लेबनान में यूएन शांतिसैनिक की मौत: भारत ने की कड़ी निंदा, हमले को बताया अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन
सारांश
मुख्य बातें
भारत ने लेबनान में संयुक्त राष्ट्र के शांतिसैनिकों पर हुए घातक हमले की कड़ी निंदा की है, जिसमें यूएनआईफिल (UNIFIL) में तैनात सर्बियाई सार्जेंट मिलोवान जोवानोविच की मौत हो गई और दो अन्य शांतिसैनिक घायल हो गए। 4 जून को जारी इस प्रतिक्रिया में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने यूएन परिसरों और उसके कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की।
हमले का घटनाक्रम
बुधवार को दक्षिणी लेबनान के मारजायून क्षेत्र के निकट संयुक्त राष्ट्र की एक चौकी पर मोर्टार गोला आकर गिरा, जिसमें सार्जेंट जोवानोविच की मौके पर ही मौत हो गई। संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता स्टेफ़ान दुजारिक ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि दो घायल शांतिसैनिकों का इलाज दक्षिणी लेबनान स्थित यूएनआईफिल चिकित्सा केंद्र में चल रहा है।
यूएनआईफिल ने घटना की जाँच शुरू कर दी है और कहा है कि बढ़ते तनाव के बीच इस हमले की परिस्थितियों का पता लगाया जा रहा है।
भारत की प्रतिक्रिया
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने गुरुवार को जारी बयान में कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र परिसरों और उसके कर्मियों की सुरक्षा तथा पवित्रता के सम्मान के महत्व को दोहराता है। भारत ने दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की माँग की है।
गौरतलब है कि यूएनआईफिल मिशन में वर्तमान में लगभग 10,800 शांतिसैनिक तैनात हैं, जिनमें करीब 1,000 भारतीय सैनिक भी शामिल हैं। राहत की बात यह है कि इस हमले में किसी भी भारतीय सैनिक के हताहत होने की सूचना नहीं है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव की चेतावनी
संयुक्त राष्ट्र महासचिव अंतोनियो गुटेरेस ने हमले की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह घटना युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकती है। उन्होंने शांतिसैनिकों पर हमलों को तुरंत रोकने की अपील की। प्रवक्ता दुजारिक ने भी स्पष्ट किया कि शांतिसैनिकों पर हमले अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का गंभीर उल्लंघन हैं।
क्षेत्रीय तनाव की पृष्ठभूमि
यूएनआईफिल के अनुसार, दक्षिणी लेबनान में हाल के दिनों में गोलाबारी और मिसाइल हमलों की घटनाओं में लगातार वृद्धि हुई है। ईरान समर्थित संगठन हिज़बुल्लाह ने इजराइल पर ईरानी हमलों के बाद अपने हमले और तेज कर दिए थे, जिससे क्षेत्र में तनाव और गहरा हो गया। यह ऐसे समय में आया है जब लेबनान पहले से ही भारी राजनीतिक और आर्थिक संकट से जूझ रहा है।
आगे क्या होगा
यूएनआईफिल ने चेतावनी दी है कि क्षेत्र में हिंसा को तुरंत समाप्त किया जाना चाहिए। जाँच के नतीजे आने के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस मुद्दे पर चर्चा की संभावना है। भारत की सक्रिय भागीदारी और कड़े बयान से यह स्पष्ट है कि नई दिल्ली अपने शांतिसैनिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है।