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अमेरिका-ईरान युद्ध के 9 दिन: मध्यस्थों के प्रस्ताव मिले, बाघेई ने पुष्टि की

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अमेरिका-ईरान युद्ध के 9 दिन: मध्यस्थों के प्रस्ताव मिले, बाघेई ने पुष्टि की

सारांश

एमओयू टूटने के बाद अमेरिका-ईरान के बीच नौ दिनों से जारी जंग में पहली बार कूटनीतिक संकेत मिला है — ईरान के प्रवक्ता बाघेई ने मध्यस्थों के प्रस्ताव मिलने की पुष्टि की, लेकिन विदेश मंत्री अराघची की शर्त साफ है: बातचीत तभी, जब ईरान मज़बूत स्थिति में हो।

मुख्य बातें

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने 20 जुलाई 2026 को मध्यस्थों के प्रस्ताव मिलने की पुष्टि की, लेकिन विवरण साझा नहीं किया।
अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष को नौ दिन पूरे हो चुके हैं; दोनों ओर से हमले जारी हैं।
ईरानी सेना ने ऑपरेशन 'सैकेह' (लाइटनिंग) के तहत कुवैत में अमेरिका के दो सैन्य ठिकानों पर हमले का दावा किया।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमज़ोर करने के लिए हमलों का नया दौर शुरू करने की पुष्टि की।
विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि बातचीत तभी होगी जब ईरान संघर्ष में मज़बूत स्थिति में हो।

मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच 20 जुलाई 2026 को भी संघर्ष जारी रहा। एमओयू समझौता टूटने के बाद शुरू हुई इस जंग को नौ दिन पूरे हो चुके हैं और दोनों पक्षों की ओर से हमले थमने का नाम नहीं ले रहे। इस बीच ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने पुष्टि की है कि मध्यस्थों की ओर से कुछ प्रस्ताव ईरान को भेजे गए हैं, हालाँकि उन्होंने उनका विवरण सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया।

मध्यस्थों के प्रस्ताव: क्या कहा बाघेई ने

भारत स्थित ईरानी दूतावास ने अपने एक्स अकाउंट पर बाघेई का बयान साझा किया। उन्होंने कहा, 'हमें मध्यस्थों की तरफ से कुछ प्रस्ताव मिले हैं, लेकिन इस समय मैं उनकी जानकारी साझा नहीं करना चाहूंगा। मैं इतनी पुष्टि जरूर कर सकता हूँ कि ऐसे प्रस्ताव हमें भेजे गए हैं।' बाघेई ने यह भी नहीं बताया कि ये प्रस्ताव किस देश या संगठन की ओर से आए हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद लगभग शून्य हो चुका है और सैन्य टकराव तेज़ होता जा रहा है।

मैदान में क्या हो रहा है

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने बताया कि ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों का एक नया दौर शुरू हुआ है, जिसका उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमज़ोर करना है। वहीं, ईरानी सेना ने दावा किया कि उसने ऑपरेशन 'सैकेह' (लाइटनिंग) के तहत कुवैत में मौजूद अमेरिका के दो बड़े सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले किए।

ईरानी सेना का कहना है कि अमेरिका की ओर से बार-बार किए जा रहे घातक हमलों के जवाब में यह कार्रवाई की जा रही है। ईरान खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है, जबकि अमेरिका सीधे ईरानी भूभाग पर हमले कर रहा है।

ईरान के विदेश मंत्री की शर्त

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए को दिए साक्षात्कार में कहा कि अमेरिका के साथ युद्ध तब तक नहीं रुकेगा, जब तक ईरान को लड़ाई में मजबूत बढ़त नहीं मिल जाती।

