अमेरिका-ईरान 14-पॉइंट समझौते पर इजरायल नाराज, पूर्व महावाणिज्यदूत एलन पिंकास बोले — क्षेत्रीय सुरक्षा को नुकसान
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14-पॉइंट समझौते ने पश्चिम एशिया की कूटनीति में नई दरार पैदा कर दी है। पूर्व इजरायली महावाणिज्यदूत एलन पिंकास ने 19 जून 2026 को अमेरिकी मीडिया से कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ किए गए इस समझौते ने अमेरिका और इजरायल के बीच की खाई को और गहरा कर दिया है। इजरायल पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह अमेरिका की किसी भी द्विपक्षीय डील से बाध्य नहीं है।
पिंकास की तीखी आलोचना
पूर्व महावाणिज्यदूत एलन पिंकास ने कहा, 'मुझे उन 14 पॉइंट्स में से एक भी बिंदु नहीं दिख रहा जो अमेरिका, इजरायल, बल्कि पूरे इलाके को 28 फरवरी — जब हमला शुरू हुआ था — की तुलना में बेहतर बनाते हों।' उनके अनुसार, हमलों से पहले ईरान अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण अलग-थलग था, उसका तेल निर्यात ठप था और अर्थव्यवस्था दबाव में थी।
पिंकास ने चेताया कि इस समझौते के तहत ईरान को अब तेल निर्यात करने, प्रतिबंधित संपत्तियों तक पहुँच पाने और $300 बिलियन की विनिर्माण फंडिंग हासिल करने की अनुमति मिलेगी। उन्होंने कहा, 'वे बहुत ज़्यादा मज़बूत हो गए हैं।'
नाटो का स्वागत, इजरायल का विरोध
नाटो के महासचिव मार्क रूट ने इस समझौते का खुलकर समर्थन किया। ब्रसेल्स में नाटो रक्षा मंत्रियों की बैठक से पहले मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, 'मैं सच में इस डील का स्वागत करता हूँ। मुझे लगता है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने एक अच्छी डील की है। यह समझौता ईरान की परमाणु क्षमता को कम करेगा और नेविगेशन की स्वतंत्रता को वापस लाएगा।'
दूसरी ओर, इजरायल की प्रतिक्रिया बिल्कुल विपरीत रही। 15 जून को इजरायल के रक्षा मंत्री इजराइल कॉट्ज ने घोषणा की कि अमेरिका-ईरान सीजफायर के बावजूद इजरायल दक्षिणी लेबनान से अपनी सेना नहीं हटाएगा।
इजरायल की सुरक्षा नीति
रक्षा मंत्री कॉट्ज ने एक बयान में कहा, 'प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और मैं एक स्पष्ट नीति पर चल रहे हैं, जिसके तहत IDF बिना किसी समय-सीमा के लेबनान, सीरिया और गाजा के सुरक्षा क्षेत्र में तैनात रहेगा, ताकि सीमावर्ती इजरायली समुदायों को जिहादी तत्वों से बचाया जा सके।'
कॉट्ज ने यह भी कहा कि सुरक्षा क्षेत्र से स्थानीय नागरिकों को हटाया जाएगा और भूमि के ऊपर व नीचे सभी आतंकवादी ढाँचों को नष्ट किया जाएगा — जिनमें सीमावर्ती गाँवों के वे घर भी शामिल हैं जो कथित तौर पर आतंकवादियों के गुप्त ठिकानों के रूप में इस्तेमाल होते थे।
अमेरिका को सीधा संदेश
कॉट्ज ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने यह रुख राष्ट्रपति ट्रंप और वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों को पहले ही बता दिया था। उन्होंने स्वयं अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ को भी यह बात स्पष्ट कर दी थी। उन्होंने कहा, 'हम इजरायल के सुरक्षा हितों और अपने नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेंगे। हम सुरक्षा क्षेत्र से पीछे नहीं हटेंगे।'
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव की स्थिति पहले से ही नाजुक बनी हुई है। आने वाले हफ्तों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिका-इजरायल संबंध इस नई कूटनीतिक दरार के बाद किस दिशा में जाते हैं।