मिलिंद चंदवानी का आरक्षण पर खुलासा: '98.5% लाने के बाद भी IIM कॉल नहीं, दोस्त को 58% पर आई'
सारांश
मुख्य बातें
सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और अभिनेत्री अविका गौर के पति मिलिंद चंदवानी का आरक्षण व्यवस्था पर एक वीडियो 28 जुलाई 2026 को तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने IIT-IIM के अपने कॉलेज अनुभव के ज़रिए भारत की आरक्षण प्रणाली पर संतुलित राय रखी। IIT और IIM के पूर्व छात्र रहे मिलिंद ने एक व्यक्तिगत किस्से के माध्यम से यह सवाल उठाया कि आरक्षण का लाभ वास्तव में ज़रूरतमंदों तक पहुँच रहा है या नहीं।
मुख्य घटनाक्रम: वायरल वीडियो में क्या कहा
मिलिंद चंदवानी ने वीडियो में वर्ष 2013 का एक किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया, 'यह बात 2013 की है। मेरे एक दोस्त ने मुझसे कहा था — 98.5 प्रतिशत लाकर क्या हासिल किया? उस वक्त मुझे 98.5 प्रतिशत लाने के बाद भी IIM से कॉल्स नहीं आ रही थीं, जबकि मेरे दोस्त को महज 58 प्रतिशत पर ही कॉल्स आ रही थीं।' उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों मध्यमवर्गीय परिवारों से थे।
मिलिंद ने यह भी कहा, 'सच कहूँ तो मेरे दोस्त को आरक्षण की कोई ज़रूरत नहीं थी, लेकिन व्यवस्था थी, तो उसने इसका फायदा उठा लिया। उस समय यह देखकर बहुत बुरा लगता था और मन में आरक्षण व्यवस्था को लेकर कई सवाल भी आए थे।'
सोच में बदलाव: 'टीच फॉर इंडिया' का अनुभव
मिलिंद ने बताया कि जब वे टीच फॉर इंडिया से जुड़े और सरकारी स्कूलों के बच्चों को पढ़ाने लगे, तब उनका नज़रिया बदला। उन्होंने कहा, 'मैंने देखा कि जिन बच्चों को सच में आरक्षण की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है, उन्हें तो यह पता ही नहीं है कि इसका फायदा कैसे उठाया जाए।'
यह अनुभव उनके लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ था — जमीनी हकीकत ने उनकी व्यक्तिगत कड़वाहट को व्यापक सामाजिक संदर्भ में देखने की दृष्टि दी।
मिलिंद की संतुलित राय
मिलिंद ने अपनी बात में स्पष्ट किया कि वे आरक्षण के पक्ष या विरोध में कोई स्पष्ट रुख नहीं रखते। उनके शब्दों में, 'मैं यह नहीं कह रहा कि आरक्षण का फायदा उठाने वाले हर इंसान को इसकी ज़रूरत नहीं होती। कई ऐसे लोग भी हैं जिन्हें इसकी वाकई ज़रूरत है।'
उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि कभी इस व्यवस्था को हटाना हो, तो पहले कम आय वर्ग के हर बच्चे को समान अवसर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करनी होगी, ताकि वे प्रतियोगी परीक्षाओं और नौकरी बाज़ार में बराबरी से खड़े हो सकें।
व्यापक सामाजिक संदर्भ
यह वीडियो ऐसे समय में सामने आया है जब सोशल मीडिया पर 'रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन' ट्रेंड कर रहा है। इस अभियान के तहत आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की माँग की जा रही है। गौरतलब है कि भारत में आरक्षण व्यवस्था संविधान के तहत सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों को अवसर देने के उद्देश्य से बनाई गई थी, और दशकों से इसके लाभ, सीमाएँ व प्रासंगिकता पर बहस जारी है।
इस मुद्दे पर देशभर में अलग-अलग राय सामने आ रही हैं — एक वर्ग बदलाव की माँग कर रहा है, तो दूसरा मानता है कि सामाजिक और आर्थिक असमानता समाप्त होने तक आरक्षण आवश्यक है।
आगे की राह
मिलिंद चंदवानी का यह वीडियो उस बड़ी बहस को एक व्यक्तिगत और ज़मीनी आयाम देता है, जो अक्सर राजनीतिक तर्कों तक सिमट जाती है। उनका अनुभव यह सवाल सामने रखता है कि क्या मौजूदा व्यवस्था उन लोगों तक प्रभावी रूप से पहुँच पा रही है जिनके लिए वह बनाई गई थी।