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मार्को रुबियो का दावा: ईरान में 300% महंगाई, सरकार हिज्बुल्लाह-हमास पर खर्च कर रही अरबों डॉलर

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मार्को रुबियो का दावा: ईरान में 300% महंगाई, सरकार हिज्बुल्लाह-हमास पर खर्च कर रही अरबों डॉलर

सारांश

अमेरिका लगातार नौवीं रात ईरान पर हमले कर रहा है और तीन अमेरिकी सैनिक मारे जा चुके हैं। विदेश मंत्री रुबियो का दावा है कि ईरान में 300% महंगाई और खाद्य संकट के बावजूद सरकार हिज्बुल्लाह व हमास पर अरबों डॉलर लुटा रही है — यह टकराव अब सिर्फ सैन्य नहीं, आर्थिक मोर्चे पर भी तेज़ हो गया है।

मुख्य बातें

अमेरिका ने 20 जुलाई 2026 को लगातार नौवीं रात ईरान के सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए।
अमेरिका-ईरान टकराव में अब तक तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है।
विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दावा किया कि ईरान में 300% महंगाई , खाद्य संकट और ईंधन की कमी है।
रुबियो के अनुसार, ईरान सरकार अपना राजस्व हिज्बुल्लाह , हमास और इराकी मिलिशिया पर खर्च कर रही है।
रुबियो ने दावा किया कि ईरान सरकार के कुछ तबकों में भी इस नीति पर आंतरिक जागरूकता बढ़ रही है।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 20 जुलाई 2026 को दावा किया कि वैश्विक प्रतिबंधों के चलते ईरान की अर्थव्यवस्था गहरे संकट में है, और वहाँ की सरकार अपने नागरिकों की ज़रूरतों पर खर्च करने के बजाय हिज्बुल्लाह, हमास और इराकी मिलिशिया को अरबों डॉलर की सहायता दे रही है। यह बयान ऐसे समय आया जब अमेरिका ने लगातार नौवीं रात ईरान के सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए।

मुख्य घटनाक्रम

अमेरिका-ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव में अब तक तीन अमेरिकी सैनिकों की जान जा चुकी है। अमेरिकी सरकार ने ताज़ा हमलों को इन्हीं तीन सैनिकों को श्रद्धांजलि बताया है। रुबियो ने मीडिया से बातचीत में कहा, 'ईरान की अर्थव्यवस्था खराब हालत में है। वहाँ 300 फीसदी महंगाई है, खासकर जीवन के लिए ज़रूरी चीज़ों पर। वहाँ खाने की कमी है। वहाँ सूखा है। वहाँ गैसोलीन और फ्यूल की कमी है। वे लोगों को सैलरी तक नहीं दे पा रहे हैं।'

रुबियो ने स्पष्ट किया कि ये समस्याएँ हमलों से पहले से मौजूद थीं और अब और गहरी हो गई हैं।

ईरान की आर्थिक स्थिति और प्रॉक्सी खर्च

रुबियो के अनुसार, ईरान को प्रतिबंधों में राहत से या तेल निर्यात से जो भी राजस्व मिलता है, उसका बड़ा हिस्सा हिज्बुल्लाह, हमास और इराक में मिलिशिया समूहों को समर्थन देने में लगाया जाता है। उन्होंने कहा, 'उन्हें अपने देश के निर्माण में लाखों डॉलर खर्च करने चाहिए। लेकिन इसके बजाय, वे इसे आतंकवाद के बक्से में बंद कर रहे हैं।' गौरतलब है कि ईरान पर अमेरिका और पश्चिमी देशों के प्रतिबंध वर्षों से लागू हैं, जिनका सीधा असर वहाँ की आम जनता पर पड़ रहा है।

