भारत ने CSIS के कनाडाई हस्तक्षेप के आरोप खारिज किए, खालिस्तानी खतरे पर पलटवार

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भारत ने CSIS के कनाडाई हस्तक्षेप के आरोप खारिज किए, खालिस्तानी खतरे पर पलटवार

सारांश

कनाडाई खुफिया एजेंसी CSIS ने भारत पर हस्तक्षेप का आरोप लगाया, लेकिन भारत ने इसे सिरे से खारिज करते हुए पलटवार किया — CSIS की अपनी रिपोर्ट ही कनाडा-स्थित खालिस्तानी चरमपंथियों को कनाडाई राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मानती है। यह राजनयिक तनाव का नया अध्याय है।

मुख्य बातें

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 7 मई 2026 को CSIS के हस्तक्षेप के आरोपों को "बेबुनियाद" बताकर खारिज किया।
CSIS की 'पब्लिक रिपोर्ट 2025' में चीन, रूस, ईरान और पाकिस्तान को कनाडाई लोकतंत्र में दखलंदाजी के मुख्य अपराधी बताया गया।
रिपोर्ट में स्वीकार किया गया कि कनाडा-स्थित खालिस्तानी चरमपंथी (CBKE) कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा हैं।
भारत ने कनाडाई अधिकारियों से हिंसा के महिमामंडन, राजनयिकों को धमकियों और पूजा स्थलों में तोड़-फोड़ पर कार्रवाई की माँग दोहराई।
भारत का कहना है कि ऐसे मसले राजनीतिक या सार्वजनिक मंचों की बजाय तय राजनयिक प्रक्रिया के तहत सुलझाए जाने चाहिए।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 7 मई 2026 को नई दिल्ली में साप्ताहिक प्रेस वार्ता में कनाडाई खुफिया एजेंसी कनेडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस (CSIS) के उन आरोपों को "बेबुनियाद" करार देते हुए पूरी तरह खारिज कर दिया, जिनमें भारत पर कनाडा के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप का दावा किया गया था। जायसवाल ने स्पष्ट किया कि दूसरे देशों के मामलों में दखल देना भारत की नीति नहीं है और ऐसे मसलों को राजनीतिक या सार्वजनिक मंचों की बजाय तय प्रक्रिया के तहत सुलझाया जाना चाहिए।

CSIS की रिपोर्ट में क्या था

CSIS की नवीनतम 'पब्लिक रिपोर्ट 2025' में दावा किया गया कि कनाडा की राजनीति में विदेशी दखलंदाजी "बहुत ज़्यादा और आक्रामक" है। रिपोर्ट के अनुसार, चीन, रूस, ईरान और पाकिस्तान को मुख्य अपराधी बताया गया, जो संस्थाओं को कमज़ोर करने, लोगों की मनस्थिति प्रभावित करने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भरोसा खत्म करने के लिए अलग-अलग पैंतरे अपनाते हैं। उल्लेखनीय है कि रिपोर्ट में यह भी स्वीकार किया गया कि कनाडा-स्थित खालिस्तानी चरमपंथी (CBKE) की हिंसक गतिविधियाँ कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा बनी हुई हैं।

भारत का आधिकारिक रुख

जायसवाल ने कहा, "इस खास मुद्दे पर भारत की स्थिति स्पष्ट और एक जैसी रही है। हम ऐसे बेबुनियाद आरोपों को पूरी तरह से खारिज करते हैं। भारत एक लोकतांत्रिक देश है जो अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करता है और दूसरे देशों की संप्रभुता का सम्मान करता है।" उन्होंने आगे कहा कि ऐसे मसलों की राजनीतिक या सार्वजनिक मंचों पर चर्चा के बजाय तय प्रक्रिया के तहत समाधान होना चाहिए।

