नवजात शिशु को नहलाने के सही तरीके: 6 गलतियाँ जो हर माँ-बाप को जाननी चाहिए

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नवजात शिशु को नहलाने के सही तरीके: 6 गलतियाँ जो हर माँ-बाप को जाननी चाहिए

सारांश

नवजात शिशु को नहलाना जितना सरल लगता है, उतना होता नहीं। गलत पानी का तापमान, तेज़ रगड़ाई या केमिकल युक्त साबुन — ये छोटी-सी गलतियाँ बड़ी परेशानी बन सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, प्रीमैच्योर शिशुओं के लिए स्पंजिंग अक्सर सबसे सुरक्षित विकल्प है।

मुख्य बातें

नवजात शिशु के स्नान के लिए पानी हल्का गुनगुना होना चाहिए — न अत्यधिक गर्म, न ठंडा।
प्रीमैच्योर शिशु को बहुत देर तक पानी में नहीं रखना चाहिए; स्नान जल्दी और धीरे-धीरे होना चाहिए।
शिशु की त्वचा को कभी जोर से नहीं रगड़ना चाहिए — हल्के हाथों और मुलायम कपड़े का उपयोग करें।
तेज़ खुशबू वाले साबुन या केमिकल प्रोडक्ट से बचें; डॉक्टर की सलाह से ही उत्पाद चुनें।
स्नान के दौरान कमरे का तापमान सामान्य और बंद होना चाहिए — एसी या ठंडी हवा से बचाएँ।
प्रीमैच्योर शिशुओं के लिए रोज़ाना स्नान की जगह स्पंजिंग अधिक सुरक्षित विकल्प हो सकती है।

नवजात शिशु, विशेषकर प्रीमैच्योर बच्चों, को नहलाना एक अत्यंत नाज़ुक प्रक्रिया है जिसमें जरा-सी चूक भी उनके स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकती है। इन शिशुओं की त्वचा अत्यंत कोमल होती है, शरीर का तापमान नियंत्रण तंत्र अभी पूरी तरह विकसित नहीं होता, और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कमज़ोर होती है। बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार, स्नान के दौरान की जाने वाली सामान्य गलतियाँ शिशु को सर्दी-जुकाम, त्वचा की जलन या शरीर का तापमान गिरने जैसी समस्याओं की ओर धकेल सकती हैं।

पानी का तापमान: सबसे पहली और ज़रूरी सावधानी

नवजात शिशु को नहलाने के लिए पानी हमेशा हल्का गुनगुना होना चाहिए। अत्यधिक गर्म पानी से शिशु की कोमल त्वचा जल सकती है, जबकि ठंडे पानी से सर्दी-जुकाम और शरीर का तापमान अचानक गिरने का खतरा रहता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पानी का तापमान अपनी कलाई के अंदरूनी हिस्से से जाँचें — यह सबसे संवेदनशील त्वचा वाला क्षेत्र होता है और तापमान की सटीक जाँच के लिए उपयुक्त है।

स्नान की अवधि और तरीका: जल्दी और कोमलता से

नवजात शिशु को बहुत देर तक पानी में नहीं रखना चाहिए। स्नान की प्रक्रिया जितनी जल्दी और धीरे-धीरे हो, उतना बेहतर है ताकि शिशु को ठंड न लगे। इसके साथ ही एक बड़ी गलती यह होती है कि लोग शिशु की त्वचा को जोर से रगड़ देते हैं। प्रीमैच्योर शिशु की त्वचा अत्यंत नाज़ुक होती है — रगड़ने से लालपन, जलन या खरोंच हो सकती है। हमेशा हल्के हाथों से और मुलायम कपड़े से सफाई करें।

साबुन और केमिकल प्रोडक्ट: डॉक्टर की सलाह पहले

नवजात शिशुओं के लिए तेज़ खुशबू वाले साबुन या बॉडी वॉश नुकसानदायक हो सकते हैं। इनमें मौजूद रसायन शिशु की संवेदनशील त्वचा पर एलर्जी या जलन पैदा कर सकते हैं। बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार, बेहतर यही है कि डॉक्टर की सलाह से ही कोई हल्का और सुरक्षित क्लीनिंग एजेंट इस्तेमाल किया जाए, या फिर केवल गुनगुने पानी और मुलायम कपड़े से सफाई की जाए।