ईरानी सरकार के भीतर जागरूकता का संकेत

रुबियो ने यह भी दावा किया कि ईरान के भीतर — यहाँ तक कि उसकी सरकार के कुछ तबकों में भी — इस स्थिति को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। उन्होंने कहा, 'हमने उनकी सरकार के कुछ लोगों से यह सुना है।' हालाँकि उन्होंने स्वीकार किया कि इस मुद्दे पर स्पष्ट तनाव बना हुआ है।

आम जनता पर असर

ईरान में 300% से अधिक मुद्रास्फीति, खाद्य संकट और ईंधन की किल्लत के बीच आम नागरिकों पर दोहरी मार पड़ रही है — एक तरफ प्रतिबंधों का बोझ, दूसरी तरफ सरकार के प्रॉक्सी खर्च की नीति। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी हमलों के कारण ईरान की सैन्य और बुनियादी ढाँचागत क्षमता पर भी दबाव बढ़ रहा है।

क्या होगा आगे

अमेरिका-ईरान के बीच यह सैन्य टकराव फिलहाल जारी है और कूटनीतिक समाधान की कोई स्पष्ट रूपरेखा सामने नहीं आई है। रुबियो के बयान से संकेत मिलता है कि अमेरिका ईरान पर आर्थिक और सैन्य दोनों मोर्चों पर दबाव बनाए रखने की रणनीति पर कायम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह ईरानी शासन की आंतरिक वैधता के लिए गंभीर चुनौती है। लेकिन यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि ये दावे एक ऐसे अमेरिकी विदेश मंत्री की ओर से आ रहे हैं जिनका देश सक्रिय सैन्य अभियान में है — इसलिए इन्हें स्वतंत्र स्रोतों से सत्यापित किए बिना अंतिम सत्य नहीं माना जाना चाहिए। तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत और लगातार नौ रातों के हमले यह भी बताते हैं कि यह संघर्ष अब एक नए और खतरनाक चरण में प्रवेश कर चुका है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मार्को रुबियो ने ईरान की अर्थव्यवस्था के बारे में क्या कहा?
रुबियो ने दावा किया कि ईरान में 300% महंगाई है, खाने और ईंधन की कमी है, और सरकार नागरिकों को वेतन तक देने में असमर्थ है। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं की जड़ यह है कि ईरान सरकार अपना राजस्व हिज्बुल्लाह, हमास और इराकी मिलिशिया पर खर्च करती है।
अमेरिका ने ईरान पर कितनी रातों तक हमले किए हैं?
20 जुलाई 2026 तक अमेरिका लगातार नौवीं रात ईरान के सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले कर चुका था। इस टकराव में अब तक तीन अमेरिकी सैनिकों की जान जा चुकी है।
ईरान की खराब आर्थिक स्थिति के लिए कौन ज़िम्मेदार है?
रुबियो के अनुसार, वैश्विक प्रतिबंध और ईरान सरकार की प्रॉक्सी-खर्च नीति दोनों इसके लिए ज़िम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि ईरान को मिलने वाला राजस्व — चाहे प्रतिबंध राहत से हो या तेल निर्यात से — हिज्बुल्लाह और हमास जैसे समूहों पर लगाया जाता है, न कि नागरिक विकास पर।
क्या ईरान सरकार के भीतर भी इस नीति पर असहमति है?
रुबियो ने दावा किया कि ईरान सरकार के कुछ तबकों में इस स्थिति को लेकर जागरूकता बढ़ रही है और अमेरिका ने उनसे यह सुना भी है। हालाँकि उन्होंने माना कि इस मुद्दे पर स्पष्ट तनाव बना हुआ है।
अमेरिका-ईरान टकराव में आगे क्या होने की संभावना है?
फिलहाल कूटनीतिक समाधान की कोई स्पष्ट रूपरेखा सामने नहीं आई है। अमेरिका आर्थिक और सैन्य दोनों मोर्चों पर दबाव बनाए रखने की रणनीति पर कायम दिखता है, जबकि ईरान में आंतरिक दबाव बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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