भीषण गर्मी में हाइड्रेशन की जाँच: स्वास्थ्य मंत्रालय का यूरिन कलर चार्ट, 8 स्तर से जानें पानी की कमी
सारांश
मुख्य बातें
देश के बड़े हिस्से में जारी भीषण गर्मी के बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने नागरिकों के लिए एक सरल स्व-जाँच उपकरण के रूप में यूरिन कलर चार्ट जारी किया है, जिसकी मदद से कोई भी व्यक्ति अपने शरीर में पानी की मात्रा यानी हाइड्रेशन स्तर का अनुमान लगा सकता है। मंत्रालय के अनुसार, यूरिन का रंग 1 से 8 के पैमाने पर शरीर में पानी की स्थिति का सबसे जल्दी मिलने वाला संकेत है, और गहरा रंग डिहाइड्रेशन का सीधा अलार्म है।
मंत्रालय की मुख्य सलाह
मंत्रालय ने कहा है कि गर्मी के मौसम में डिहाइड्रेशन एक बड़ी समस्या बन जाती है, खासकर युवाओं में। नागरिकों को सलाह दी गई है कि धूप में निकलते समय सिर और चेहरे को ढकें, चश्मा पहनें और बार-बार पानी पीते रहें। मंत्रालय के अनुसार, “प्यास लगने से पहले पानी पीना सबसे अच्छा तरीका है।”
यूरिन कलर चार्ट: 1 से 8 तक के संकेत
स्तर 1-2: हल्का पीला या लगभग साफ यूरिन, बिना बदबू। यह दिखाता है कि व्यक्ति अच्छी तरह हाइड्रेटेड है और उसे इसी तरह पानी पीते रहना चाहिए।
स्तर 3-4: थोड़ा गहरा पीला यूरिन। मंत्रालय के अनुसार यह हल्के डिहाइड्रेशन का संकेत है और तुरंत एक गिलास पानी पीना चाहिए।
स्तर 5-6: मीडियम से गहरा पीला यूरिन। यह डिहाइड्रेशन का स्पष्ट संकेत है; तुरंत 2-3 गिलास पानी पीने की सलाह दी गई है।
स्तर 7-8: बहुत गहरा पीला या भूरा यूरिन, तेज बदबू के साथ। यह गंभीर डिहाइड्रेशन की स्थिति है; मंत्रालय ने तुरंत अधिक मात्रा में पानी पीने और ज़रूरत पड़ने पर डॉक्टर से संपर्क करने को कहा है।
विशेषज्ञों की चेतावनी: चार्ट सिर्फ़ गाइड
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि चुकंदर, विटामिन सप्लीमेंट और कुछ दवाएँ भी यूरिन का रंग बदल सकती हैं, इसलिए इस चार्ट को केवल एक संकेतक के रूप में देखा जाना चाहिए, अंतिम निदान नहीं। यदि यूरिन का रंग लगातार गहरा बना रहे या कोई अन्य लक्षण उभरे, तो विशेषज्ञ तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेने की सलाह देते हैं।
किस पर सबसे ज़्यादा ख़तरा
मंत्रालय ने अपील की है कि गर्मी में पानी, नारियल पानी, छाछ, नींबू पानी और फलों का जूस भरपूर मात्रा में लिया जाए तथा बाहर निकलते समय हल्के रंग के ढीले कपड़े पहने जाएँ। बच्चों और बुज़ुर्गों पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है, क्योंकि वे डिहाइड्रेशन की चपेट में सबसे जल्दी आते हैं। गौरतलब है कि यह एडवाइज़री ऐसे समय आई है जब उत्तर और मध्य भारत के कई हिस्सों में पारा सामान्य से कहीं ऊपर बना हुआ है, और आने वाले दिनों में लू की स्थिति और तीव्र होने की आशंका जताई जा रही है।