ट्रंप का रवैया समझ से परे: इटली के रक्षा मंत्री क्रोसेटो की बेबाक टिप्पणी
सारांश
मुख्य बातें
इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेटो ने 21 जून को स्वीकार किया कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया 'रवैये' को समझने में असमर्थ हैं — यह बयान ऐसे समय आया जब ट्रंप ने पिछले 48 घंटों में इटली और नाटो की खुलकर आलोचना की थी। रोम में रेडियो कार्यक्रम में दिए इस बयान ने अटलांटिक गठबंधन के भीतर बढ़ते तनाव को उजागर किया है।
क्रोसेटो ने क्या कहा
रेडियो 24 के कार्यक्रम 'कैफे डेला डोमेनिका' में क्रोसेटो ने कहा, 'अमेरिका के साथ हमारे रिश्ते सरकारों या प्रधानमंत्रियों पर निर्भर नहीं करते। दोनों देशों के बीच संबंध बहुत गहरे और मजबूत हैं। मैं इन दिनों ट्रंप के रवैये को नहीं समझ पा रहा हूं, क्योंकि टीवी पर मैंने जो देखा, उससे लगा था कि इटली और अमेरिका के रिश्तों में कोई समस्या नहीं थी।'
उन्होंने यह भी जोड़ा कि अमेरिकी राजदूत के साथ उनके संबंध अभी भी सामान्य हैं और उनके अनुसार राजदूत स्वयं 'इन दिनों मुश्किल स्थिति में हैं।'
इटली का योगदान और ट्रंप की आलोचना
क्रोसेटो ने ट्रंप की आलोचना का प्रतिवाद करते हुए कहा कि रक्षा और सैन्य मामलों में इटली ने यूरोप के अन्य देशों की तुलना में 'ज़्यादा योगदान दिया है, यहाँ तक कि सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल के मामले में भी।' उन्होंने स्पष्ट किया कि इटली ने अपने समझौतों का 'पूरी तरह पालन किया है, जबकि कुछ दूसरे देशों ने इस्तेमाल की अनुमति देने से इनकार कर दिया।'
गौरतलब है कि ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े अमेरिकी कदमों के लिए इटली समेत नाटो सहयोगियों से पर्याप्त समर्थन न मिलने की शिकायत की थी।
इटली के जहाज और मिशन की सीमाएँ
क्रोसेटो ने बताया कि इटली के माइनहंटर जहाज पहले से ही जिबूती में तैनात हैं। उन्होंने स्पष्ट किया, 'हम युद्ध करने के लिए जहाज नहीं भेज रहे हैं, बल्कि मानवीय उद्देश्य से समुद्र में मौजूद खतरनाक बारूदी सुरंगों को हटाने के काम के लिए भेज रहे हैं।' यह जहाज संसद की मंजूरी और तय शर्तें पूरी होने पर ही कार्रवाई करेंगे।
अमेरिका-ईरान संदर्भ और आगे की राह
अमेरिका और ईरान के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर के बाद दोनों देश स्थायी शांति और ईरान के परमाणु कार्यक्रम के प्रबंधन पर सीधी बातचीत कर रहे हैं। क्रोसेटो ने माना कि 'यह आसान नहीं है और आगे भी आसान नहीं होगा,' साथ ही कहा कि हाल का समझौता 'इस लंबे रास्ते का अंत नहीं है।'
क्रोसेटो ने कहा कि ट्रंप के कई फैसले उनकी 'अपनी सोच और विचारों पर आधारित' होते हैं और हो सकता है कि उनसे हमेशा सहमति न हो — लेकिन इटली को इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। यह विवाद नाटो के भीतर अमेरिका और यूरोपीय सहयोगियों के बीच बढ़ती दूरी का ताज़ा उदाहरण है।