19 जुलाई 2026
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ट्रंप के हस्ताक्षर की कोई कीमत नहीं — ईरानी सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई का बड़ा बयान

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ट्रंप के हस्ताक्षर की कोई कीमत नहीं — ईरानी सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई का बड़ा बयान

सारांश

ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने 18 जून के एमओयू उल्लंघन को ट्रंप के हस्ताक्षर की 'बेकारी' का सबूत बताया। अमेरिका-ईरान सैन्य टकराव के बीच ईरान ने एमओयू के तहत अपनी प्रतिबद्धताएँ रोकीं; खाड़ी देशों में मिसाइल-ड्रोन हमले जारी हैं।

मुख्य बातें

मोजतबा खामेनेई ने 19 जुलाई को कहा कि अमेरिका द्वारा एमओयू के उल्लंघन से ट्रंप के हस्ताक्षर की अमान्यता सिद्ध होती है।
18 जून को ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और ट्रंप ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे; 60 दिनों में अंतिम समझौते की उम्मीद थी।
डिप्टी विदेश मंत्री काजम गरीबाबादी ने कहा कि ईरान ने एमओयू के तहत अपनी प्रतिबद्धताएँ रोक दी हैं।
अमेरिका ने ईरान के दक्षिणी हिस्सों में सैन्य ठिकानों पर हमले किए; ईरान ने खाड़ी देशों और जॉर्डन में अमेरिकी अड्डों पर मिसाइल-ड्रोन से जवाब दिया।
कुवैत और बहरीन ने दावा किया कि उनके वायु रक्षा तंत्र ने ईरानी हमलों को नाकाम किया; कुवैत के तेल प्रतिष्ठान और डिसेलिनेशन संयंत्र को निशाना बनाया गया।
खामेनेई ने चेतावनी दी कि अमेरिका की आक्रामक कार्रवाइयाँ जारी रहीं तो ईरान 'कभी न भूलने वाला सबक' देगा।

ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने 19 जुलाई को ईरानी जनता को संबोधित करते हुए कहा कि अमेरिका द्वारा हाल ही में हस्ताक्षरित शांति समझौते (एमओयू) का उल्लंघन यह सिद्ध करता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर का कोई मूल्य नहीं और वे अमान्य हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव जारी है और 18 जून को हस्ताक्षरित एमओयू की स्थिति अनिश्चित हो गई है।

खामेनेई का सीधा आरोप

खामेनेई ने अपने संबोधन में कहा, 'दोनों देशों के बीच एमओयू पर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और ट्रंप ने 18 जून को हस्ताक्षर किया था। अमेरिका की तरफ से इसका उल्लंघन एक बार फिर सभी को यह साबित कर देता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति का हस्ताक्षर कितना अमूल्य और अमान्य है।' उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ने एक बार फिर अपना असली और बेपर्दा चेहरा दिखाया है, और यह वादे तोड़ने का बुरा अनुभव अमेरिका के 'झूठ बोलने और गैर-भरोसेमंद प्रकृति' का एक और पक्का सबूत है।

खामेनेई ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका युद्ध भड़काने वाली हरकतें जारी रखता है, तो उसे ईरान से 'कभी न भूलने वाले सबक' की उम्मीद करनी चाहिए। गौरतलब है कि यह ईरान की ओर से अब तक की सबसे कड़ी सार्वजनिक चेतावनियों में से एक है।

एमओयू का ढाँचा और उल्लंघन के आरोप

उक्त एमओयू के तहत दोनों देशों के बीच 60 दिनों के अंदर अंतिम समझौते के लिए बातचीत किए जाने की उम्मीद थी। हालाँकि, ईरान के कानूनी और अंतरराष्ट्रीय मामलों के डिप्टी विदेश मंत्री काजम गरीबाबादी ने शनिवार को कहा कि ईरान ने एमओयू के तहत अपनी जिम्मेदारियाँ पूरी करना बंद कर दिया है, क्योंकि अमेरिका ने समझौते के तहत अपने सभी प्रतिबद्धताओं को या तो तोड़ा है या रोक दिया है।

