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'लखपति दीदी' को 'लोक ओएस' की डिजिटल शक्ति: 3.87 करोड़ महिलाओं तक पहुँच, ₹9,718 करोड़ का फंड ट्रैक

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'लखपति दीदी' को 'लोक ओएस' की डिजिटल शक्ति: 3.87 करोड़ महिलाओं तक पहुँच, ₹9,718 करोड़ का फंड ट्रैक

सारांश

'लखपति दीदी' अब सिर्फ एक नारा नहीं — लोक ओएस ने इसे 3.87 करोड़ महिलाओं तक पहुँचने वाला डिजिटल तंत्र बना दिया है। 5.92 लाख गाँवों में फैला यह प्लेटफॉर्म ₹64,607 करोड़ से अधिक के फंड की रियल-टाइम निगरानी कर रहा है — ग्रामीण आजीविका प्रशासन में यह बड़ा बदलाव है।

मुख्य बातें

लोक ओएस प्लेटफॉर्म के ज़रिए 3.87 करोड़ संभावित लखपति दीदियों का नेटवर्क तैयार किया गया है।
6,611 मास्टर ट्रेनर और 4.09 लाख CRP इस डिजिटल तंत्र से जुड़े हैं; 18.50 करोड़ डिजिटल आजीविका रजिस्टर उपलब्ध।
प्लेटफॉर्म पर ₹9,718.41 करोड़ RF, ₹64,607.66 करोड़ CIF और ₹38.34 करोड़ CEF ट्रैक हो रहा है।
यह प्लेटफॉर्म 34 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों , 762 जिलों , 5.92 लाख गाँवों तक पहुँच चुका है।
DAY-NRLM के तहत विकसित लोक ओएस में वेब और मोबाइल दोनों एप्लिकेशन उपलब्ध हैं।

दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के तहत विकसित डिजिटल प्लेटफॉर्म 'लोक ओएस' (LokOS) ने 'लखपति दीदी' अभियान को ज़मीनी स्तर पर नई रफ्तार दे दी है। सरकारी फैक्टशीट के अनुसार, यह प्लेटफॉर्म अब 3.87 करोड़ संभावित लखपति दीदियों तक रियल-टाइम पहुँच, प्रगति की निगरानी और डिजिटल वित्तीय प्रबंधन सुनिश्चित कर रहा है। ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में यह अब तक का सबसे बड़ा डिजिटल हस्तक्षेप माना जा रहा है।

लोक ओएस का नेटवर्क और पहुँच

सरकारी आँकड़ों के अनुसार, लोक ओएस के माध्यम से 6,611 मास्टर ट्रेनर और 4.09 लाख कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन (CRP) का एक सुदृढ़ नेटवर्क खड़ा किया गया है। इसके साथ ही प्लेटफॉर्म पर 18.50 करोड़ डिजिटल आजीविका रजिस्टर उपलब्ध हैं, जो आजीविका की योजना बनाने, निगरानी करने और उसे लागू करने के लिए एक मज़बूत डिजिटल आधार प्रदान करते हैं।

भौगोलिक विस्तार की दृष्टि से यह प्लेटफॉर्म 34 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों, 762 जिलों, 7,241 ब्लॉकों, 2.57 लाख ग्राम पंचायतों और 5.92 लाख गाँवों तक फैल चुका है — जो इसे भारत के सबसे व्यापक ग्रामीण डिजिटल प्लेटफॉर्मों में से एक बनाता है।

वित्तीय निगरानी: अरबों रुपये का पारदर्शी प्रबंधन

लोक ओएस की सबसे बड़ी उपलब्धि सामुदायिक संस्थाओं को मिलने वाली वित्तीय सहायता की पारदर्शी ट्रैकिंग है। सरकारी बयान के अनुसार, अब तक प्लेटफॉर्म के ज़रिए ₹9,718.41 करोड़ का रिवॉल्विंग फंड (RF), ₹64,607.66 करोड़ का कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड (CIF) और ₹38.34 करोड़ का कम्युनिटी एंटरप्राइज़ फंड (CEF) ट्रैक किया जा रहा है। यह पारदर्शिता भ्रष्टाचार की संभावना को कम करने और लाभार्थियों तक सीधी पहुँच सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाती है।

प्लेटफॉर्म की कार्यप्रणाली

लोक ओएस में वेब और मोबाइल — दोनों तरह के एप्लिकेशन उपलब्ध हैं। वेब एप्लिकेशन का उपयोग प्रशासक, ई-बुककीपर और लेनदेन को मंज़ूरी देने वाले अधिकारी — स्वयं सहायता समूह (SHG), ग्राम संगठन, क्लस्टर लेवल फेडरेशन और उनके सदस्यों का प्रबंधन करने के लिए करते हैं। वहीं, मोबाइल एप्लिकेशन के ज़रिए फील्ड स्तर पर सामुदायिक संगठनों की गतिविधियाँ आसानी से रिकॉर्ड और संचालित की जाती हैं।

