पुणे: थिंकटेक इंडिया के CEO हर्षल ठाकरे गिरफ्तार, 700 से ज़्यादा कर्मचारी बेरोज़गार, वेतन-जमा फँसी
सारांश
मुख्य बातें
पुणे स्थित आईटी कंपनी थिंकटेक इंडिया के 700 से अधिक कर्मचारी कथित तौर पर कंपनी के अचानक संचालन बंद कर देने के बाद बेरोज़गार हो गए हैं, और पुलिस ने वित्तीय अनियमितताओं तथा धोखाधड़ी के आरोपों में कंपनी के सीईओ हर्षल ठाकरे को गिरफ़्तार कर लिया है। कर्मचारियों के अनुसार, बकाया वेतन, स्टाइपेंड और लगभग ₹15,000 की सुरक्षा जमा राशि वापस पाने के लिए वे अब क़ानूनी और प्रशासनिक चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
मुख्य घटनाक्रम
रिपोर्टों के मुताबिक़, हिंजेवाड़ी आईटी हब में स्थित थिंकटेक इंडिया के दफ़्तर अप्रैल में बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक बंद कर दिए गए। कई कर्मचारी जब काम पर पहुँचे तो उन्होंने पाया कि कार्यालय पर ताला है और कंपनी के प्रतिनिधियों से संपर्क भी नहीं हो पा रहा।
यह मामला सबसे पहले एक 25 वर्षीय इंटर्न की शिकायत के बाद सामने आया, जिसके आधार पर पुलिस ने कंपनी की वित्तीय स्थिति और कारोबारी गतिविधियों की व्यापक जाँच शुरू की।
शिकायतों की बाढ़
अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती शिकायत के बाद 30 से अधिक अन्य कर्मचारी और इंटर्न भी पुलिस के पास पहुँचे और उन्होंने भी इसी तरह की शिकायतें दर्ज कराईं। इन शिकायतों में वेतन न मिलने, स्टाइपेंड रोके जाने और कर्मचारियों से ली गई राशि वापस न करने जैसे आरोप शामिल हैं।
जाँच एजेंसियों ने सीईओ के अलावा कंपनी के ट्रेनिंग एंड डेवलपमेंट प्रमुख और एक मानव संसाधन (HR) प्रबंधक के ख़िलाफ़ भी मामला दर्ज किया है।
‘लैपटॉप के नाम पर जमा राशि’
कर्मचारियों का आरोप है कि कंपनी ने भर्ती के समय हर कर्मचारी और इंटर्न से लगभग ₹15,000 की सुरक्षा जमा राशि ली थी। कंपनी का दावा था कि यह राशि आधिकारिक लैपटॉप और अन्य उपकरणों के लिए ज़रूरी है।
कर्मचारियों के अनुसार, शुरुआत में कंपनी समय पर वेतन और स्टाइपेंड देती थी, जिससे भरोसा बना। लेकिन इस वर्ष जनवरी से भुगतान पूरी तरह बंद हो गया। बाद में कंपनी ने बकाया के बदले चेक जारी किए, जिनमें से कई कथित तौर पर बाउंस हो गए — जिससे थिंकटेक इंडिया की वित्तीय स्थिति पर और गंभीर सवाल खड़े हो गए।
आम कर्मचारी पर असर
700 से अधिक प्रभावित लोगों में बड़ी संख्या युवा इंजीनियरों और फ्रेशर्स की है, जिन्होंने पहली नौकरी के लिए जमा राशि चुकाई थी। कई का कहना है कि महीनों के अवैतनिक काम और बाउंस चेकों के बाद किराया, ईएमआई और रोज़मर्रा के ख़र्च का दबाव बढ़ता जा रहा है।
आगे क्या
पुलिस का कहना है कि मामले की जाँच जारी है और कंपनी के अतिरिक्त वित्तीय रिकॉर्ड व लेनदेन से जुड़ी जानकारी की पड़ताल की जा रही है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब हिंजेवाड़ी और मगरपट्टा जैसे आईटी हब छोटे-मँझोले आईटी सर्विसेज़ स्टार्टअप्स में भुगतान-संकट की कई शिकायतों से जूझ रहे हैं।