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अमेरिका-ईरान 14-पॉइंट समझौते पर इजरायल नाराज, पूर्व महावाणिज्यदूत एलन पिंकास बोले — क्षेत्रीय सुरक्षा को नुकसान

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अमेरिका-ईरान 14-पॉइंट समझौते पर इजरायल नाराज, पूर्व महावाणिज्यदूत एलन पिंकास बोले — क्षेत्रीय सुरक्षा को नुकसान

सारांश

अमेरिका-ईरान के 14-पॉइंट समझौते ने पश्चिम एशिया की कूटनीति को हिला दिया है। इजरायल के पूर्व महावाणिज्यदूत एलन पिंकास के अनुसार यह डील ईरान को $300 बिलियन और तेल निर्यात की छूट देती है — जबकि इजरायल के रक्षा मंत्री कॉट्ज ने साफ कहा: IDF लेबनान नहीं छोड़ेगा।

मुख्य बातें

पूर्व इजरायली महावाणिज्यदूत एलन पिंकास ने कहा कि अमेरिका-ईरान के 14-पॉइंट समझौते का कोई भी बिंदु क्षेत्र को 28 फरवरी से पहले की स्थिति से बेहतर नहीं बनाता।
समझौते के तहत ईरान को तेल निर्यात, प्रतिबंधित संपत्तियों तक पहुँच और $300 बिलियन की विनिर्माण फंडिंग मिलने की अनुमति होगी।
नाटो महासचिव मार्क रूट ने ब्रसेल्स में समझौते का स्वागत करते हुए कहा यह ईरान की परमाणु क्षमता कम करेगा।
इजरायल के रक्षा मंत्री इजराइल कॉट्ज ने 15 जून को घोषणा की कि IDF दक्षिणी लेबनान, सीरिया और गाजा के सुरक्षा क्षेत्र में बिना समय-सीमा के तैनात रहेगा।
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने यह रुख राष्ट्रपति ट्रंप और रक्षा सचिव पीट हेगसेथ को पहले ही स्पष्ट कर दिया था।

अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14-पॉइंट समझौते ने पश्चिम एशिया की कूटनीति में नई दरार पैदा कर दी है। पूर्व इजरायली महावाणिज्यदूत एलन पिंकास ने 19 जून 2026 को अमेरिकी मीडिया से कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ किए गए इस समझौते ने अमेरिका और इजरायल के बीच की खाई को और गहरा कर दिया है। इजरायल पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह अमेरिका की किसी भी द्विपक्षीय डील से बाध्य नहीं है।

पिंकास की तीखी आलोचना

पूर्व महावाणिज्यदूत एलन पिंकास ने कहा, 'मुझे उन 14 पॉइंट्स में से एक भी बिंदु नहीं दिख रहा जो अमेरिका, इजरायल, बल्कि पूरे इलाके को 28 फरवरी — जब हमला शुरू हुआ था — की तुलना में बेहतर बनाते हों।' उनके अनुसार, हमलों से पहले ईरान अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण अलग-थलग था, उसका तेल निर्यात ठप था और अर्थव्यवस्था दबाव में थी।

पिंकास ने चेताया कि इस समझौते के तहत ईरान को अब तेल निर्यात करने, प्रतिबंधित संपत्तियों तक पहुँच पाने और $300 बिलियन की विनिर्माण फंडिंग हासिल करने की अनुमति मिलेगी। उन्होंने कहा, 'वे बहुत ज़्यादा मज़बूत हो गए हैं।'

नाटो का स्वागत, इजरायल का विरोध

नाटो के महासचिव मार्क रूट ने इस समझौते का खुलकर समर्थन किया। ब्रसेल्स में नाटो रक्षा मंत्रियों की बैठक से पहले मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, 'मैं सच में इस डील का स्वागत करता हूँ। मुझे लगता है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने एक अच्छी डील की है। यह समझौता ईरान की परमाणु क्षमता को कम करेगा और नेविगेशन की स्वतंत्रता को वापस लाएगा।'

दूसरी ओर, इजरायल की प्रतिक्रिया बिल्कुल विपरीत रही। 15 जून को इजरायल के रक्षा मंत्री इजराइल कॉट्ज ने घोषणा की कि अमेरिका-ईरान सीजफायर के बावजूद इजरायल दक्षिणी लेबनान से अपनी सेना नहीं हटाएगा।

