'एसएचई-लीप्स' डिजिटल प्लेटफॉर्म से 6 करोड़ लखपति दीदी बनाने के मिशन को मिलेगी नई ताकत
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 1 जुलाई 2025 को ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण डिजिटल पहल की घोषणा की। नया प्लेटफॉर्म 'एसएचई-लीप्स' (SHE-LEAPS: Self-Help Entrepreneur-Livelihoods and Enterprise Application for Prosperity and Sustainability) देशभर में 6 करोड़ 'लखपति दीदी' बनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य को गति देने में केंद्रीय भूमिका निभाएगा। बुधवार को जारी आधिकारिक फैक्टशीट में यह जानकारी सामने आई।
क्या है 'एसएचई-लीप्स' प्लेटफॉर्म
'एसएचई-लीप्स' एक समर्पित डिजिटल और मोबाइल ऐप-आधारित मंच है, जिसे विशेष रूप से ग्रामीण भारत की स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ी महिलाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसके माध्यम से महिलाएँ अपना उद्यम शुरू कर सकेंगी, उसे विस्तार दे सकेंगी और उसकी प्रगति की एंड-टू-एंड डिजिटल ट्रैकिंग कर सकेंगी। यह प्लेटफॉर्म आजीविका संवर्धन, उद्यम विकास और वित्तीय समावेशन — तीनों को एक साथ संबोधित करता है।
सरकार के अनुसार, यह प्लेटफॉर्म कृषि और गैर-कृषि — दोनों प्रकार के ग्रामीण उद्यमों को बढ़ावा देगा। इसका दीर्घकालिक उद्देश्य गाँवों में एक मजबूत और टिकाऊ स्थानीय अर्थव्यवस्था की नींव तैयार करना है।
लखपति दीदी मिशन को कैसे मिलेगी रफ्तार
आधिकारिक फैक्टशीट के मुताबिक, 'एसएचई-लीप्स' सीधे तौर पर 'लखपति दीदी' मिशन की रफ्तार बढ़ाएगा। इसके जरिए महिलाओं की आय वृद्धि की रियल-टाइम डिजिटल निगरानी होगी। सरकार ने अगले पाँच वर्षों में इस मिशन के तहत महिलाओं को लाभ पहुँचाने के लिए ₹10 लाख करोड़ उपलब्ध कराने की भी योजना बनाई है।
यह ऐसे समय में आया है जब ग्रामीण महिला उद्यमिता को लेकर नीतिगत जोर पहले से बढ़ा हुआ है। लखपति दीदी — यानी प्रतिवर्ष कम-से-कम ₹1 लाख की आय अर्जित करने वाली महिला — का लक्ष्य 6 करोड़ तक पहुँचाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन में हुई शुरुआत
इस डिजिटल प्लेटफॉर्म की औपचारिक शुरुआत 29 जून 2025 को नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन के दौरान हुई। सम्मेलन का केंद्रीय विषय 'विकसित ग्राम-विकसित भारत' के विजन को ज़मीनी स्तर पर साकार करने की रणनीति तैयार करना था।
34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में होगा लागू
सरकार के अनुसार, 'एसएचई-लीप्स' को देश के 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जाएगा। यह संबंधित राज्य ग्रामीण आजीविका मिशनों के साथ समन्वय में काम करेगा। प्लेटफॉर्म के माध्यम से ग्रामीण उद्यमों से जुड़ा रियल-टाइम डेटा उपलब्ध होगा, जिससे स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक बेहतर नीति-निर्माण और निगरानी संभव होगी।
आगे की राह
सरकार का कहना है कि डिजिटल तकनीक, उद्यमिता और महिला सशक्तीकरण को एकीकृत करने वाला यह प्लेटफॉर्म ग्रामीण भारत में समावेशी आर्थिक बदलाव का आधार बनेगा। गौरतलब है कि SHG नेटवर्क पहले से देश के लाखों गाँवों में फैला है — 'एसएचई-लीप्स' इसी ढाँचे को डिजिटल शक्ति देने का प्रयास है। अब असली परीक्षा इस बात की होगी कि यह ऐप ज़मीनी स्तर पर उन महिलाओं तक कितनी सहजता से पहुँचता है जो अभी भी डिजिटल साक्षरता की सीढ़ियाँ चढ़ रही हैं।