पाकिस्तान को श्रीलंका का पान निर्यात घटकर आधा, 2019 से 2024 के बीच कमाई ₹9.27 मिलियन डॉलर पर आई
सारांश
मुख्य बातें
श्रीलंका के पान निर्यात सेक्टर को अपने सबसे बड़े बाज़ार पाकिस्तान को होने वाले शिपमेंट में भारी गिरावट का सामना करना पड़ा है। टैरिफ और रेगुलेटरी बाधाओं के चलते 2019 से 2024 के बीच निर्यात मात्रा लगभग आधी रह गई और डॉलर की कमाई भी लगभग आधी हो गई। 'श्रीलंका गार्डियन' की एक हालिया रिपोर्ट में यह चेतावनी दी गई है कि व्यापार और कृषि एजेंसियों के बीच तालमेल की कमी से किसानों के लिए अधिक उत्पादन का गंभीर जोखिम पैदा हो सकता है।
निर्यात में गिरावट के आँकड़े
रिपोर्ट के आँकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान को होने वाला पान निर्यात 2019 में 4,387.02 मीट्रिक टन था, जो 2024 में घटकर 2,250.99 टन रह गया — यानी पाँच वर्षों में करीब 49% की गिरावट। इसी अवधि में निर्यात से होने वाली कमाई 17.77 मिलियन डॉलर से सिकुड़कर 9.27 मिलियन डॉलर पर आ गई।
2025 में कुछ सुधार दर्ज हुआ — मात्रा 3,336.18 टन और राजस्व 13.39 मिलियन डॉलर तक पहुँचा — लेकिन ये आँकड़े अभी भी 2019 के शिखर से काफी नीचे हैं।
खेती का रकबा बढ़ा, कमाई नहीं
गौरतलब है कि इसी दौरान मुफ्त प्लांटिंग सामग्री और निवेश सब्सिडी के ज़रिये पान की खेती का रकबा 2025 तक 44 प्रतिशत बढ़कर 1,676 हेक्टेयर हो गया। रिपोर्ट इसे एक 'साफ विरोधाभास' करार देती है — उत्पादन क्षमता बढ़ रही है, जबकि निर्यात आय घट रही है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि 2022-2023 के दौरान अमेरिकी डॉलर में कमाई घटने के बावजूद श्रीलंकाई रुपये (LKR) में राजस्व में जो बढ़ोतरी दिखी, वह मुख्यतः डॉलर के मुकाबले श्रीलंकाई रुपये के अवमूल्यन का परिणाम थी — वास्तविक निर्यात प्रदर्शन में सुधार नहीं था।
सरकारी विभागों के बीच तालमेल की कमी
निर्यातकों ने बाज़ार पहुँच खोने की चिंता श्रीलंका के वाणिज्य विभाग के समक्ष रखी। हालाँकि, निर्यात कृषि विभाग ने स्वीकार किया कि उसके विकास या अनुसंधान प्रभाग ने पान निर्यात पर पाकिस्तानी टैरिफ और आयात प्रतिबंधों के प्रभाव को लेकर कोई अध्ययन नहीं किया है। रिपोर्ट के अनुसार, यह संस्थागत अंतर नीति-निर्माण को कमज़ोर कर रहा है।
राजनयिक स्तर पर उठाया गया मामला
यह चिंता 28 जनवरी 2026 को वाणिज्य सचिव स्तर की बातचीत और 1 जुलाई 2026 को व्यापार, निवेश और ऑटो सेक्टर पर संयुक्त कार्य समूह की चौथी बैठक में पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल के सामने भी रखी गई। पाकिस्तानी पक्ष ने बताया कि संबंधित ड्यूटी को धीरे-धीरे कम करने और 2030 तक इसे पूरी तरह समाप्त करने की योजना है।
रिपोर्ट की सिफारिशें और आगे का रास्ता
रिपोर्ट में माँग की गई है कि वाणिज्य विभाग और निर्यात कृषि विभाग के बीच समन्वय को तत्काल मज़बूत किया जाए। इसके साथ ही सुझाव दिया गया है कि निर्यातकों के लिए टैरिफ बाधाओं पर फील्ड स्टडी कराई जाए और PSFTA (पाकिस्तान-श्रीलंका मुक्त व्यापार समझौता) ढाँचे के अंतर्गत पाकिस्तान के रेगुलेटरी शुल्कों को 2030 तक टालने के बजाय जल्द हटाने के लिए राजनयिक प्रयास तेज़ किए जाएँ।
यदि यह समन्वय जल्द नहीं बना, तो बढ़ा हुआ उत्पादन रकबा किसानों के लिए संकट में बदल सकता है — क्योंकि निर्यात बाज़ार की माँग और घरेलू आपूर्ति के बीच की खाई और चौड़ी होने का खतरा है।