प्लेटफॉर्म पर सदस्यों का रिकॉर्ड, प्रोफाइल, बचत, ऋण, पुनर्भुगतान, वित्तीय लेनदेन, आजीविका गतिविधियाँ और विभिन्न सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी डिजिटल रूप से दर्ज की जाती है — जो एक समग्र और एकीकृत डेटा पारिस्थितिकी तंत्र बनाता है।

आम जनता पर असर और आगे की राह

गौरतलब है कि 'लखपति दीदी' अभियान का लक्ष्य ग्रामीण महिलाओं को प्रतिवर्ष ₹1 लाख या उससे अधिक की आय अर्जित करने में सक्षम बनाना है। लोक ओएस के ज़रिए इस लक्ष्य की ओर प्रगति की रियल-टाइम निगरानी अब संभव हो गई है, जो न केवल नीति-निर्माताओं को सटीक डेटा देती है, बल्कि ज़िला और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों को भी त्वरित हस्तक्षेप का अवसर प्रदान करती है। यह ऐसे समय में आया है जब ग्रामीण महिलाओं की वित्तीय समावेशन दर को लेकर नीति-मंचों पर व्यापक बहस जारी है। सामुदायिक संस्थाओं के डिजिटल रूपांतरण की यह यात्रा आत्मनिर्भर ग्रामीण समुदायों के निर्माण की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि 3.87 करोड़ 'संभावित' लखपति दीदियों में से कितनी वास्तव में ₹1 लाख की वार्षिक आय तक पहुँची हैं — यह संख्या सरकारी फैक्टशीट में अनुपस्थित है। ₹64,607 करोड़ के CIF की 'ट्रैकिंग' और उसके प्रभावी वितरण के बीच का अंतर महत्वपूर्ण है; डिजिटल निगरानी तंत्र का होना यह सुनिश्चित नहीं करता कि फंड सही लाभार्थियों तक पहुँच रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब स्वयं सहायता समूह आंदोलन तीन दशक पुराना हो चुका है, फिर भी ग्रामीण महिलाओं की औसत आय और शहरी महिलाओं के बीच की खाई गहरी बनी हुई है। डिजिटल बुनियादी ढाँचे की सफलता तभी मानी जाएगी जब सत्यापन-योग्य आय वृद्धि के आँकड़े सार्वजनिक किए जाएँ।
RashtraPress
4 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'लोक ओएस' प्लेटफॉर्म क्या है?
लोक ओएस, दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के तहत विकसित एक आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म है। इसका उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों, ग्राम संगठनों और क्लस्टर लेवल फेडरेशन जैसी सामुदायिक संस्थाओं की पूरी कार्यप्रणाली को डिजिटल बनाना है।
'लखपति दीदी' अभियान में लोक ओएस की क्या भूमिका है?
लोक ओएस, 'लखपति दीदी' अभियान के लाभार्थियों की प्रगति की रियल-टाइम निगरानी करता है और उनकी आजीविका गतिविधियों, बचत, ऋण और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी डिजिटल रूप से दर्ज करता है। इससे नीति-निर्माताओं और ज़िला अधिकारियों को सटीक डेटा के आधार पर त्वरित हस्तक्षेप का अवसर मिलता है।
लोक ओएस से कितने लोग जुड़े हैं और यह कितने राज्यों में है?
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, लोक ओएस से 6,611 मास्टर ट्रेनर, 4.09 लाख CRP और 3.87 करोड़ संभावित लखपति दीदियाँ जुड़ी हैं। यह प्लेटफॉर्म 34 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 762 जिलों और 5.92 लाख गाँवों तक पहुँच चुका है।
लोक ओएस पर कितने फंड की निगरानी हो रही है?
सरकारी बयान के अनुसार, प्लेटफॉर्म के ज़रिए ₹9,718.41 करोड़ का रिवॉल्विंग फंड, ₹64,607.66 करोड़ का कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड और ₹38.34 करोड़ का कम्युनिटी एंटरप्राइज़ फंड ट्रैक किया जा रहा है। यह वित्तीय पारदर्शिता सामुदायिक संस्थाओं को मिलने वाली सहायता की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करती है।
'लखपति दीदी' अभियान का लक्ष्य क्या है?
'लखपति दीदी' अभियान का लक्ष्य ग्रामीण महिलाओं को प्रतिवर्ष ₹1 लाख या उससे अधिक की टिकाऊ आय अर्जित करने में सक्षम बनाना है। DAY-NRLM के तहत स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाज़ार से जोड़ा जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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