सपना चौधरी को द्वारका कोर्ट से घरेलू हिंसा मामले में अंतरिम राहत, पति यशवीर साहू पर संपर्क प्रतिबंध
सारांश
मुख्य बातें
हरियाणवी अभिनेत्री और गायिका सपना चौधरी को 9 जून 2025 को दिल्ली की द्वारका महिला कोर्ट ने घरेलू हिंसा मामले में अंतरिम सुरक्षा प्रदान कर दी। अदालत ने महिला संरक्षण कानून के तहत उनके पति यशवीर साहू के विरुद्ध कई प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हैं, जो 25 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई तक प्रभावी रहेंगे।
कोर्ट के प्रमुख आदेश
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी निधि सिंह ने आदेश दिया कि यशवीर साहू अगली सुनवाई तक सपना चौधरी से किसी भी माध्यम से संपर्क नहीं कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त, उन्हें सपना के घर, कार्यस्थल या किसी भी सार्वजनिक आयोजन — जिसमें फिल्म प्रीमियर भी शामिल हैं — में प्रवेश करने से रोक दिया गया है।
अदालत ने रिकॉर्ड में उपलब्ध दस्तावेज़, चोटों की तस्वीरें और ऑडियो रिकॉर्डिंग सहित प्रस्तुत साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद प्रारंभिक रूप से मामले को गंभीर मानते हुए यह अंतरिम आदेश पारित किया।
याचिका में क्या आरोप लगाए गए
सपना चौधरी की ओर से अधिवक्ता प्रीति सिंह ने अदालत में दलील दी कि उनकी मुवक्किल को वैवाहिक जीवन में घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ा और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति की आशंका बनी हुई है। याचिका के अनुसार, कथित विवादों के कारण सपना को अपना वैवाहिक घर छोड़ना पड़ा और वे वर्तमान में दिल्ली के नजफगढ़ स्थित अपने मायके में रह रही हैं।
फिल्म प्रीमियर से जुड़ी सुरक्षा चिंता
अधिवक्ता प्रीति सिंह ने अदालत को बताया कि 10 जून को सपना चौधरी की फिल्म 'मोमाकू' का प्रीमियर निर्धारित है, जिसमें उनकी उपस्थिति आवश्यक है। याचिका में आशंका जताई गई कि उनके पति उक्त कार्यक्रम में पहुँचकर हंगामा, धमकी या बाधा उत्पन्न कर सकते हैं, जिससे उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा और पेशेवर गतिविधियाँ प्रभावित हो सकती हैं। अदालत ने इस तर्क को संज्ञान में लेते हुए तत्काल अंतरिम राहत प्रदान की।
आगे क्या होगा
मामले की अगली सुनवाई 25 जुलाई 2025 को निर्धारित की गई है। तब तक सभी प्रतिबंधात्मक आदेश प्रभावी रहेंगे। यह मामला घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम के तहत दायर किया गया है, जो पीड़ित महिलाओं को त्वरित अंतरिम राहत का अधिकार देता है। गौरतलब है कि यह पहला अवसर नहीं है जब किसी सार्वजनिक हस्ती ने इस कानून के तहत न्यायिक संरक्षण माँगा हो — विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे मामलों में जागरूकता बढ़ने से अदालतों में याचिकाओं की संख्या में वृद्धि हुई है।