1 अगस्त 2026
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नाटो के फ्यूल सप्लाई चेन प्लान पर उत्तर कोरिया का तीखा हमला — 'युद्ध की खुली तैयारी'

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नाटो के फ्यूल सप्लाई चेन प्लान पर उत्तर कोरिया का तीखा हमला — 'युद्ध की खुली तैयारी'

सारांश

उत्तर कोरिया की सरकारी एजेंसी केसीएनए ने नाटो के फ्यूल सप्लाई चेन प्लान को 'युद्ध की खुली तैयारी' करार दिया — और साथ ही एशिया-प्रशांत में गठबंधन की बढ़ती सैन्य मौजूदगी पर भी निशाना साधा। यह बयान तब आया जब खुद उत्तर कोरिया रूस के साथ सैन्य सहयोग गहरा कर रहा है।

मुख्य बातें

केसीएनए ने 1 अगस्त 2026 को नाटो के ' फ्यूल सप्लाई चेन कैपेबिलिटी प्रोग्राम प्लान ' की कड़ी निंदा की।
उत्तर कोरिया ने इस योजना को 'युद्ध की पूरी तैयारी' और नाटो के 'अधिक आक्रामक सैन्य गुट' में बदलने का प्रमाण बताया।
नाटो की योजना यूरोप में शीत युद्ध काल के ईंधन पाइपलाइन और भंडारण नेटवर्क के आधुनिकीकरण से जुड़ी है।
उत्तर कोरिया ने एशिया-प्रशांत में नाटो की सैन्य मौजूदगी और रिमपैक अभ्यास को भी निशाना बनाया।
यह बयान ऐसे समय आया जब उत्तर कोरिया पर यूक्रेन युद्ध में रूस की ओर से सैनिक भेजने के आरोप लगते रहे हैं।

उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए ने 1 अगस्त 2026 को नाटो (नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन) की हाल ही में स्वीकृत 'फ्यूल सप्लाई चेन कैपेबिलिटी प्रोग्राम प्लान' की कड़ी निंदा की और इसे युद्ध की 'पूरी तैयारी' तथा गठबंधन के 'अधिक आक्रामक सैन्य गुट' में रूपांतरण का प्रमाण बताया। यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब उत्तर कोरिया खुद अपनी सैन्य क्षमताओं का विस्तार करने में जुटा है और हाल के महीनों में कई लंबी दूरी की मिसाइलों का परीक्षण कर चुका है।

नाटो की योजना क्या है

नाटो ने पिछले महीने 'फ्यूल सप्लाई चेन कैपेबिलिटी प्रोग्राम प्लान' को मंजूरी दी, जिसका उद्देश्य यूरोप में शीत युद्ध काल के सैन्य ईंधन पाइपलाइन और भंडारण नेटवर्क का आधुनिकीकरण एवं विस्तार करना है। केसीएनए के अनुसार, शुरुआत में सदस्य देशों के बीच भारी लागत को लेकर मतभेद थे, लेकिन अंततः उन्हें दूर कर लिया गया। केसीएनए ने कहा, 'इससे स्पष्ट होता है कि नाटो युद्ध के लिए रणनीतिक ईंधन भंडार को अत्यंत महत्वपूर्ण मानते हुए उस पर जोर दे रहा है।'

उत्तर कोरिया के आरोप

केसीएनए ने आरोप लगाया कि इस पहल का वास्तविक उद्देश्य भविष्य के संघर्षों के लिए ईंधन और अन्य सैन्य सामग्री का बड़े पैमाने पर भंडारण करना है। केसीएनए की टिप्पणी में कहा गया, 'नाटो की मंशा पर्याप्त ईंधन और अन्य युद्ध सामग्री जमा कर दुनिया के किसी भी हिस्से में कभी भी युद्ध की आग भड़काने की है। नाटो की स्थापना के बाद कई दशक बीत चुके हैं, लेकिन उसने पहले कभी इतनी खुली तरह युद्ध की तैयारी नहीं की थी।' उत्तर कोरिया ने यह भी दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया नाटो की इस योजना को रूस के साथ युद्ध की तैयारी के रूप में देख रहा है।

एशिया-प्रशांत पर नाटो की नज़र

उत्तर कोरिया ने नाटो पर एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने का भी आरोप लगाया। केसीएनए के अनुसार, गठबंधन 'डीपीआरके (उत्तर कोरिया) के प्रति शत्रुतापूर्ण देशों के साथ मिलकर कोरियाई प्रायद्वीप के आसपास लगातार उकसावे वाले सैन्य प्रदर्शन करता है।' टिप्पणी में हाल ही में हवाई द्वीपसमूह और उसके आसपास संपन्न द्विवार्षिक रिम ऑफ द पैसिफिक (रिमपैक) सैन्य अभ्यास का भी उल्लेख किया गया, जिसमें जर्मनी, इटली सहित कई नाटो सदस्य देशों ने हिस्सा लिया था।

