क्या दादी-नानी के नुस्खों में मुलेठी गले और सांस की समस्याओं में राहत देती है?
सारांश
Key Takeaways
- मुलेठी गले और श्वसन तंत्र के लिए बेहद फायदेमंद है।
- यह कफ को संतुलित करती है और सूजन को कम करती है।
- इसका नियमित सेवन प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।
- बदलते मौसम में यह खांसी और जुकाम से बचाने में मदद करती है।
- यह गले की अंदरूनी परत को सुरक्षित रखती है।
नई दिल्ली, १६ दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। आजकल की व्यस्त जिंदगी के कारण लोग अक्सर अपना ख्याल नहीं रख पाते हैं। सुबह जल्दी उठना, भागमभाग में नाश्ता करना और दिनभर धूल-धुएं और प्रदूषण का सामना करना, यह सब स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।
जब सीढ़ियां चढ़ते समय सांस फूलने लगती है और गले में भारीपन महसूस होता है, तो लोग इसे मामूली थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन जब यह समस्या लगातार बनी रहती है, तो चिंता होना स्वाभाविक है। आयुर्वेद में इन समस्याओं का सरल और प्राकृतिक समाधान प्रस्तुत किया गया है।
आयुर्वेद के अनुसार, गले और सांस से जुड़ी समस्याएं तब बढ़ती हैं जब शरीर में कफ का स्तर बढ़ जाता है और श्वसन नलियों में सूजन आ जाती है। इस स्थिति में ऐसी औषधियों की आवश्यकता होती है जो कफ को नियंत्रित करें, सूजन को कम करें और गले को आराम दें। इसी कारण मुलेठी को आयुर्वेद में एक विशेष स्थान प्राप्त है। इसे संस्कृत में यष्टिमधु कहा जाता है, जिसका अर्थ है एक मीठी औषधि जो शरीर पर सकारात्मक प्रभाव डालती है।
भारत में मुलेठी का प्रयोग सदियों से किया जा रहा है। दादी-नानी के घरेलू नुस्खों में गले की खराश, सूखी खांसी या आवाज बैठ जाने पर मुलेठी का उपयोग आज भी कई घरों में किया जाता है। आयुर्वेद का मानना है कि मुलेठी शरीर की अंदरूनी गर्मी को शांत करती है और गले की सूखी परत को नमी प्रदान करती है। इसके प्राकृतिक तत्व गले और श्वसन नलियों में जमा सूजन को कम करने में सहायक होते हैं।
जब सांस की नली में सूजन या बलगम जमा हो जाता है, तो सांस लेने में परेशानी होती है और गले में भारीपन बना रहता है। मुलेठी इस बलगम को हटाने का कार्य करती है। इसके नियमित और सीमित सेवन से श्वसन नलियां खुलने लगती हैं और व्यक्ति को सांस लेने में राहत मिलती है। मुलेठी गले की अंदरूनी परत पर एक सुरक्षात्मक परत बनाती है, जिससे जलन और खराश कम होती है।
आयुर्वेद के अनुसार, मुलेठी समस्त श्वसन तंत्र को बेहतर बनाने में सहायक होती है। बदलते मौसम में जिन लोगों को बार-बार खांसी, जुकाम या सांस की समस्याएं होती हैं, उनके लिए यह प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में मददगार मानी जाती है। इसके प्राकृतिक तत्व शरीर के संतुलन को बनाए रखने में सहायता करते हैं, जिससे समस्याओं का दोबारा होना कम हो सकता है।