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लेबनान में यूएन शांतिसैनिक की मौत: भारत ने की कड़ी निंदा, हमले को बताया अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन

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लेबनान में यूएन शांतिसैनिक की मौत: भारत ने की कड़ी निंदा, हमले को बताया अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन

सारांश

लेबनान में यूएन चौकी पर मोर्टार हमले में सर्बियाई शांतिसैनिक की मौत के बाद भारत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। मिशन में करीब 1,000 भारतीय सैनिक तैनात हैं — हालाँकि कोई भारतीय हताहत नहीं हुआ — फिर भी नई दिल्ली ने दोषियों पर तत्काल कार्रवाई की माँग की है।

मुख्य बातें

लेबनान के मारजायून क्षेत्र में यूएनआईफिल चौकी पर मोर्टार हमले में सर्बियाई सार्जेंट मिलोवान जोवानोविच की मौत हुई, दो अन्य शांतिसैनिक घायल।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने 4 जून को हमले की कड़ी निंदा की और दोषियों पर कार्रवाई की माँग की।
यूएन महासचिव अंतोनियो गुटेरेस ने कहा यह घटना युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकती है।
यूएनआईफिल में वर्तमान में करीब 10,800 शांतिसैनिक तैनात हैं, जिनमें लगभग 1,000 भारतीय सैनिक शामिल हैं; किसी भारतीय के हताहत होने की सूचना नहीं।
हिज़बुल्लाह द्वारा हमले तेज किए जाने के बाद दक्षिणी लेबनान में तनाव में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है।

भारत ने लेबनान में संयुक्त राष्ट्र के शांतिसैनिकों पर हुए घातक हमले की कड़ी निंदा की है, जिसमें यूएनआईफिल (UNIFIL) में तैनात सर्बियाई सार्जेंट मिलोवान जोवानोविच की मौत हो गई और दो अन्य शांतिसैनिक घायल हो गए। 4 जून को जारी इस प्रतिक्रिया में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने यूएन परिसरों और उसके कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की।

हमले का घटनाक्रम

बुधवार को दक्षिणी लेबनान के मारजायून क्षेत्र के निकट संयुक्त राष्ट्र की एक चौकी पर मोर्टार गोला आकर गिरा, जिसमें सार्जेंट जोवानोविच की मौके पर ही मौत हो गई। संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता स्टेफ़ान दुजारिक ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि दो घायल शांतिसैनिकों का इलाज दक्षिणी लेबनान स्थित यूएनआईफिल चिकित्सा केंद्र में चल रहा है।

यूएनआईफिल ने घटना की जाँच शुरू कर दी है और कहा है कि बढ़ते तनाव के बीच इस हमले की परिस्थितियों का पता लगाया जा रहा है।

भारत की प्रतिक्रिया

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने गुरुवार को जारी बयान में कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र परिसरों और उसके कर्मियों की सुरक्षा तथा पवित्रता के सम्मान के महत्व को दोहराता है। भारत ने दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की माँग की है।

गौरतलब है कि यूएनआईफिल मिशन में वर्तमान में लगभग 10,800 शांतिसैनिक तैनात हैं, जिनमें करीब 1,000 भारतीय सैनिक भी शामिल हैं। राहत की बात यह है कि इस हमले में किसी भी भारतीय सैनिक के हताहत होने की सूचना नहीं है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव की चेतावनी

संयुक्त राष्ट्र महासचिव अंतोनियो गुटेरेस ने हमले की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह घटना युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकती है। उन्होंने शांतिसैनिकों पर हमलों को तुरंत रोकने की अपील की। प्रवक्ता दुजारिक ने भी स्पष्ट किया कि शांतिसैनिकों पर हमले अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का गंभीर उल्लंघन हैं।

क्षेत्रीय तनाव की पृष्ठभूमि

यूएनआईफिल के अनुसार, दक्षिणी लेबनान में हाल के दिनों में गोलाबारी और मिसाइल हमलों की घटनाओं में लगातार वृद्धि हुई है। ईरान समर्थित संगठन हिज़बुल्लाह ने इजराइल पर ईरानी हमलों के बाद अपने हमले और तेज कर दिए थे, जिससे क्षेत्र में तनाव और गहरा हो गया। यह ऐसे समय में आया है जब लेबनान पहले से ही भारी राजनीतिक और आर्थिक संकट से जूझ रहा है।

आगे क्या होगा

यूएनआईफिल ने चेतावनी दी है कि क्षेत्र में हिंसा को तुरंत समाप्त किया जाना चाहिए। जाँच के नतीजे आने के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस मुद्दे पर चर्चा की संभावना है। भारत की सक्रिय भागीदारी और कड़े बयान से यह स्पष्ट है कि नई दिल्ली अपने शांतिसैनिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 भारतीय सैनिकों की तैनाती इसे सीधे राष्ट्रीय हित का मामला बनाती है। गौरतलब है कि भारत दशकों से संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में सबसे बड़े योगदानकर्ताओं में रहा है, और ऐसे हमले उस भूमिका की नैतिक और सामरिक लागत को उजागर करते हैं। महासचिव गुटेरेस का 'युद्ध अपराध' वाला बयान कठोर है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या सुरक्षा परिषद जाँच के नतीजों पर कोई ठोस कदम उठाएगी — या यह भी पिछले कई बयानों की तरह महज़ कागज़ी निंदा बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लेबनान में यूएन शांतिसैनिक पर हमला कैसे हुआ?
दक्षिणी लेबनान के मारजायून क्षेत्र के निकट एक यूएनआईफिल चौकी पर मोर्टार गोला गिरा, जिसमें सर्बियाई सार्जेंट मिलोवान जोवानोविच की मौत हो गई और दो अन्य शांतिसैनिक घायल हो गए। यूएनआईफिल ने घटना की जाँच शुरू कर दी है।
भारत ने इस हमले पर क्या रुख अपनाया?
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने 4 जून को जारी बयान में हमले की कड़ी निंदा की और दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की माँग की। भारत ने यूएन परिसरों और कर्मियों की सुरक्षा के महत्व को भी दोहराया।
क्या इस हमले में कोई भारतीय सैनिक हताहत हुआ?
नहीं। यूएनआईफिल मिशन में करीब 1,000 भारतीय सैनिक तैनात हैं, लेकिन इस हमले में किसी भी भारतीय सैनिक के हताहत होने की सूचना नहीं है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने इस घटना पर क्या कहा?
महासचिव अंतोनियो गुटेरेस ने हमले की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह घटना युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकती है। उन्होंने शांतिसैनिकों पर हमलों को तुरंत रोकने की अपील की।
लेबनान में यूएनआईफिल मिशन क्या है और इसमें कितने सैनिक हैं?
यूएनआईफिल (UNIFIL) लेबनान में तैनात संयुक्त राष्ट्र का अंतरिम शांति बल है, जिसमें वर्तमान में लगभग 10,800 शांतिसैनिक कार्यरत हैं। इनमें करीब 1,000 भारतीय सैनिक भी शामिल हैं।
राष्ट्र प्रेस
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