ईरान ने जंग जीत ली, अब स्थिरता बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती: स्पीकर गालिबाफ
सारांश
मुख्य बातें
ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने 1 अगस्त 2026 को दावा किया कि ईरान यह युद्ध जीत चुका है, और अब सबसे बड़ी चुनौती इस जीत को दीर्घकालिक स्थिरता में बदलना तथा देश को और अधिक सशक्त बनाना है। संघर्ष विराम वार्ता में शीर्ष भूमिका निभा रहे गालिबाफ ने ईरानी संसद समन्वय परिषद की बैठक में यह टिप्पणी की।
मुख्य घटनाक्रम
अर्ध-आधिकारिक तस्नीम समाचार एजेंसी की रिपोर्टों के अनुसार, गालिबाफ ने परिषद को संबोधित करते हुए कहा, 'हमें शक्तिशाली ईरान बनाना है और इसकी शुरुआत सुप्रीम लीडर के अधिकार और फैसले लेने की ताकत को और मजबूत करने से होगी। देश को बेहतर भविष्य की उम्मीद करनी होगी और इसके साथ ही आगे बढ़ना चाहिए।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब गुरुवार को अमेरिका ने दक्षिणी ईरान के कई इलाकों पर मिसाइल हमले किए।
अमेरिकी हमलों की निंदा
गालिबाफ ने अपने एक्स अकाउंट पर एक पोस्ट के ज़रिए केशम द्वीप पर आम नागरिकों के घरों को निशाना बनाए जाने की कड़ी निंदा की। उन्होंने इसे मिनाब और लामेर्द में किए गए अमेरिकी हमलों की ही अगली कड़ी बताया। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, 'अमेरिका हर दिन एक नए अपराध में शामिल हो रहा है — उन्हें इसकी कीमत चुकानी होगी।' अमेरिकी हमलों में बुशेहर, फार्स और खुजेस्तान प्रांतों के कुछ इलाके भी प्रभावित हुए।
होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने की चेतावनी
ईरानी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहम्मद बाकर जोलकद्र ने भी अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका ने अपना रवैया नहीं बदला तो इसके परिणामस्वरूप स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को और अधिक बंद किया जा सकता है, और अन्य महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग (चोकपॉइंट्स) भी प्रभावित हो सकते हैं। जोलकद्र ने अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाई गई कथित गैर-कानूनी नौसैनिक नाकेबंदी की भी आलोचना की।
व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि यह बयानबाज़ी ऐसे समय में हो रही है जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अपने चरम पर है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से दुनिया का लगभग 20% तेल व्यापार गुज़रता है, ऐसे में इसे बंद करने की धमकी वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों के लिए गंभीर संकेत है। ईरान की ओर से 'जीत' का यह दावा कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, हालाँकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है।
आगे क्या
दोनों पक्षों की ओर से बढ़ती जवाबी बयानबाज़ी के बीच क्षेत्रीय स्थिरता पर सवालिया निशान लगा हुआ है। विश्लेषकों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान की धमकी वार्ता की मेज़ पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा हो सकती है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया और संभावित कूटनीतिक पहलें इस संकट की दिशा तय करेंगी।