नाटो के फ्यूल सप्लाई चेन प्लान पर उत्तर कोरिया का तीखा हमला — 'युद्ध की खुली तैयारी'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए ने 1 अगस्त 2026 को नाटो (नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन) की हाल ही में स्वीकृत 'फ्यूल सप्लाई चेन कैपेबिलिटी प्रोग्राम प्लान' की कड़ी निंदा की और इसे युद्ध की 'पूरी तैयारी' तथा गठबंधन के 'अधिक आक्रामक सैन्य गुट' में रूपांतरण का प्रमाण बताया। यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब उत्तर कोरिया खुद अपनी सैन्य क्षमताओं का विस्तार करने में जुटा है और हाल के महीनों में कई लंबी दूरी की मिसाइलों का परीक्षण कर चुका है।
नाटो की योजना क्या है
नाटो ने पिछले महीने 'फ्यूल सप्लाई चेन कैपेबिलिटी प्रोग्राम प्लान' को मंजूरी दी, जिसका उद्देश्य यूरोप में शीत युद्ध काल के सैन्य ईंधन पाइपलाइन और भंडारण नेटवर्क का आधुनिकीकरण एवं विस्तार करना है। केसीएनए के अनुसार, शुरुआत में सदस्य देशों के बीच भारी लागत को लेकर मतभेद थे, लेकिन अंततः उन्हें दूर कर लिया गया। केसीएनए ने कहा, 'इससे स्पष्ट होता है कि नाटो युद्ध के लिए रणनीतिक ईंधन भंडार को अत्यंत महत्वपूर्ण मानते हुए उस पर जोर दे रहा है।'
उत्तर कोरिया के आरोप
केसीएनए ने आरोप लगाया कि इस पहल का वास्तविक उद्देश्य भविष्य के संघर्षों के लिए ईंधन और अन्य सैन्य सामग्री का बड़े पैमाने पर भंडारण करना है। केसीएनए की टिप्पणी में कहा गया, 'नाटो की मंशा पर्याप्त ईंधन और अन्य युद्ध सामग्री जमा कर दुनिया के किसी भी हिस्से में कभी भी युद्ध की आग भड़काने की है। नाटो की स्थापना के बाद कई दशक बीत चुके हैं, लेकिन उसने पहले कभी इतनी खुली तरह युद्ध की तैयारी नहीं की थी।' उत्तर कोरिया ने यह भी दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया नाटो की इस योजना को रूस के साथ युद्ध की तैयारी के रूप में देख रहा है।
एशिया-प्रशांत पर नाटो की नज़र
उत्तर कोरिया ने नाटो पर एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने का भी आरोप लगाया। केसीएनए के अनुसार, गठबंधन 'डीपीआरके (उत्तर कोरिया) के प्रति शत्रुतापूर्ण देशों के साथ मिलकर कोरियाई प्रायद्वीप के आसपास लगातार उकसावे वाले सैन्य प्रदर्शन करता है।' टिप्पणी में हाल ही में हवाई द्वीपसमूह और उसके आसपास संपन्न द्विवार्षिक रिम ऑफ द पैसिफिक (रिमपैक) सैन्य अभ्यास का भी उल्लेख किया गया, जिसमें जर्मनी, इटली सहित कई नाटो सदस्य देशों ने हिस्सा लिया था।
व्यापक भू-राजनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब उत्तर कोरिया पर यूक्रेन युद्ध में रूस के समर्थन के लिए अपने सैनिक भेजने के आरोप लगते रहे हैं। दूसरी ओर, नाटो यूक्रेन को सैन्य सहायता देना जारी रखे हुए है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक सुरक्षा तनाव कई मोर्चों पर एक साथ बढ़ रहा है और प्योंगयांग की नजर नाटो की प्रत्येक सैन्य गतिविधि पर बनी हुई है।
केसीएनए का निष्कर्ष
केसीएनए ने अंत में कहा, 'युद्ध को लेकर खासा उत्साहित सैन्य गुट के रूप में नाटो का वास्तविक स्वरूप अब और अधिक स्पष्ट होता जा रहा है। युद्ध को बढ़ावा देना, नाटो के अपने पतन को तेज करना है।' आने वाले हफ्तों में नाटो की प्रतिक्रिया और कोरियाई प्रायद्वीप पर तनाव का स्तर वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य की दिशा तय करेगा।