व्यापक भू-राजनीतिक संदर्भ

गौरतलब है कि यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब उत्तर कोरिया पर यूक्रेन युद्ध में रूस के समर्थन के लिए अपने सैनिक भेजने के आरोप लगते रहे हैं। दूसरी ओर, नाटो यूक्रेन को सैन्य सहायता देना जारी रखे हुए है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक सुरक्षा तनाव कई मोर्चों पर एक साथ बढ़ रहा है और प्योंगयांग की नजर नाटो की प्रत्येक सैन्य गतिविधि पर बनी हुई है।

केसीएनए का निष्कर्ष

केसीएनए ने अंत में कहा, 'युद्ध को लेकर खासा उत्साहित सैन्य गुट के रूप में नाटो का वास्तविक स्वरूप अब और अधिक स्पष्ट होता जा रहा है। युद्ध को बढ़ावा देना, नाटो के अपने पतन को तेज करना है।' आने वाले हफ्तों में नाटो की प्रतिक्रिया और कोरियाई प्रायद्वीप पर तनाव का स्तर वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य की दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

एक रणनीतिक संकेत है — प्योंगयांग खुद को रूस-पश्चिम टकराव में एक सक्रिय पक्ष के रूप में स्थापित कर रहा है, न कि महज दर्शक के रूप में। विरोधाभास यह है कि जो देश नाटो पर 'युद्ध की तैयारी' का आरोप लगा रहा है, वही कथित तौर पर यूक्रेन में रूसी मोर्चे पर अपने सैनिक उतार चुका है। रिमपैक अभ्यास और एशिया-प्रशांत पर टिप्पणी यह भी दर्शाती है कि उत्तर कोरिया अपनी सुरक्षा चिंताओं को यूरोपीय संघर्ष से जोड़कर देख रहा है — एक ऐसा फ्रेम जो बीजिंग की भाषा से भी मेल खाता है और जिसे नज़रअंदाज़ करना भारत समेत एशियाई देशों के लिए उचित नहीं होगा।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नाटो का फ्यूल सप्लाई चेन कैपेबिलिटी प्रोग्राम प्लान क्या है?
यह नाटो द्वारा हाल ही में स्वीकृत एक योजना है जिसका उद्देश्य यूरोप में शीत युद्ध काल के सैन्य ईंधन पाइपलाइन और भंडारण नेटवर्क का आधुनिकीकरण और विस्तार करना है। इसे गठबंधन के सदस्य देशों के बीच लागत को लेकर शुरुआती मतभेदों के बाद मंजूरी मिली।
उत्तर कोरिया ने नाटो की इस योजना का विरोध क्यों किया?
उत्तर कोरिया की सरकारी एजेंसी केसीएनए ने इस योजना को भविष्य के युद्धों के लिए ईंधन और सैन्य सामग्री जमा करने की तैयारी बताया। केसीएनए का कहना है कि नाटो ने पहले कभी इतनी खुलकर युद्ध की तैयारी नहीं की थी।
उत्तर कोरिया ने एशिया-प्रशांत पर क्या आरोप लगाए?
उत्तर कोरिया ने आरोप लगाया कि नाटो एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है और कोरियाई प्रायद्वीप के आसपास उकसावे वाले सैन्य प्रदर्शन कर रहा है। उसने हवाई में हुए रिमपैक अभ्यास में जर्मनी और इटली जैसे नाटो सदस्यों की भागीदारी को इसका प्रमाण बताया।
उत्तर कोरिया और यूक्रेन युद्ध का क्या संबंध है?
रिपोर्टों के अनुसार, उत्तर कोरिया ने यूक्रेन युद्ध में रूस के समर्थन के लिए अपने सैनिक भेजे हैं, जबकि नाटो यूक्रेन को सैन्य सहायता दे रहा है। इस पृष्ठभूमि में उत्तर कोरिया की नाटो विरोधी टिप्पणियाँ उसकी रूस-समर्थक स्थिति को और स्पष्ट करती हैं।
केसीएनए क्या है और इसकी टिप्पणियों को कितनी अहमियत दी जाती है?
केसीएनए (कोरियन सेंट्रल न्यूज़ एजेंसी) उत्तर कोरिया की आधिकारिक सरकारी समाचार एजेंसी है और इसे प्योंगयांग की आधिकारिक नीतिगत स्थिति का प्रतिबिंब माना जाता है। इसकी टिप्पणियाँ उत्तर कोरियाई सरकार के आधिकारिक दृष्टिकोण को दर्शाती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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