का इरादा रखता है।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

VRRR नीलामी क्या होती है और RBI इसका उपयोग क्यों करता है?
वैरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) एक ऐसा तंत्र है जिसके तहत RBI बैंकों से अल्पकालिक आधार पर अतिरिक्त नकदी उधार लेता है और उन्हें बाज़ार-निर्धारित दर पर ब्याज देता है। इसका उपयोग बैंकिंग प्रणाली की अधिशेष तरलता को अवशोषित कर ओवरनाइट मनी मार्केट दरों को नीतिगत रेपो दर के करीब बनाए रखने के लिए किया जाता है।
18 सितंबर 2026 की VRRR नीलामी में क्या हुआ?
RBI ने ₹2.25 लाख करोड़ की निर्धारित राशि के मुकाबले बैंकों से ₹2,22,629 करोड़ की बोलियाँ प्राप्त कीं और सभी बोलियाँ 5.24 प्रतिशत की भारित औसत दर पर स्वीकार कर लीं। इस प्रकार ₹2.23 लाख करोड़ की अतिरिक्त नकदी प्रणाली से बाहर खींची गई।
बैंकिंग प्रणाली में इस समय कितनी अधिशेष तरलता है?
RBI के आँकड़ों के अनुसार 17 सितंबर 2026 तक बैंकिंग प्रणाली में लगभग ₹6.94 लाख करोड़ की अधिशेष तरलता थी। 11 सितंबर को यह आँकड़ा ₹10.73 लाख करोड़ था, जो दर्शाता है कि हाल की कार्रवाइयों से अतिरिक्त नकदी में कमी आई है।
RBI ने OMO बिक्री के तहत क्या कदम उठाए हैं?
RBI ने 17 सितंबर को ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO) नीलामी में ₹50,000 करोड़ की सरकारी प्रतिभूतियाँ बेचीं। इसके अलावा 21 सितंबर और 28 सितंबर को ₹25,000-25,000 करोड़ की दो अतिरिक्त OMO बिक्री भी निर्धारित की गई है।
RBI की इस तरलता अवशोषण रणनीति का आम बैंक ग्राहकों पर क्या असर होगा?
सीधा असर तत्काल नहीं होता, लेकिन अगर मनी मार्केट दरें रेपो दर के करीब बनी रहती हैं, तो ब्याज दरों का प्रसारण अधिक प्रभावी होता है — यानी RBI की दर कटौती का लाभ होम लोन और कारोबारी ऋण पर जल्दी मिल सकता है। अधिशेष तरलता बने रहने पर यह लाभ बाधित हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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