नेपाल बाढ़: जयशंकर ने काठमांडू-बीजिंग दूतावासों संग की बैठक, 47.5 टन राहत सामग्री भेजी
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार, 28 अगस्त को विदेश मंत्रालय (MEA) के वरिष्ठ अधिकारियों तथा काठमांडू और बीजिंग स्थित भारतीय दूतावासों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की, जिसमें नेपाल में भोटे कोशी नदी की विनाशकारी बाढ़ के बाद चल रहे राहत एवं बचाव अभियानों की समीक्षा की गई। बैठक में विदेश सचिव विक्रम मिसरी और MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल भी उपस्थित रहे।
बैठक में क्या हुआ
बैठक के बाद विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, 'नेपाल में चल रहे राहत और बचाव कार्यों पर विस्तृत चर्चा हुई। काठमांडू और बीजिंग में हमारे दूतावासों ने भारतीय नागरिकों की स्थिति और उनकी सलामती के बारे में ताज़ा जानकारी दी। MEA के संबंधित विभागों ने नेपाल भेजे जाने वाले अतिरिक्त राहत सामग्री के बारे में बताया। हम इस मुद्दे को सबसे ज़्यादा प्राथमिकता देते हैं।'
MEA प्रवक्ता जायसवाल ने प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि भारत बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बचाव कार्य को गति देने के लिए बेली ब्रिज भी भेज रहा है।
भारत ने भेजी 47.5 टन राहत सामग्री
जायसवाल ने बताया कि भारत ने दो विमानों के ज़रिए नेपाल को कुल 47.5 टन आपातकालीन सहायता सामग्री भेजी है। पहला C-130J विमान बुधवार रात लगभग 8:30 बजे IST 10 टन सामग्री लेकर रवाना हुआ, जिसमें अस्थायी शेल्टर, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप और दवाएं शामिल थीं।
गुरुवार सुबह दूसरा C-17 विमान 37.5 टन सामान लेकर रवाना हुआ — इसमें 28.5 टन राहत सामग्री (टेंट, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप, वॉटर पंप, किचन सेट, जेनसेट), 8 टन दवाएं और 1 टन खाद्य सामग्री शामिल थी। जायसवाल ने कहा कि अतिरिक्त सहायता भेजने पर भी विचार किया जा रहा है।
आपदा की भयावहता: 469 मौतें, 977 लापता
राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के अनुसार, अलग-अलग ज़िलों से अब तक 469 शव बरामद किए जा चुके हैं। सर्वाधिक 178 शव चितवन ज़िले से मिले हैं, इसके बाद नवलपरासी ईस्ट में 110, गोरखा में 44, नुवाकोट में 37, तनहुन में 28, नवलपरासी वेस्ट में 27, धाडिंग में 23 और रसुवा में 12 शव मिले हैं।
कम से कम 73 लोग घायल हुए हैं — रसुवा में 43, नुवाकोट में 27 और धाडिंग में 3। 977 लोग अभी भी संपर्क से बाहर हैं, जिनमें 517 विदेशी नागरिक शामिल हैं।
भारतीयों सहित विदेशी नागरिक लापता
MEA ने गुरुवार रात बताया कि बाढ़ के बाद 290 भारतीय नागरिक अभी भी संपर्क से बाहर हैं। इसके अलावा, अमेरिका ने कहा कि लगभग 90 अमेरिकी नागरिक प्रभावित हो सकते हैं, जबकि चीन ने बताया कि नेपाली क्षेत्र में लगभग 100 चीनी नागरिक लापता हैं।
लापता लोगों में विदेश में रहने वाले 127 नेपाली, नेपाल पुलिस के 28 जवान, नेपाल सेना के 45 जवान, सशस्त्र पुलिस बल के 13 जवान, कस्टम कार्यालय के 15 कर्मचारी और आव्रजन कार्यालय के 4 कर्मचारी भी शामिल हैं।
बाढ़ का कारण और बुनियादी ढाँचे पर असर
माना जा रहा है कि नेपाल और चीन के बीच बहने वाली भोटे कोशी नदी के ऊपरी हिस्से में हिमस्खलन के कारण यह बाढ़ आई। इस तबाही में नदी के निचले इलाकों की कई बस्तियाँ, सड़कें, पनबिजली परियोजनाएं और ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर बह गए। गौरतलब है कि यह क्षेत्र पहले भी हिमनद झील विस्फोट (GLOF) की घटनाओं के लिए संवेदनशील माना जाता रहा है। आने वाले दिनों में भारत की ओर से और सहायता तथा बेली ब्रिज की आपूर्ति अपेक्षित है।