सरकारी आईआरआईबी टीवी को दिए एक साक्षात्कार में गरीबाबादी ने कहा, 'अभी हमारे सामने देश की मजबूती से रक्षा करने की चुनौती है। इस बार भी, अमेरिकियों को पहले ही जवाब मिल चुका है कि इन आक्रामक कार्रवाइयों से कुछ नहीं होगा। अगर वे समझदार हैं, तो उन्हें दूसरे तरीके चुनने चाहिए।'

सैन्य टकराव की स्थिति

अमेरिका ने पिछले सप्ताह ईरान के दक्षिणी हिस्सों में स्थित कई सैन्य ठिकानों और रणनीतिक ढाँचों पर हमले किए। वाशिंगटन का कहना है कि इन कार्रवाइयों का उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट में वाणिज्यिक जहाजों के लिए खतरा पैदा करने की ईरान की क्षमता को कमजोर करना था।

जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के कई देशों और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों व अन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले किए। कुवैत और बहरीन ने शनिवार को दावा किया कि उनके वायु रक्षा तंत्र ने ईरान की ओर से किए गए ताजा हवाई हमलों को सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया। कुवैत में एक अहम तेल प्रतिष्ठान के साथ-साथ बिजली उत्पादन और समुद्री जल को मीठा बनाने (डिसेलिनेशन) वाले संयंत्र को भी निशाना बनाया गया।

क्षेत्रीय असर और आगे की राह

यह संघर्ष ऐसे समय में गहरा रहा है जब होर्मुज स्ट्रेट से होकर वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर हमलों ने पूरे क्षेत्र में तनाव को नई ऊँचाई पर पहुँचा दिया है। आलोचकों का कहना है कि 18 जून के एमओयू के टूटने से कूटनीतिक रास्ता बंद होता दिख रहा है और दोनों पक्षों के बीच सैन्य कार्रवाई का दायरा बढ़ता जा रहा है। फिलहाल बातचीत की कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो '60 दिनों में अंतिम समझौते' की शर्त किस आधार पर टिकी थी? होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ता तनाव वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए सीधा खतरा है, जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर पर्याप्त गंभीरता से नहीं उठाती। खाड़ी देशों — कुवैत, बहरीन — का इस संघर्ष में सीधे खिंच जाना यह संकेत देता है कि यह द्विपक्षीय टकराव अब क्षेत्रीय युद्ध की शक्ल लेने के करीब है।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोजतबा खामेनेई ने ट्रंप के हस्ताक्षर को अमान्य क्यों बताया?
खामेनेई ने कहा कि अमेरिका ने 18 जून को हस्ताक्षरित एमओयू का उल्लंघन किया है, जो यह सिद्ध करता है कि ट्रंप के हस्ताक्षर का कोई मूल्य नहीं है। उनके अनुसार यह अमेरिका की 'गैर-भरोसेमंद और झूठी प्रकृति' का एक और प्रमाण है।
ईरान-अमेरिका एमओयू क्या था और इसमें क्या तय हुआ था?
18 जून को ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत दोनों देशों के बीच 60 दिनों के भीतर अंतिम शांति समझौते के लिए बातचीत किए जाने की उम्मीद थी।
ईरान ने एमओयू के तहत अपनी प्रतिबद्धताएँ क्यों रोकीं?
ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री काजम गरीबाबादी ने कहा कि अमेरिका ने समझौते के तहत अपने सभी प्रतिबद्धताओं को या तो तोड़ा है या रोक दिया है, इसलिए ईरान ने भी अपनी जिम्मेदारियाँ पूरी करना बंद कर दिया। उन्होंने कहा कि अब ईरान का ध्यान देश की रक्षा पर केंद्रित है।
अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव की मौजूदा स्थिति क्या है?
अमेरिका ने ईरान के दक्षिणी हिस्सों में सैन्य ठिकानों और रणनीतिक ढाँचों पर हमले किए हैं, जिसका उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट में ईरान की खतरा पैदा करने की क्षमता को कमजोर करना बताया गया। जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं।
कुवैत और बहरीन इस संघर्ष में कैसे प्रभावित हुए हैं?
कुवैत और बहरीन ने दावा किया कि उनके वायु रक्षा तंत्र ने ईरान की ओर से किए गए हवाई हमलों को नाकाम किया। कुवैत में एक अहम तेल प्रतिष्ठान, बिजली उत्पादन संयंत्र और डिसेलिनेशन संयंत्र को भी निशाना बनाया गया।
राष्ट्र प्रेस
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