ट्रंप के हस्ताक्षर की कोई कीमत नहीं — ईरानी सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई का बड़ा बयान
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने 19 जुलाई को ईरानी जनता को संबोधित करते हुए कहा कि अमेरिका द्वारा हाल ही में हस्ताक्षरित शांति समझौते (एमओयू) का उल्लंघन यह सिद्ध करता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर का कोई मूल्य नहीं और वे अमान्य हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव जारी है और 18 जून को हस्ताक्षरित एमओयू की स्थिति अनिश्चित हो गई है।
खामेनेई का सीधा आरोप
खामेनेई ने अपने संबोधन में कहा, 'दोनों देशों के बीच एमओयू पर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और ट्रंप ने 18 जून को हस्ताक्षर किया था। अमेरिका की तरफ से इसका उल्लंघन एक बार फिर सभी को यह साबित कर देता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति का हस्ताक्षर कितना अमूल्य और अमान्य है।' उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ने एक बार फिर अपना असली और बेपर्दा चेहरा दिखाया है, और यह वादे तोड़ने का बुरा अनुभव अमेरिका के 'झूठ बोलने और गैर-भरोसेमंद प्रकृति' का एक और पक्का सबूत है।
खामेनेई ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका युद्ध भड़काने वाली हरकतें जारी रखता है, तो उसे ईरान से 'कभी न भूलने वाले सबक' की उम्मीद करनी चाहिए। गौरतलब है कि यह ईरान की ओर से अब तक की सबसे कड़ी सार्वजनिक चेतावनियों में से एक है।
एमओयू का ढाँचा और उल्लंघन के आरोप
उक्त एमओयू के तहत दोनों देशों के बीच 60 दिनों के अंदर अंतिम समझौते के लिए बातचीत किए जाने की उम्मीद थी। हालाँकि, ईरान के कानूनी और अंतरराष्ट्रीय मामलों के डिप्टी विदेश मंत्री काजम गरीबाबादी ने शनिवार को कहा कि ईरान ने एमओयू के तहत अपनी जिम्मेदारियाँ पूरी करना बंद कर दिया है, क्योंकि अमेरिका ने समझौते के तहत अपने सभी प्रतिबद्धताओं को या तो तोड़ा है या रोक दिया है।
सरकारी आईआरआईबी टीवी को दिए एक साक्षात्कार में गरीबाबादी ने कहा, 'अभी हमारे सामने देश की मजबूती से रक्षा करने की चुनौती है। इस बार भी, अमेरिकियों को पहले ही जवाब मिल चुका है कि इन आक्रामक कार्रवाइयों से कुछ नहीं होगा। अगर वे समझदार हैं, तो उन्हें दूसरे तरीके चुनने चाहिए।'
सैन्य टकराव की स्थिति
अमेरिका ने पिछले सप्ताह ईरान के दक्षिणी हिस्सों में स्थित कई सैन्य ठिकानों और रणनीतिक ढाँचों पर हमले किए। वाशिंगटन का कहना है कि इन कार्रवाइयों का उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट में वाणिज्यिक जहाजों के लिए खतरा पैदा करने की ईरान की क्षमता को कमजोर करना था।
जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के कई देशों और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों व अन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले किए। कुवैत और बहरीन ने शनिवार को दावा किया कि उनके वायु रक्षा तंत्र ने ईरान की ओर से किए गए ताजा हवाई हमलों को सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया। कुवैत में एक अहम तेल प्रतिष्ठान के साथ-साथ बिजली उत्पादन और समुद्री जल को मीठा बनाने (डिसेलिनेशन) वाले संयंत्र को भी निशाना बनाया गया।
क्षेत्रीय असर और आगे की राह
यह संघर्ष ऐसे समय में गहरा रहा है जब होर्मुज स्ट्रेट से होकर वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर हमलों ने पूरे क्षेत्र में तनाव को नई ऊँचाई पर पहुँचा दिया है। आलोचकों का कहना है कि 18 जून के एमओयू के टूटने से कूटनीतिक रास्ता बंद होता दिख रहा है और दोनों पक्षों के बीच सैन्य कार्रवाई का दायरा बढ़ता जा रहा है। फिलहाल बातचीत की कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है।