पंचतंत्र की 'गुरुकुल डिप्लोमेसी': राजदूत शंभू कुमारन ने वियना के स्कूली बच्चों को सुनाईं भारतीय कहानियाँ
सारांश
मुख्य बातें
ऑस्ट्रिया में भारत के राजदूत शंभू कुमारन ने वियना के स्कूली बच्चों को सदियों पुरानी पंचतंत्र की कहानियाँ पढ़कर सुनाईं, जो भारत और ऑस्ट्रिया के बीच गहरे होते सांस्कृतिक संबंधों की एक अनूठी मिसाल बन गई। भारतीय दूतावास, वियना ने इस पहल को 'गुरुकुल डिप्लोमेसी' का नाम दिया है, जो पारंपरिक भारतीय शिक्षा-पद्धति की भावना को आधुनिक कूटनीति से जोड़ती है।
क्या है पूरी पहल
भारतीय दूतावास, वियना ने ऑस्ट्रियाई स्कूली बच्चों के लिए पंचतंत्र का जर्मन भाषा में अनुवाद प्रकाशित किया है। इस जर्मन संस्करण में प्रसिद्ध ऑस्ट्रियाई कार्टूनिस्ट और इलस्ट्रेटर क्लॉस पिटर के रंगीन चित्रों के माध्यम से बच्चों को चुनी हुई पंचतंत्र की कहानियों से परिचित कराया गया है। इस कार्यक्रम में वियना के एक स्कूल के 50 से अधिक उत्साही छात्र एकत्र हुए, जिन्होंने राजदूत कुमारन के साथ अपने पसंदीदा पात्रों और उनसे मिली सीख साझा की।
डिजिटल माध्यम से पंचतंत्र का विस्तार
जून 2025 की शुरुआत में दूतावास ने 'गेस्चिचटेन औस डेम पंचतंत्र' (Geschichten aus dem Panchatantra) का अगला अध्याय लॉन्च किया — यह एक नई वीडियो पॉडकास्ट सीरीज़ है, जिसे जाने-माने ऑस्ट्रियाई पॉडकास्टर थॉमस ब्रेजिना ने तैयार किया है। इस सीरीज़ में बच्चों को जर्मन भाषा में पंचतंत्र की कहानियाँ सुनाई जाती हैं। यह पहल स्टैड्ट विएन और स्थानीय स्कूलों के 'बाउंस बैक' प्रोजेक्ट के सहयोग से शुरू की गई है।
दूतावास का एक्स पर संदेश
भारतीय दूतावास, वियना ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर इस आयोजन की जानकारी साझा करते हुए लिखा, 'गुरुकुल डिप्लोमेसी' — भारतीय राजदूत शंभू कुमारन वियना में स्कूली बच्चों को पंचतंत्र की कहानियाँ पढ़कर सुना रहे हैं। दूतावास ने यह भी बताया कि डिजिटल स्टोरीटेलिंग के माध्यम से पंचतंत्र के चिरस्थायी ज्ञान को ऑस्ट्रिया तक पहुँचाया जा रहा है।
भारत-ऑस्ट्रिया संबंधों का व्यापक संदर्भ
यह सांस्कृतिक पहल ऐसे समय में आई है जब भारत और ऑस्ट्रिया के द्विपक्षीय संबंध नई ऊँचाइयाँ छू रहे हैं। अप्रैल 2025 की शुरुआत में ऑस्ट्रिया के चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर भारत के आधिकारिक दौरे पर आए थे — यह चार दशकों में किसी ऑस्ट्रियाई चांसलर की पहली भारत यात्रा थी। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी मुलाकात में नवाचार, बुनियादी ढाँचे और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग गहरा करने पर चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लिखा कि चांसलर स्टॉकर ने पदभार ग्रहण करने के बाद यूरोप के बाहर अपनी पहली यात्रा के लिए भारत को चुना, जो भारत-ऑस्ट्रिया संबंधों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि रक्षा, सेमीकंडक्टर, भविष्य की तकनीक और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच करीबी सहयोग की व्यापक संभावनाएँ हैं। गौरतलब है कि यह दौरा ऐतिहासिक भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के बाद हुआ, जिसने द्विपक्षीय संबंधों में एक नया अध्याय शुरू किया है।
आगे की राह
पंचतंत्र की यह 'गुरुकुल डिप्लोमेसी' भारतीय सांस्कृतिक कूटनीति के एक नए आयाम को दर्शाती है, जहाँ शास्त्रीय साहित्य को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए आधुनिक माध्यमों का उपयोग किया जा रहा है। आने वाले समय में इस तरह की पहलें भारत-ऑस्ट्रिया के लोगों के बीच सेतु का काम करती रहेंगी।