होर्मुज जलमार्ग पर MOL का बड़ा फैसला: US-ईरान डील के बाद भी जहाज नहीं भेजेंगे
सारांश
मुख्य बातें
जापान की प्रमुख शिपिंग कंपनी मित्सुई ओएसके लाइन्स (MOL) ने 16 जून 2026 को स्पष्ट किया कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता होने के बावजूद वह फिलहाल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से अपने जहाज नहीं गुज़ारेगी। कंपनी के अनुसार, जब तक समझौते का असर ज़मीन पर नहीं दिखता, तब तक कोई जोखिम नहीं उठाया जाएगा।
MOL का रुख: कागज़ी समझौता काफी नहीं
कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जोतारो तमूरा ने फाइनेंशियल टाइम्स से बातचीत में कहा, "सिर्फ संबंधित देशों के बीच कोई साधारण समझौता हो जाना अपने आप में काफी नहीं होगा। ज़रूरी यह है कि उसका असर होर्मुज के वास्तविक हालात में भी साफ तौर पर दिखाई दे। ऐसा हुआ तभी शिपिंग कंपनियाँ वहाँ से दोबारा सुरक्षित और निश्चिंत होकर अपने जहाज गुज़ारने का फैसला कर पाएंगी।"
तमूरा ने यह टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की डील घोषणा से पहले की थी। हालांकि, समझौते को अंतिम रूप दिए जाने के बाद सोमवार को MOL ने स्पष्ट किया कि तमूरा का आकलन अब भी नहीं बदला है।
ट्रंप का दावा, ज़मीनी हकीकत अलग
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने US-ईरान शांति समझौते की घोषणा के साथ दावा किया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अब "सुरक्षित, संरक्षित और पूरी तरह सामान्य" है। लेकिन वास्तविकता यह है कि फरवरी के अंत से यह रणनीतिक जलमार्ग लगभग पूरी तरह बंद रहा है।
तमूरा के अनुसार, होर्मुज से तेल टैंकरों और मालवाहक जहाजों की सामान्य आवाजाही बहाल होने में अभी कई सप्ताह लग सकते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पहले से ही दबाव में है।
IMO भी सतर्क, माइंस और भीड़भाड़ बड़ी चुनौती
इंटरनेशनल मेरिटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) के महासचिव आर्सिनो डोमिनगेस ने कहा कि संगठन इस बात का आकलन कर रहा है कि जहाजों को सुरक्षित तरीके से कैसे निकाला जा सकता है। उन्होंने बताया कि संभावित समुद्री बारूदी सुरंगों (माइंस) और अत्यधिक भीड़भाड़ जैसी चुनौतियों से बचने के उपायों पर विचार किया जा रहा है, क्योंकि इनसे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।
MOL की ताकत और होर्मुज का महत्व
मित्सुई ओएसके लाइन्स दुनिया की सबसे बड़ी टैंकर ऑपरेटिंग कंपनियों में से एक है। कंपनी के पास 900 से अधिक जहाज हैं, जिनमें 200 से ज़्यादा कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और रसायनों के परिवहन में लगे हैं। जहाज़ों की संख्या के आधार पर इसे दुनिया का सबसे बड़ा टैंकर ऑपरेटर माना जाता है।
गौरतलब है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुज़रता है, और इस जलमार्ग पर किसी भी व्यवधान का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाज़ारों पर पड़ता है।
आगे क्या होगा
शिपिंग उद्योग के विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक होर्मुज में माइंस की सफाई और सुरक्षा की पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक बड़ी कंपनियाँ सतर्क रुख बनाए रखेंगी। MOL जैसी अग्रणी कंपनी के इस फैसले से अन्य शिपिंग कंपनियाँ भी अपनी रणनीति पर पुनर्विचार कर सकती हैं। आने वाले हफ्तों में IMO की रिपोर्ट और ज़मीनी स्थिति ही तय करेगी कि होर्मुज कब और कैसे सामान्य होगा।