'द पिरामिड स्कीम': 15 साल की रिसर्च के बाद श्रेयांश पांडे का खुलासा — 5 करोड़ से ज़्यादा भारतीय हो चुके हैं शिकार
सारांश
मुख्य बातें
वेब सीरीज 'द पिरामिड स्कीम' के निर्देशक श्रेयांश पांडे ने खुलासा किया है कि पिछले करीब 20 वर्षों में भारत में 5,000 से अधिक फर्जी निवेश कंपनियाँ सामने आई हैं, जिन्होंने 5 करोड़ से ज़्यादा लोगों को पोंजी और पिरामिड स्कीमों के ज़रिए ठगा है। मुंबई में सीरीज के प्रमोशन के दौरान उन्होंने बताया कि यह आँकड़ा केवल दर्ज मामलों का है — असली संख्या कहीं अधिक हो सकती है।
15 साल की रिसर्च की कहानी
श्रेयांश पांडे के अनुसार इस सीरीज का सफर साल 2011 में शुरू हुआ था। उन्होंने कहा, 'इस कहानी का सफर साल 2011 में शुरू हुआ था। उस समय मेरे मन में इस विषय को लेकर एक विचार आया था, लेकिन उसे पूरी तरह समझना और सही तरीके से प्रस्तुत करना आसान नहीं था।' लगातार रिसर्च, पीड़ितों से बातचीत और वास्तविक घटनाओं के अध्ययन के बाद आखिरकार वह दृष्टिकोण मिला जिससे यह शो बनाया जा सका।
क्यों नहीं आते सामने ज़्यादातर मामले
पांडे ने इस ओर ध्यान दिलाया कि ठगी के शिकार अधिकांश लोग न पुलिस के पास जाते हैं, न परिवार को बताते हैं। उन्होंने कहा, 'जब कोई व्यक्ति ऐसी स्कीम में अपना पैसा गवां देता है तो वह केवल आर्थिक रूप से ही नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी टूट जाता है।' शर्म, डर और सामाजिक दबाव के कारण हज़ारों मामले दर्ज ही नहीं हो पाते — यही वजह है कि वास्तविक पीड़ितों की संख्या सरकारी आँकड़ों से कहीं अधिक हो सकती है।
समाज पर व्यापक असर
निर्देशक का कहना है कि पिरामिड स्कीम का प्रभाव इतना व्यापक है कि जब भी वे किसी नए व्यक्ति से इस विषय पर बात करते हैं, तो लगभग हर किसी के पास इससे जुड़ा कोई न कोई अनुभव होता है — किसी का चाचा, भाई, बहन या दोस्त कभी न कभी ऐसी योजना के संपर्क में आया होता है। उनके अनुसार यह मुद्दा सीधे या परोक्ष रूप से लाखों परिवारों को प्रभावित कर चुका है।
सीरीज की ताकत: वास्तविकता
पांडे ने कहा कि इस विषय की सबसे बड़ी ताकत इसकी वास्तविकता है — यह कोई काल्पनिक दुनिया नहीं, बल्कि उन घटनाओं का प्रतिबिंब है जो समाज में लगातार घटती रही हैं। दर्शकों को ऐसे किरदार और परिस्थितियाँ दिखेंगी जिनसे वे खुद को जोड़ पाएंगे।
कहाँ देखें
'द वायरल फीवर' (TVF) द्वारा निर्मित यह सीरीज प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम हो रही है। यह सीरीज ऐसे समय में आई है जब देशभर में ऑनलाइन और ऑफलाइन निवेश घोटालों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है और जागरूकता की माँग तेज़ होती जा रही है।