खालिस्तानी खतरे पर भारत का पलटवार

विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को भारत के पुराने रुख को दोहराते हुए कहा कि भारत ने चरमपंथियों और अलगाववादियों द्वारा कनाडाई ज़मीन को पनाहगाह के तौर पर इस्तेमाल करने की जानकारी समय-समय पर कनाडाई अधिकारियों को दी है। जायसवाल ने कहा, "CSIS का आकलन खुद ही कनाडा में खालिस्तान अलगाववादी आंदोलन के समर्थकों की मौजूदगी को स्वीकारता है और मानता है कि कनाडा-स्थित खालिस्तानी चरमपंथी गुट न केवल भारत के लिए बल्कि कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा बने हुए हैं।"

भारत की कनाडा से माँग

जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत ने बार-बार कनाडाई अधिकारियों से अपनी ज़मीन पर सक्रिय भारत-विरोधी तत्वों के खिलाफ असरदार कार्रवाई की अपील की है। इनमें हिंसा का महिमामंडन, राजनयिकों और नेताओं को धमकियाँ देना, पूजा स्थलों में तोड़-फोड़ और तथाकथित जनमत संग्रहों के ज़रिए अलगाववाद को बढ़ावा देने की कोशिशें शामिल हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारत-कनाडा संबंध पहले से ही राजनयिक तनाव के दौर से गुज़र रहे हैं। आगे देखना होगा कि कनाडा सरकार इन चिंताओं पर क्या ठोस कदम उठाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वही अपनी रिपोर्ट में कनाडा-स्थित खालिस्तानी चरमपंथियों को कनाडाई राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा भी मानती है। भारत ने इसी विरोधाभास को अपने पलटवार का आधार बनाया है, जो कूटनीतिक दृष्टि से चतुर कदम है। असली सवाल यह है कि कनाडा सरकार अपनी ही खुफिया एजेंसी की इस स्वीकारोक्ति के बावजूद खालिस्तानी तत्वों पर ठोस कार्रवाई क्यों नहीं करती — और इस निष्क्रियता से भारत-कनाडा संबंधों की खाई और गहरी होती जा रही है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CSIS ने भारत पर क्या आरोप लगाए हैं?
कनाडाई खुफिया एजेंसी CSIS ने अपनी 'पब्लिक रिपोर्ट 2025' में दावा किया कि कनाडा की राजनीति में विदेशी दखलंदाजी बहुत ज़्यादा और आक्रामक है और इसमें भारत का नाम भी लिया गया है। हालाँकि रिपोर्ट में मुख्य अपराधियों के रूप में चीन, रूस, ईरान और पाकिस्तान का उल्लेख किया गया है।
भारत ने CSIS के आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया दी?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 7 मई को इन आरोपों को पूरी तरह "बेबुनियाद" बताकर खारिज किया। उन्होंने कहा कि दूसरे देशों के मामलों में दखल देना भारत की नीति नहीं है और भारत अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करता है।
CSIS रिपोर्ट में खालिस्तानी चरमपंथियों के बारे में क्या कहा गया?
CSIS की रिपोर्ट में स्वीकार किया गया कि कनाडा-स्थित खालिस्तानी चरमपंथी (CBKE) न केवल भारत के लिए बल्कि कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा बने हुए हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ये तत्व लोकतांत्रिक आज़ादी का गलत इस्तेमाल करके उग्रवाद को बढ़ावा देते हैं और हिंसक गतिविधियों के लिए फंड इकट्ठा करते हैं।
भारत ने कनाडा से क्या माँग की है?
भारत ने बार-बार कनाडाई अधिकारियों से अपनी ज़मीन पर सक्रिय भारत-विरोधी तत्वों के खिलाफ असरदार कार्रवाई की अपील की है। इनमें हिंसा का महिमामंडन, राजनयिकों को धमकियाँ, पूजा स्थलों में तोड़-फोड़ और तथाकथित जनमत संग्रहों के ज़रिए अलगाववाद को बढ़ावा देना शामिल है।
भारत-कनाडा संबंधों की मौजूदा स्थिति क्या है?
भारत और कनाडा के बीच राजनयिक संबंध पहले से ही तनावपूर्ण दौर से गुज़र रहे हैं। CSIS की ताज़ा रिपोर्ट और भारत के तीखे पलटवार ने इस तनाव को और बढ़ा दिया है, जबकि दोनों देशों के बीच खालिस्तानी मुद्दे पर विवाद लंबे समय से जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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