लेबनान में यूएन शांतिसैनिक की मौत: भारत ने की कड़ी निंदा, सर्बियाई सार्जेंट मोर्टार हमले में शहीद
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने 4 जून 2026 को लेबनान में तैनात यूएनआईफिल (संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल) के शांतिसैनिकों पर हुए घातक हमले की कड़ी निंदा की। इस हमले में सर्बियाई सार्जेंट मिलोवान जोवानोविच की मौत हो गई और दो अन्य शांतिसैनिक घायल हो गए। भारत ने दोषियों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई की माँग करते हुए संयुक्त राष्ट्र परिसरों और कर्मियों की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
हमले का विवरण
महासचिव अंतोनियो गुटेरेस के प्रवक्ता स्टेफ़ान दुजारिक ने बताया कि मारजायून क्षेत्र के निकट संयुक्त राष्ट्र की एक चौकी पर मोर्टार गोला आकर गिरा, जिसमें सार्जेंट जोवानोविच की मौत हो गई। घायल दो अन्य शांतिसैनिकों का उपचार दक्षिणी लेबनान स्थित यूएनआईफिल के चिकित्सा केंद्र में जारी है। यूएनआईफिल ने घटना की जाँच शुरू कर दी है और यह पता लगाने का प्रयास कर रहा है कि किन परिस्थितियों में यह हमला हुआ।
भारत की प्रतिक्रिया
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने गुरुवार को जारी अपने बयान में कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र परिसरों और उसके कर्मियों की सुरक्षा तथा पवित्रता के सम्मान के महत्व को दोहराता है। भारत ने बुधवार को हुए इस हमले की निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ जवाबदेही सुनिश्चित करने की माँग की। यह ऐसे समय में आया है जब यूएनआईफिल मिशन में लगभग 1,000 भारतीय सैनिक भी तैनात हैं, हालाँकि इस हमले में किसी भारतीय सैनिक के हताहत होने की सूचना नहीं है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव की चेतावनी
महासचिव अंतोनियो गुटेरेस ने हमले की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह घटना युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकती है। उन्होंने शांतिसैनिकों पर हमलों को तुरंत रोकने की अपील की। दुजारिक ने भी स्पष्ट किया कि शांतिसैनिकों पर हमले अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का गंभीर उल्लंघन हैं।
क्षेत्रीय तनाव की पृष्ठभूमि
यूएनआईफिल के अनुसार, दक्षिणी लेबनान में हाल के दिनों में गोलाबारी और मिसाइल हमलों की घटनाओं में लगातार वृद्धि हुई है। ईरान समर्थित संगठन हिज़बुल्लाह ने ईरान पर इजराइली हमलों के बाद इजराइल के खिलाफ अपने हमले तेज कर दिए थे, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया। यूएनआईफिल ने चेतावनी दी है कि क्षेत्र में हिंसा को तुरंत समाप्त किया जाना चाहिए।
यूएनआईफिल में भारत की भूमिका
लेबनान में तैनात यूएनआईफिल मिशन में वर्तमान में लगभग 10,800 शांतिसैनिक कार्यरत हैं, जिनमें करीब 1,000 भारतीय सैनिक भी शामिल हैं। गौरतलब है कि भारत संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में सबसे बड़े सैन्य योगदानकर्ताओं में से एक रहा है, और इसीलिए इस हमले पर भारत की प्रतिक्रिया विशेष महत्व रखती है। आगे यूएनआईफिल की जाँच के नतीजे और अंतरराष्ट्रीय दबाव यह तय करेंगे कि इस हमले के लिए जवाबदेही किस प्रकार सुनिश्चित होती है।