ट्रंप ने ईरान से मांगा मुआवजा: मिडिल ईस्ट की तबाही और USS कोल हमले के पीड़ितों के लिए तेहरान जवाबदेह
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 10 अगस्त 2026 को ईरान से मुआवजे की औपचारिक मांग की, यह कहते हुए कि लेबनान, सीरिया, यमन और गाजा में हुई तबाही और मौतों की जिम्मेदारी सीधे तेहरान पर है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर यह बयान पोस्ट करते हुए स्पष्ट किया कि भविष्य की किसी भी वार्ता में यह मुआवजा-मांग शामिल रहेगी।
ट्रंप के बयान का सार
ट्रंप ने कहा, 'मैं भी ईरान से उन सभी लोगों के लिए मुआवजा मांग रहा हूँ, जिन्हें उन्होंने अपने सड़क किनारे बमों और कई लड़ाइयों में मारा है और गंभीर रूप से घायल किया है, जिनमें यूएसएस कोल पर मारे गए लोगों के परिवार और लड़ाई में मारे गए हजारों अन्य लोग शामिल हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को पिछले 50 वर्षों में अपने ही देश में मारे गए प्रदर्शनकारियों के परिवारों को, तथा पिछले पाँच महीनों में मारे गए 52,000 लोगों को भी मुआवजा दिया जाना चाहिए।
ईरान की मुआवजा-मांग पर पलटवार
यह बयान ऐसे समय आया है जब तेहरान ने पहले यह शर्त रखी थी कि होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के बदले अमेरिका को मुआवजा देना होगा। ट्रंप ने इस दावे को सिरे से नकारते हुए कहा कि ईरान ने पहले की किसी भी बातचीत या बैठक में अपनी इस माँग का कभी उल्लेख नहीं किया था। गौरतलब है कि यह कूटनीतिक तनाव ऐसे दौर में बढ़ा है जब अमेरिका-ईरान परमाणु वार्ता पहले से ही अनिश्चितता में है।
ईरान की सैन्य तैयारियाँ
इस बीच, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह मोजतबा खामेनेई ने अपने देश के रणनीतिक लक्ष्यों की रूपरेखा सामने रखी। इनमें ईरान की सेना और बासिज की रक्षात्मक क्षमता और तैयारी को मजबूत करना, किसी भी पारंपरिक या आधुनिक खतरे का समय पर और प्रभावी जवाब देने की व्यवस्था तैयार करना, तथा आर्म्ड फोर्सेज के जनरल स्टाफ और खतम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर्स का एकीकरण पूरा करना शामिल है।
वार्ता पर असर और आगे की राह
ट्रंप ने अपने प्रतिनिधियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि भविष्य की किसी भी वार्ता में मुआवजे की यह माँग अनिवार्य रूप से शामिल की जाए। यह ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में कई मोर्चों पर संघर्ष जारी है और अमेरिका-ईरान संबंध अत्यंत तनावपूर्ण बने हुए हैं। विश्लेषकों के अनुसार, इस नई शर्त के जुड़ने से दोनों देशों के बीच किसी भी संभावित समझौते की राह और कठिन हो सकती है।