पश्चिम बंगाल के हर स्कूल में तंबाकू विरोधी अभियान: SOP जारी, CMO को सौंपी जिम्मेदारी
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल सरकार ने 23 जुलाई 2026 को स्कूली छात्रों को तंबाकू की लत से बचाने के लिए एक व्यापक नई पहल की शुरुआत की है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान के तहत एक नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की गई है, जिसे राज्य के सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (CMO) को भेज दिया गया है। यह कदम एक सर्वेक्षण के बाद उठाया गया है, जिसमें सामने आया कि 13 से 15 वर्ष की आयु के 8.5 प्रतिशत छात्र सिगरेट या गुटखे के आदी हैं।
अभियान की मुख्य रूपरेखा
नई SOP के अनुसार, राज्य के प्रत्येक स्कूल में तंबाकू विरोधी जागरूकता कार्यक्रम अनिवार्य रूप से चलाए जाएंगे। यदि कोई छात्र तंबाकू की लत का शिकार पाया जाता है, तो उसे सबसे पहले व्यवहार संबंधी काउंसलिंग प्रदान की जाएगी। गंभीर मामलों में उसे बेहतर उपचार के लिए बड़े स्वास्थ्य केंद्रों में भेजा जाएगा।
स्कूलों में क्विज़, पोस्टर प्रतियोगिताएँ और वाद-विवाद के माध्यम से जागरूकता फैलाई जाएगी। परामर्शदाताओं की यह ज़िम्मेदारी होगी कि वे छात्रों के साथ-साथ उनके अभिभावकों को भी तंबाकू के दुष्प्रभावों से अवगत कराएँ। अभिभावक-शिक्षक बैठकों में भी इस विषय पर विशेष चर्चा शामिल की जाएगी।
स्व-मूल्यांकन और प्रमाणीकरण प्रक्रिया
SOP के तहत हर स्कूल को हर छह महीने में 100 अंकों का स्व-मूल्यांकन करना अनिवार्य होगा। केवल वे स्कूल जो 90 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त करेंगे, उन्हें ही 'तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान' (TOFEI) का प्रमाणपत्र दिया जाएगा। प्रमाणपत्र के लिए स्कूल परिसर में 'तंबाकू मुक्त क्षेत्र' का स्पष्ट दृश्य बोर्ड और मुख्य प्रवेश द्वार पर बैनर लगाना आवश्यक होगा। इसके अलावा परिसर में सिगरेट, बीड़ी, गुटखा या खैनी के खाली पैकेट और थूक के निशान नहीं होने चाहिए।
ब्लॉक स्तर पर विशेष टीमें
स्कूलों को तंबाकू मुक्त बनाने के लिए हर ब्लॉक में एक विशेष निगरानी टीम गठित की जाएगी। इस टीम में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के चिकित्सा अधिकारी, स्टाफ नर्स, फार्मासिस्ट, परामर्शदाता और ब्लॉक स्वास्थ्य प्रबंधक शामिल होंगे। यह टीम नियमित अंतराल पर ब्लॉक के सभी स्कूलों का दौरा करेगी।
इसके अतिरिक्त, प्रत्येक स्कूल में एक तंबाकू निगरानी समिति का गठन किया जाएगा, जो यह सुनिश्चित करेगी कि स्कूल परिसर के 100 गज के दायरे में किसी भी प्रकार के तंबाकू उत्पाद की बिक्री न हो। इस लक्ष्य को पाने के लिए स्कूल प्रशासन, अभिभावकों, स्थानीय पंचायतों, युवा संगठनों और पुलिस के बीच समन्वय स्थापित किया जाएगा।
कानूनी ढाँचा और जागरूकता
सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि इस पूरे अभियान के दौरान सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (COTPA), 2003 का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा। छात्रों को इस कानून की जानकारी भी दी जाएगी ताकि वे अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति सचेत रहें। गौरतलब है कि यह पहल ऐसे समय में आई है जब देशभर में किशोरों में तंबाकू सेवन की बढ़ती प्रवृत्ति एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता बन चुकी है।
आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि SOP-आधारित यह संरचित दृष्टिकोण, जिसमें स्व-मूल्यांकन, ब्लॉक-स्तरीय निगरानी और कानूनी अनुपालन को एकीकृत किया गया है, पिछले सामान्य जागरूकता अभियानों की तुलना में अधिक प्रभावी हो सकता है। राज्य सरकार की इस पहल की सफलता काफी हद तक जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन की गुणवत्ता पर निर्भर करेगी।