21 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

लेबनान में यूएन शांतिसैनिक की मौत: भारत ने की कड़ी निंदा, सर्बियाई सार्जेंट मोर्टार हमले में शहीद

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
लेबनान में यूएन शांतिसैनिक की मौत: भारत ने की कड़ी निंदा, सर्बियाई सार्जेंट मोर्टार हमले में शहीद

सारांश

लेबनान में यूएनआईफिल चौकी पर मोर्टार हमले में सर्बियाई सार्जेंट की मौत के बाद भारत ने संयुक्त राष्ट्र में कड़ी निंदा जताई। मिशन में करीब 1,000 भारतीय सैनिक तैनात हैं। महासचिव गुटेरेस ने इसे संभावित युद्ध अपराध बताया।

मुख्य बातें

सर्बियाई सार्जेंट मिलोवान जोवानोविच की मौत मारजायून क्षेत्र के निकट यूएनआईफिल चौकी पर मोर्टार गोला गिरने से हुई।
दो अन्य शांतिसैनिक घायल, दक्षिणी लेबनान के यूएनआईफिल चिकित्सा केंद्र में उपचाराधीन।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने 4 जून 2026 को हमले की कड़ी निंदा की और दोषियों पर कार्रवाई माँगी।
महासचिव अंतोनियो गुटेरेस ने कहा यह घटना युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकती है।
यूएनआईफिल में करीब 10,800 शांतिसैनिक तैनात, जिनमें लगभग 1,000 भारतीय सैनिक शामिल; किसी भारतीय के हताहत होने की सूचना नहीं।
हिज़बुल्लाह द्वारा इजराइल पर हमले तेज होने से दक्षिणी लेबनान में तनाव में वृद्धि।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने 4 जून 2026 को लेबनान में तैनात यूएनआईफिल (संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल) के शांतिसैनिकों पर हुए घातक हमले की कड़ी निंदा की। इस हमले में सर्बियाई सार्जेंट मिलोवान जोवानोविच की मौत हो गई और दो अन्य शांतिसैनिक घायल हो गए। भारत ने दोषियों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई की माँग करते हुए संयुक्त राष्ट्र परिसरों और कर्मियों की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

हमले का विवरण

महासचिव अंतोनियो गुटेरेस के प्रवक्ता स्टेफ़ान दुजारिक ने बताया कि मारजायून क्षेत्र के निकट संयुक्त राष्ट्र की एक चौकी पर मोर्टार गोला आकर गिरा, जिसमें सार्जेंट जोवानोविच की मौत हो गई। घायल दो अन्य शांतिसैनिकों का उपचार दक्षिणी लेबनान स्थित यूएनआईफिल के चिकित्सा केंद्र में जारी है। यूएनआईफिल ने घटना की जाँच शुरू कर दी है और यह पता लगाने का प्रयास कर रहा है कि किन परिस्थितियों में यह हमला हुआ।

भारत की प्रतिक्रिया

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने गुरुवार को जारी अपने बयान में कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र परिसरों और उसके कर्मियों की सुरक्षा तथा पवित्रता के सम्मान के महत्व को दोहराता है। भारत ने बुधवार को हुए इस हमले की निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ जवाबदेही सुनिश्चित करने की माँग की। यह ऐसे समय में आया है जब यूएनआईफिल मिशन में लगभग 1,000 भारतीय सैनिक भी तैनात हैं, हालाँकि इस हमले में किसी भारतीय सैनिक के हताहत होने की सूचना नहीं है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव की चेतावनी

महासचिव अंतोनियो गुटेरेस ने हमले की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह घटना युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकती है। उन्होंने शांतिसैनिकों पर हमलों को तुरंत रोकने की अपील की। दुजारिक ने भी स्पष्ट किया कि शांतिसैनिकों पर हमले अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का गंभीर उल्लंघन हैं।