उन्होंने कहा, 'बातचीत भी तभी होनी चाहिए, जब ईरान ऐसी स्थिति में हो, जहाँ उसे लगे कि हालात उसके पक्ष में हैं।' अराघची ने स्पष्ट किया कि किसी भी युद्ध का अंत दो तरह से होता है — पहला, जब किसी एक पक्ष को सैन्य जीत मिले; दूसरा, जब दोनों पक्ष बातचीत से समझौते पर पहुँचें। उनके अनुसार, जल्दबाजी में बातचीत करना ईरान के हित में नहीं होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि लोगों की जान और देश के भविष्य को खतरे में नहीं डाला जा सकता और हर फैसला पूरी जानकारी तथा सही आकलन के बाद ही लिया जाएगा।

क्षेत्रीय और वैश्विक असर

गौरतलब है कि यह संघर्ष मध्य पूर्व में पहले से जारी अस्थिरता के बीच और गहरा हो रहा है। खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले से क्षेत्र के अन्य देश भी सतर्क हो गए हैं। कुवैत में हुए हमलों के बाद खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों में चिंता बढ़ी है।

वैश्विक तेल बाज़ार पर भी इस संघर्ष का असर देखा जा रहा है, क्योंकि ईरान प्रमुख तेल उत्पादक देश है और होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अहम माना जाता है।

आगे क्या हो सकता है

मध्यस्थों के प्रस्तावों की पुष्टि से कूटनीतिक हलकों में उम्मीद जगी है, लेकिन अराघची की कड़ी शर्तों को देखते हुए निकट भविष्य में युद्धविराम की संभावना सीमित नज़र आती है। विश्लेषकों के अनुसार, जब तक दोनों पक्ष किसी एक मोर्चे पर निर्णायक स्थिति नहीं बना लेते, बातचीत की मेज़ पर पहुँचना कठिन रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन कमज़ोरी का संकेत भी नहीं देना चाहता। अराघची की 'मजबूत बढ़त' वाली शर्त बताती है कि तेहरान अभी बातचीत को युद्ध का विकल्प नहीं, बल्कि उसका परिणाम मानता है। यह रणनीति उसे घरेलू मोर्चे पर मज़बूत दिखाती है, लेकिन मध्यस्थों के लिए खिड़की संकरी कर देती है। असली सवाल यह है कि कुवैत जैसे तटस्थ खाड़ी देशों पर हमले के बाद क्षेत्रीय मध्यस्थता की भूमिका कौन निभाएगा।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईरान को मध्यस्थों के प्रस्ताव किसने भेजे हैं?
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने केवल इतनी पुष्टि की है कि मध्यस्थों की ओर से प्रस्ताव मिले हैं। उन्होंने यह नहीं बताया कि ये प्रस्ताव किस देश या संगठन की ओर से आए हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध क्यों शुरू हुआ?
दोनों देशों के बीच एमओयू समझौता टूटने के बाद यह सैन्य संघर्ष शुरू हुआ। 20 जुलाई 2026 तक यह जंग नौ दिनों से जारी है, जिसमें दोनों पक्ष एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहे हैं।
ऑपरेशन 'सैकेह' क्या है?
ऑपरेशन 'सैकेह' (लाइटनिंग) ईरानी सेना का एक सैन्य अभियान है, जिसके तहत ईरान ने कुवैत में मौजूद अमेरिका के दो बड़े सैन्य ठिकानों पर हमले किए। ईरान का कहना है कि यह अमेरिकी हमलों का जवाब है।
क्या अमेरिका-ईरान के बीच जल्द बातचीत हो सकती है?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया है कि बातचीत तभी होगी जब ईरान संघर्ष में मज़बूत स्थिति में हो। उन्होंने जल्दबाजी में बातचीत को ईरान के हित में नहीं बताया, जिससे निकट भविष्य में वार्ता की संभावना सीमित नज़र आती है।
इस युद्ध का मध्य पूर्व और वैश्विक तेल बाज़ार पर क्या असर हो रहा है?
खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर हमलों से पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ा है और GCC देश सतर्क हो गए हैं। ईरान प्रमुख तेल उत्पादक देश है और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुज़रने वाली वैश्विक तेल आपूर्ति पर इस संघर्ष का असर देखा जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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