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'एसएचई-लीप्स' डिजिटल प्लेटफॉर्म से 6 करोड़ लखपति दीदी बनाने के मिशन को मिलेगी नई ताकत

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'एसएचई-लीप्स' डिजिटल प्लेटफॉर्म से 6 करोड़ लखपति दीदी बनाने के मिशन को मिलेगी नई ताकत

सारांश

केंद्र सरकार का नया डिजिटल मंच 'एसएचई-लीप्स' सिर्फ एक ऐप नहीं — यह 6 करोड़ लखपति दीदी के सपने की डिजिटल रीढ़ है। ₹10 लाख करोड़ की योजना और 34 राज्यों में विस्तार के साथ, यह ग्रामीण महिला उद्यमिता को रियल-टाइम ट्रैकिंग से जोड़ने की अब तक की सबसे बड़ी कोशिश है।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार ने 'एसएचई-लीप्स' डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया, जिसका उद्देश्य 6 करोड़ लखपति दीदी बनाने के मिशन को गति देना है।
प्लेटफॉर्म की शुरुआत 29 जून 2025 को नई दिल्ली में राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन के दौरान हुई।
सरकार ने अगले पाँच वर्षों में लखपति दीदी मिशन के लिए ₹10 लाख करोड़ उपलब्ध कराने की योजना बनाई है।
'एसएचई-लीप्स' को 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जाएगा और यह राज्य ग्रामीण आजीविका मिशनों से जुड़ेगा।
प्लेटफॉर्म कृषि व गैर-कृषि दोनों उद्यमों की एंड-टू-एंड डिजिटल ट्रैकिंग और रियल-टाइम डेटा उपलब्ध कराएगा।

केंद्र सरकार ने 1 जुलाई 2025 को ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण डिजिटल पहल की घोषणा की। नया प्लेटफॉर्म 'एसएचई-लीप्स' (SHE-LEAPS: Self-Help Entrepreneur-Livelihoods and Enterprise Application for Prosperity and Sustainability) देशभर में 6 करोड़ 'लखपति दीदी' बनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य को गति देने में केंद्रीय भूमिका निभाएगा। बुधवार को जारी आधिकारिक फैक्टशीट में यह जानकारी सामने आई।

क्या है 'एसएचई-लीप्स' प्लेटफॉर्म

'एसएचई-लीप्स' एक समर्पित डिजिटल और मोबाइल ऐप-आधारित मंच है, जिसे विशेष रूप से ग्रामीण भारत की स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ी महिलाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसके माध्यम से महिलाएँ अपना उद्यम शुरू कर सकेंगी, उसे विस्तार दे सकेंगी और उसकी प्रगति की एंड-टू-एंड डिजिटल ट्रैकिंग कर सकेंगी। यह प्लेटफॉर्म आजीविका संवर्धन, उद्यम विकास और वित्तीय समावेशन — तीनों को एक साथ संबोधित करता है।

सरकार के अनुसार, यह प्लेटफॉर्म कृषि और गैर-कृषि — दोनों प्रकार के ग्रामीण उद्यमों को बढ़ावा देगा। इसका दीर्घकालिक उद्देश्य गाँवों में एक मजबूत और टिकाऊ स्थानीय अर्थव्यवस्था की नींव तैयार करना है।

लखपति दीदी मिशन को कैसे मिलेगी रफ्तार

आधिकारिक फैक्टशीट के मुताबिक, 'एसएचई-लीप्स' सीधे तौर पर 'लखपति दीदी' मिशन की रफ्तार बढ़ाएगा। इसके जरिए महिलाओं की आय वृद्धि की रियल-टाइम डिजिटल निगरानी होगी। सरकार ने अगले पाँच वर्षों में इस मिशन के तहत महिलाओं को लाभ पहुँचाने के लिए ₹10 लाख करोड़ उपलब्ध कराने की भी योजना बनाई है।

यह ऐसे समय में आया है जब ग्रामीण महिला उद्यमिता को लेकर नीतिगत जोर पहले से बढ़ा हुआ है। लखपति दीदी — यानी प्रतिवर्ष कम-से-कम ₹1 लाख की आय अर्जित करने वाली महिला — का लक्ष्य 6 करोड़ तक पहुँचाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन में हुई शुरुआत

इस डिजिटल प्लेटफॉर्म की औपचारिक शुरुआत 29 जून 2025 को नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन के दौरान हुई। सम्मेलन का केंद्रीय विषय 'विकसित ग्राम-विकसित भारत' के विजन को ज़मीनी स्तर पर साकार करने की रणनीति तैयार करना था।

34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में होगा लागू

सरकार के अनुसार, 'एसएचई-लीप्स' को देश के 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जाएगा। यह संबंधित राज्य ग्रामीण आजीविका मिशनों के साथ समन्वय में काम करेगा। प्लेटफॉर्म के माध्यम से ग्रामीण उद्यमों से जुड़ा रियल-टाइम डेटा उपलब्ध होगा, जिससे स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक बेहतर नीति-निर्माण और निगरानी संभव होगी।

आगे की राह

सरकार का कहना है कि डिजिटल तकनीक, उद्यमिता और महिला सशक्तीकरण को एकीकृत करने वाला यह प्लेटफॉर्म ग्रामीण भारत में समावेशी आर्थिक बदलाव का आधार बनेगा। गौरतलब है कि SHG नेटवर्क पहले से देश के लाखों गाँवों में फैला है — 'एसएचई-लीप्स' इसी ढाँचे को डिजिटल शक्ति देने का प्रयास है। अब असली परीक्षा इस बात की होगी कि यह ऐप ज़मीनी स्तर पर उन महिलाओं तक कितनी सहजता से पहुँचता है जो अभी भी डिजिटल साक्षरता की सीढ़ियाँ चढ़ रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल क्रियान्वयन का है — देश के उन लाखों गाँवों में जहाँ स्मार्टफोन की पहुँच सीमित है और डिजिटल साक्षरता अभी भी एक चुनौती है, वहाँ मोबाइल ऐप-आधारित ट्रैकिंग कितनी कारगर होगी? ₹10 लाख करोड़ की धनराशि प्रभावशाली है, लेकिन पिछले SHG-आधारित कार्यक्रमों में भी वित्तीय प्रवाह और वास्तविक आय वृद्धि के बीच की खाई चिंताजनक रही है। 6 करोड़ का लक्ष्य तभी सार्थक होगा जब 'लखपति' की परिभाषा — यानी प्रतिवर्ष ₹1 लाख की आय — को सत्यापन-योग्य और टिकाऊ तरीके से मापा जाए, न कि केवल नामांकन संख्याओं से।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'एसएचई-लीप्स' प्लेटफॉर्म क्या है?
'एसएचई-लीप्स' (SHE-LEAPS) केंद्र सरकार का एक नया डिजिटल और मोबाइल ऐप-आधारित मंच है, जिसे ग्रामीण स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ी महिलाओं के उद्यम विकास, आजीविका संवर्धन और वित्तीय समावेशन के लिए तैयार किया गया है। इसका पूरा नाम Self-Help Entrepreneur-Livelihoods and Enterprise Application for Prosperity and Sustainability है।
'लखपति दीदी' मिशन क्या है और इसका लक्ष्य क्या है?
'लखपति दीदी' मिशन के तहत सरकार ग्रामीण महिलाओं को प्रतिवर्ष कम-से-कम ₹1 लाख की आय अर्जित करने में सक्षम बनाना चाहती है। सरकार का लक्ष्य देशभर में 6 करोड़ ऐसी 'लखपति दीदी' तैयार करना है, और 'एसएचई-लीप्स' इसी मिशन को डिजिटल गति देने का साधन है।
'एसएचई-लीप्स' कब और कहाँ लॉन्च किया गया?
इस प्लेटफॉर्म की औपचारिक शुरुआत 29 जून 2025 को नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन के दौरान हुई। सम्मेलन का विषय 'विकसित ग्राम-विकसित भारत' था।
यह प्लेटफॉर्म कितने राज्यों में लागू होगा और इसके लिए कितना बजट है?
'एसएचई-लीप्स' को देश के 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जाएगा। सरकार ने अगले पाँच वर्षों में लखपति दीदी मिशन के तहत ₹10 लाख करोड़ उपलब्ध कराने की योजना बनाई है।
'एसएचई-लीप्स' से ग्रामीण महिलाओं को क्या फायदा होगा?
इस प्लेटफॉर्म के जरिए महिलाएँ अपना उद्यम शुरू कर सकेंगी, उसकी एंड-टू-एंड डिजिटल ट्रैकिंग कर सकेंगी और रियल-टाइम डेटा के आधार पर बेहतर नीतिगत सहायता पा सकेंगी। यह कृषि और गैर-कृषि — दोनों प्रकार के उद्यमों को बढ़ावा देगा और राज्य ग्रामीण आजीविका मिशनों से सीधे जुड़ेगा।
राष्ट्र प्रेस
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