कराची यूनिवर्सिटी संकट: 40 दिन की समिति का प्रस्ताव खारिज, शिक्षकों का परीक्षा बहिष्कार जारी
सारांश
मुख्य बातें
कराची विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने सिंध उच्च शिक्षा आयोग (SHEC) द्वारा गठित छह सदस्यीय विशेष समिति के प्रस्ताव को सिरे से खारिज करते हुए सेमेस्टर परीक्षाओं का बहिष्कार जारी रखने का फैसला किया है। 5 मई 2026 से चल रहा यह आंदोलन अब लगभग एक महीने पुराना हो चुका है, और लंबित वेतन तथा बकाया भुगतान की मांगों पर शिक्षक अपने रुख से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
आम सभा का सर्वसम्मत फैसला
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मंगलवार को आयोजित कराची यूनिवर्सिटी टीचर्स सोसाइटी (KUTS) की आम सभा में सर्वसम्मति से तय हुआ कि सेमेस्टर परीक्षाओं का बहिष्कार जारी रहेगा। शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि आंदोलन समाप्त करने का अधिकार केवल आम सभा के पास है, और किसी भी समझौते के लिए उसकी औपचारिक स्वीकृति अनिवार्य है।
SHEC की समिति और 40 दिन की समय-सीमा
हाल ही में SHEC ने विश्वविद्यालय के शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की शिकायतों के समाधान के लिए छह सदस्यीय समिति के गठन की अधिसूचना जारी की थी। आयोग के अध्यक्ष की अगुवाई वाली इस समिति में विश्वविद्यालय एवं बोर्ड विभाग के सचिव, SHEC सचिव, KUTS अध्यक्ष तथा कर्मचारी एवं अधिकारी कल्याण संघों के प्रतिनिधि शामिल किए गए हैं। समिति को 40 दिनों के भीतर सिफारिशें सौंपने का दायित्व दिया गया है।
अधिसूचना में यह भी कहा गया था कि शिक्षक और कर्मचारी प्रतिनिधि परीक्षा बहिष्कार तत्काल समाप्त करने पर सहमत हो गए हैं — किंतु KUTS की आम सभा ने इस दावे को नकारते हुए प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया।
KUTS अध्यक्ष का रुख
KUTS के अध्यक्ष डॉ. सैयद गुफरान आलम ने कहा कि शिक्षकों ने SHEC की पहल का स्वागत किया है और संवाद के लिए उनके दरवाज़े खुले हैं, लेकिन बकाया भुगतान के बिना आंदोलन समाप्त करना संभव नहीं है। उन्होंने रेखांकित किया कि शिक्षक महीनों से बिना वेतन पढ़ा रहे हैं और प्रशासन से बार-बार गुहार लगाने के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं निकला।
मांगों का दायरा और कर्मचारियों का साथ
शिक्षक 5 मई से शाम की कक्षाओं, परीक्षा पर्यवेक्षण, उत्तर पुस्तिका जांच, प्रश्नपत्र निर्माण, अवकाश नकदीकरण तथा अन्य लंबित भुगतानों को लेकर आंदोलनरत हैं। गौरतलब है कि अब गैर-शिक्षण कर्मचारी भी इस विरोध में शामिल हो चुके हैं और उन्होंने विश्वविद्यालय के वित्तीय संकट की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
आगे क्या
शैक्षणिक कार्य ठप पड़ा है और सेशन परीक्षाओं पर सीधा असर पड़ रहा है, जिससे हज़ारों छात्रों का भविष्य अधर में है। जब तक SHEC की समिति ठोस वित्तीय रोडमैप के साथ सामने नहीं आती, तब तक गतिरोध टूटने के संकेत नहीं दिख रहे।