इजरायल की सुरक्षा नीति

रक्षा मंत्री कॉट्ज ने एक बयान में कहा, 'प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और मैं एक स्पष्ट नीति पर चल रहे हैं, जिसके तहत IDF बिना किसी समय-सीमा के लेबनान, सीरिया और गाजा के सुरक्षा क्षेत्र में तैनात रहेगा, ताकि सीमावर्ती इजरायली समुदायों को जिहादी तत्वों से बचाया जा सके।'

कॉट्ज ने यह भी कहा कि सुरक्षा क्षेत्र से स्थानीय नागरिकों को हटाया जाएगा और भूमि के ऊपर व नीचे सभी आतंकवादी ढाँचों को नष्ट किया जाएगा — जिनमें सीमावर्ती गाँवों के वे घर भी शामिल हैं जो कथित तौर पर आतंकवादियों के गुप्त ठिकानों के रूप में इस्तेमाल होते थे।

अमेरिका को सीधा संदेश

कॉट्ज ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने यह रुख राष्ट्रपति ट्रंप और वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों को पहले ही बता दिया था। उन्होंने स्वयं अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ को भी यह बात स्पष्ट कर दी थी। उन्होंने कहा, 'हम इजरायल के सुरक्षा हितों और अपने नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेंगे। हम सुरक्षा क्षेत्र से पीछे नहीं हटेंगे।'

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव की स्थिति पहले से ही नाजुक बनी हुई है। आने वाले हफ्तों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिका-इजरायल संबंध इस नई कूटनीतिक दरार के बाद किस दिशा में जाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह इजरायल की नजर में उसी दुश्मन को मजबूत करना है जिससे वह सीधे लड़ रहा है। नाटो का उत्साहजनक स्वागत और इजरायल का कड़ा विरोध — दोनों एक साथ — यह दिखाते हैं कि पश्चिमी गठबंधन की एकजुटता पश्चिम एशिया नीति पर कितनी खोखली हो सकती है। असली सवाल यह है कि क्या यह समझौता ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को सच में रोकता है, या केवल उन्हें आर्थिक ईंधन देता है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमेरिका-ईरान के 14-पॉइंट समझौते में क्या है?
यह समझौता राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ किया गया एक कूटनीतिक करार है, जिसके तहत ईरान को तेल निर्यात करने, प्रतिबंधित संपत्तियों तक पहुँचने और $300 बिलियन की विनिर्माण फंडिंग पाने की अनुमति मिलेगी। नाटो के अनुसार यह ईरान की परमाणु क्षमता को कम करेगा, लेकिन इजरायल इसे अपनी सुरक्षा के लिए हानिकारक मानता है।
इजरायल इस समझौते का विरोध क्यों कर रहा है?
इजरायल का मानना है कि यह समझौता ईरान को आर्थिक रूप से मजबूत करता है, जबकि हमलों से पहले वह प्रतिबंधों के कारण कमजोर था। पूर्व महावाणिज्यदूत एलन पिंकास के अनुसार, 14 पॉइंट्स में से एक भी बिंदु क्षेत्र को पहले से बेहतर नहीं बनाता।
क्या इजरायल लेबनान से अपनी सेना हटाएगा?
नहीं। रक्षा मंत्री इजराइल कॉट्ज ने 15 जून को स्पष्ट किया कि IDF दक्षिणी लेबनान, सीरिया और गाजा के सुरक्षा क्षेत्र में बिना किसी समय-सीमा के तैनात रहेगा। यह रुख प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने राष्ट्रपति ट्रंप को भी बता दिया है।
नाटो ने इस समझौते पर क्या कहा?
नाटो महासचिव मार्क रूट ने ब्रसेल्स में रक्षा मंत्रियों की बैठक से पहले समझौते का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह डील ईरान की परमाणु क्षमता को कम करेगी और नेविगेशन की स्वतंत्रता को बहाल करेगी।
इजरायल के सुरक्षा क्षेत्र में क्या कदम उठाए जाएंगे?
रक्षा मंत्री कॉट्ज के अनुसार, सुरक्षा क्षेत्र से स्थानीय नागरिकों को हटाया जाएगा और जमीन के ऊपर व नीचे सभी आतंकवादी ढाँचों को नष्ट किया जाएगा, जिनमें वे सीमावर्ती गाँवों के घर भी शामिल हैं जो कथित तौर पर आतंकवादी ठिकानों के रूप में इस्तेमाल होते थे।
राष्ट्र प्रेस
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