कमरे का तापमान: अनदेखी न करें

स्नान के दौरान कमरे का तापमान सामान्य और आरामदायक होना चाहिए। ठंडी हवा, खुली खिड़की या चालू एसी वाले कमरे में नहलाने से शिशु तुरंत ठंड से प्रभावित हो सकता है। यह ऐसे समय में और भी ज़रूरी है जब मौसम बदल रहा हो। नहलाने से पहले ही कमरा बंद करें, तापमान जाँचें और तौलिया व कपड़े तैयार रखें।

रोज़ नहलाना ज़रूरी नहीं: स्पंजिंग एक बेहतर विकल्प

एक महत्वपूर्ण तथ्य जो कई माता-पिता नहीं जानते वह यह है कि प्रीमैच्योर शिशु को हर दिन सीधे नहलाना ज़रूरी नहीं होता। डॉक्टर अक्सर ऐसे शिशुओं के लिए स्पंजिंग — यानी हल्के गीले मुलायम कपड़े से सफाई — की सलाह देते हैं। इससे शिशु साफ भी रहता है और शरीर का तापमान गिरने या ठंड लगने का जोखिम भी नहीं रहता। गौरतलब है कि नवजात शिशु की देखभाल में हर निर्णय बाल रोग विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में लेना सबसे सुरक्षित रहता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि प्रीमैच्योर शिशुओं की विशेष ज़रूरतें अलग होती हैं और उन्हें अक्सर नज़रअंदाज़ किया जाता है। भारत में हर साल लाखों प्रीमैच्योर जन्म होते हैं, फिर भी अस्पताल से छुट्टी के बाद माता-पिता को व्यावहारिक मार्गदर्शन बहुत कम मिलता है। स्पंजिंग जैसी सरल लेकिन प्रभावी तकनीक के बारे में जागरूकता अभी भी सीमित है। यह सामग्री उस जानकारी की खाई को पाटने का प्रयास है जो अस्पताल और घर के बीच अक्सर रह जाती है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नवजात शिशु को नहलाने के लिए पानी कितना गर्म होना चाहिए?
नवजात शिशु के स्नान के लिए पानी हल्का गुनगुना होना चाहिए — न अत्यधिक गर्म और न ठंडा। तापमान जाँचने के लिए अपनी कलाई के अंदरूनी हिस्से का उपयोग करें, जो सबसे संवेदनशील त्वचा वाला क्षेत्र होता है।
प्रीमैच्योर बच्चे को कितनी बार नहलाना चाहिए?
प्रीमैच्योर शिशु को हर दिन सीधे नहलाना ज़रूरी नहीं होता। डॉक्टर अक्सर ऐसे शिशुओं के लिए स्पंजिंग — यानी हल्के गीले मुलायम कपड़े से सफाई — की सलाह देते हैं, जिससे ठंड लगने या शरीर का तापमान गिरने का जोखिम नहीं रहता।
नवजात शिशु के लिए कौन-सा साबुन सुरक्षित है?
नवजात शिशुओं के लिए तेज़ खुशबू वाले साबुन या केमिकल युक्त बॉडी वॉश नुकसानदायक हो सकते हैं। बाल रोग विशेषज्ञ की सलाह से ही कोई हल्का और सुरक्षित क्लीनिंग एजेंट चुनें, या केवल गुनगुने पानी और मुलायम कपड़े से सफाई करें।
नवजात शिशु को नहलाते समय कमरे का तापमान कैसा होना चाहिए?
नहलाते समय कमरा बंद और सामान्य तापमान वाला होना चाहिए। ठंडी हवा, खुली खिड़की या चालू एसी से शिशु तुरंत ठंड से प्रभावित हो सकता है, इसलिए नहलाने से पहले ही कमरे का तापमान जाँचें और तौलिया व कपड़े तैयार रखें।
स्पंजिंग और नहलाने में क्या फर्क है और कौन बेहतर है?
स्पंजिंग में हल्के गीले मुलायम कपड़े से शिशु के शरीर को साफ किया जाता है, जबकि सीधे नहलाने में पानी में डुबोया जाता है। प्रीमैच्योर और नवजात शिशुओं के लिए डॉक्टर अक्सर स्पंजिंग को प्राथमिकता देते हैं क्योंकि इससे शरीर का तापमान स्थिर रहता है।
राष्ट्र प्रेस
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