ब्रिक्स 2026: जर्मन-रूसी पत्रकारों ने भारतीय मेहमाननवाजी को सराहा, मीडिया किट और खाने की जमकर तारीफ
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में भारत की मेजबानी ने विदेशी पत्रकारों को गहरा प्रभावित किया। जर्मनी के पत्रकार बेन और रूसी पत्रकार अनास्तासिया गोल्याकोवा ने मीडिया सेंटर की व्यवस्था, भोजन की गुणवत्ता और मीडिया किट को असाधारण बताया। दोनों ने 13 सितंबर 2026 को अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि भारत की आतिथ्य-परंपरा ने सम्मेलन को और यादगार बना दिया।
मीडिया किट ने जीता दिल
जर्मन पत्रकार बेन ने बताया कि उन्होंने चार बार ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को कवर किया है, लेकिन इस बार की मीडिया किट उन सभी में सर्वश्रेष्ठ रही। उन्होंने कहा, 'यह मेरा भारत में पहला दौरा है। वास्तव में, मैं चौथी बार ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल हुआ हूं और यह सबसे अच्छी मीडिया किट थी। एक अच्छा बैकपैक और इससे भी महत्वपूर्ण बात कि इसके अंदर क्या था — भारतीय शाकाहारी सुपरफूड, एक अच्छा कॉफी मग, स्कार्फ और कॉफी पाउडर।' उन्होंने सामग्री की गुणवत्ता को 'हल्का और सुरुचिपूर्ण' बताया।
रूसी पत्रकार अनास्तासिया गोल्याकोवा ने भी मीडिया किट की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा, 'जब मैंने उसे खोला तो मुझे कितनी हैरानी हुई — अंदर भारतीय विशेषताएं थीं। कुरकुरा नमकीन, चिप्स जैसा खाना, चाय और शॉल। जिस व्यक्ति के मन में भारत को इस तरह से बढ़ावा देने का विचार आया, वह एक शानदार विचार है।'
भारतीय भोजन की अनूठी छाप
बेन ने बताया कि उनके मित्रों ने भारत आने से पहले खान-पान को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी थी, लेकिन उन्हें कोई परेशानी नहीं हुई। उन्होंने कहा, 'यहां का खाना स्वादिष्ट, स्वस्थ, वसायुक्त नहीं और ज़्यादा मीठा नहीं है। यह उत्तर भारतीय भोजन है — मुझे यह वास्तव में बहुत पसंद है।' उन्होंने भारतीय चाय की भी विशेष तारीफ की।
अनास्तासिया ने कहा कि शुरू में भारतीय व्यंजनों के पारंपरिक नाम पढ़ना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन भारतीय सहयोगियों ने समझाया कि मीडिया सेंटर का भोजन भारत के सभी क्षेत्रों की राष्ट्रीय पहचान का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा, 'भारत की राष्ट्रीय संस्कृति हमने रसोई में देखी। खाना बहुत स्वादिष्ट था।'
व्यवस्था पर राय और बेहतरी की उम्मीद
बेन ने माना कि मीडिया सेंटर के वाईफाई में अभी भी कुछ सुधार की गुंजाइश है, लेकिन इसके अलावा समग्र व्यवस्था बेहद उत्कृष्ट थी। अनास्तासिया ने इच्छा जताई कि आयोजन कम से कम तीन दिन और चलता। उन्होंने कहा कि वे भविष्य में भारत द्वारा आयोजित अन्य कार्यक्रमों को कवर करने के लिए वापस आना चाहेंगी।
ब्रिक्स की प्रासंगिकता और भारत का व्यापार संतुलन
अर्थशास्त्री वेद जैन ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के संदर्भ में कहा कि यह समूह अब दो दशक पूरे कर चुका है। उन्होंने बताया कि भारत का व्यापार असंतुलन मुख्य रूप से चीन और रूस के साथ है, क्योंकि भारत इन देशों से अधिक आयात करता है और निर्यात कम। उन्होंने बताया कि चीन ने फार्मास्युटिकल, कृषि और समुद्री उत्पादों पर गैर-व्यापारिक बाधाएं हटाने की सहमति दी है, जिससे भारतीय निर्यात को बल मिलेगा।
वेद जैन ने यह भी कहा कि एकतरफा टैरिफ नीतियों के विरुद्ध चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए स्पष्ट नियम-आधारित व्यवस्था की मांग उठाई। उनका तर्क था कि किसी भी देश को एकतरफा ढंग से आयात-निर्यात पर मनमाने टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं होना चाहिए। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब वैश्विक व्यापार तनाव अपने उच्चतम स्तर पर है।
गौरतलब है कि ब्रिक्स का गठन मूलतः ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका की उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक सहयोग के लिए हुआ था, और अब इसमें छह और देश जुड़ चुके हैं। भारत की इस सम्मेलन में मेजबानी वैश्विक कूटनीति और सांस्कृतिक कूटनीति, दोनों मोर्चों पर उल्लेखनीय रही है।