राजनाथ सिंह और कांग शिन-चुल की सेबू में मुलाकात: भारत-दक्षिण कोरिया रक्षा सहयोग को नई गति
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को फिलीपींस के सेबू में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री कांग शिन-चुल के साथ द्विपक्षीय वार्ता की, जिसमें दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत बनाने, संयुक्त सैन्य तकनीक विकास की संभावनाएं तलाशने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा समन्वय को गहरा करने पर विशेष ज़ोर दिया गया। यह बैठक 13वीं आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (ADMM-Plus) के अंतर्गत आयोजित द्विपक्षीय सत्रों का हिस्सा रही।
बैठक में क्या हुआ
राजनाथ सिंह ने बताया कि कांग शिन-चुल के साथ हुई बातचीत बेहद उपयोगी रही। दोनों मंत्रियों ने भारत-दक्षिण कोरिया द्विपक्षीय रक्षा संबंधों के बढ़ते दायरे की समीक्षा की। चर्चा का मुख्य केंद्र था — उभरती सैन्य तकनीकों का संयुक्त विकास, क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों पर आपसी तालमेल, और हिंद-प्रशांत में स्थिरता सुनिश्चित करने के साझा प्रयास।
पिछली वार्ता से जुड़ाव
यह बैठक उसी दिशा में एक अगला कदम है जो मई 2026 में सियोल में हुई द्विपक्षीय वार्ता में तय की गई थी। उस वार्ता में भारत और दक्षिण कोरिया ने रक्षा उद्योग, सैन्य उत्पादन, समुद्री सुरक्षा और उभरती तकनीकों में सहयोग विस्तार पर सहमति जताई थी। सेबू में हुई ताज़ा बैठक उन प्रतिबद्धताओं को आगे बढ़ाने का अवसर बनी।
ADMM-Plus और भारत की भूमिका
ADMM-Plus आसियान सदस्य देशों और उनके संवाद साझेदारों के बीच रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग पर विचार-विमर्श का प्रमुख क्षेत्रीय मंच है। राजनाथ सिंह इस 13वीं बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और विभिन्न भागीदार देशों के रक्षा मंत्रियों के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें कर रहे हैं। इन सत्रों में भारत के मौजूदा रक्षा सहयोग की समीक्षा के साथ-साथ रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने के अवसर तलाशे जा रहे हैं।
एक्ट ईस्ट नीति का संदर्भ
भारत अपनी एक्ट ईस्ट नीति के तहत आसियान देशों के साथ संबंधों को लगातार सुदृढ़ करता रहा है। इस नीति के अनुरूप भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सामूहिक विकास के लिए प्रतिबद्ध है। गौरतलब है कि दक्षिण कोरिया के साथ रक्षा संबंध इस व्यापक क्षेत्रीय रणनीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनते जा रहे हैं, विशेष रूप से सैन्य तकनीक और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में।
आगे क्या
दोनों देशों के बीच संयुक्त सैन्य तकनीक विकास और समुद्री सुरक्षा सहयोग के ठोस रूपरेखा तय करने की प्रक्रिया जारी रहेगी। ADMM-Plus की इस बैठक में लिए गए निर्णय और की गई चर्चाएँ आने वाले महीनों में दोनों देशों की रक्षा साझेदारी की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।