क्षेत्रीय तनाव की पृष्ठभूमि

यूएनआईफिल के अनुसार, दक्षिणी लेबनान में हाल के दिनों में गोलाबारी और मिसाइल हमलों की घटनाओं में लगातार वृद्धि हुई है। ईरान समर्थित संगठन हिज़बुल्लाह ने ईरान पर इजराइली हमलों के बाद इजराइल के खिलाफ अपने हमले तेज कर दिए थे, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया। यूएनआईफिल ने चेतावनी दी है कि क्षेत्र में हिंसा को तुरंत समाप्त किया जाना चाहिए।

यूएनआईफिल में भारत की भूमिका

लेबनान में तैनात यूएनआईफिल मिशन में वर्तमान में लगभग 10,800 शांतिसैनिक कार्यरत हैं, जिनमें करीब 1,000 भारतीय सैनिक भी शामिल हैं। गौरतलब है कि भारत संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में सबसे बड़े सैन्य योगदानकर्ताओं में से एक रहा है, और इसीलिए इस हमले पर भारत की प्रतिक्रिया विशेष महत्व रखती है। आगे यूएनआईफिल की जाँच के नतीजे और अंतरराष्ट्रीय दबाव यह तय करेंगे कि इस हमले के लिए जवाबदेही किस प्रकार सुनिश्चित होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 भारतीय सैनिकों की तैनाती इसे एक प्रत्यक्ष सुरक्षा हित का मामला बनाती है। यह घटना उस व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा है जिसमें दक्षिणी लेबनान में शांतिसैनिकों को बढ़ते संघर्ष के बीच असुरक्षित चौकियों पर तैनात रखा जा रहा है। महासचिव गुटेरेस का 'युद्ध अपराध' वाला बयान कड़ा है, लेकिन जवाबदेही का इतिहास कमज़ोर रहा है — पिछले दशकों में यूएनआईफिल पर कई हमले हुए और दोषियों पर ठोस कार्रवाई दुर्लभ रही। असली सवाल यह है कि क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस बार जाँच को वास्तविक जवाबदेही तक ले जाएगा, या यह भी निंदा-बयानों की लंबी सूची में दफ़न हो जाएगा।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लेबनान में यूएन शांतिसैनिक पर हमला कैसे हुआ?
मारजायून क्षेत्र के निकट एक यूएनआईफिल चौकी पर मोर्टार गोला गिरने से सर्बियाई सार्जेंट मिलोवान जोवानोविच की मौत हो गई और दो अन्य शांतिसैनिक घायल हो गए। यूएनआईफिल ने घटना की जाँच शुरू कर दी है।
भारत ने इस हमले पर क्या कहा?
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने 4 जून 2026 को जारी बयान में हमले की कड़ी निंदा की और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की। भारत ने यूएन परिसरों और कर्मियों की सुरक्षा के महत्व पर भी ज़ोर दिया।
क्या इस हमले में कोई भारतीय सैनिक हताहत हुआ?
नहीं। यूएनआईफिल मिशन में लगभग 1,000 भारतीय सैनिक तैनात हैं, लेकिन इस हमले में किसी भारतीय सैनिक के हताहत होने की कोई सूचना नहीं है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने इस हमले को क्या बताया?
महासचिव अंतोनियो गुटेरेस ने हमले की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह घटना युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकती है। उन्होंने शांतिसैनिकों पर हमले तुरंत रोकने की अपील की और इसे अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का गंभीर उल्लंघन बताया।
दक्षिणी लेबनान में तनाव क्यों बढ़ा है?
ईरान समर्थित संगठन हिज़बुल्लाह ने ईरान पर इजराइली हमलों के बाद इजराइल के खिलाफ अपने हमले तेज कर दिए, जिससे क्षेत्र में तनाव बढ़ा। यूएनआईफिल के अनुसार हाल के दिनों में गोलाबारी और मिसाइल हमलों में लगातार वृद्धि हुई है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले