डोनाल्ड ट्रंप के कड़े रुख से ईरान वार्ता में आई बाधा
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वॉशिंगटन, 21 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका-ईरान शांति वार्ता अब असमंजस में है क्योंकि तेहरान ने पाकिस्तान में प्रस्तावित बातचीत में भाग लेने में संकोच व्यक्त किया है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से एक कड़ा रुख अपनाया है। इससे आगामी संघर्ष विराम की समय सीमा के पहले किसी समझौते के लिए नई शंकाएँ उत्पन्न हो गई हैं।
वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता का दूसरा दौर, जो इस्लामाबाद में होने की उम्मीद थी, अब अनिश्चितता के दौर में है। यह स्थिति इसलिए उत्पन्न हुई है कि ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि अमेरिका द्वारा ईरान के झंडे वाला एक जहाज जब्त करने के बाद वे इस वार्ता में शामिल नहीं हो सकते हैं।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि हमें बातचीत के अगले दौर के लिए अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है।
यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह का संघर्ष-विराम समाप्त होने वाला है। इससे दोनों पक्षों पर किसी समझौते पर पहुँचने का दबाव बढ़ गया है, अन्यथा उन्हें दुश्मनी को फिर से शुरू करने का जोखिम उठाना पड़ सकता है।
सीएनएन के अनुसार, ट्रंप के सार्वजनिक बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट ने इस नाजुक बातचीत को और भी जटिल बना दिया है।
दोनों पक्ष सात सप्ताह से चल रहे संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक समझौते के करीब लग रहे थे। लेकिन ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से दावा किया कि ईरान कुछ महत्वपूर्ण शर्तों पर सहमत हो गया है, जबकि अधिकारियों का कहना है कि उन शर्तों को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है।
ईरानी अधिकारियों ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इन दावों को अस्वीकार किया और इस बात पर संदेह जताया कि क्या बातचीत का अगला दौर आगे बढ़ पायेगा।
बातचीत से अवगत एक व्यक्ति ने सीएनएन को बताया कि ईरानियों को यह पसंद नहीं आया कि अमेरिकी राष्ट्रपति सोशल मीडिया के माध्यम से बातचीत कर रहे थे और ऐसा दिखा रहे थे जैसे उन्होंने उन मुद्दों पर सहमति दे दी हो जिन पर वे अभी तक सहमत नहीं हुए थे।
बदलते समय-सीमाओं और अमेरिका के मिले-जुले संकेतों ने इस भ्रम को और बढ़ा दिया है। ट्रंप कभी यह संकेत देते हैं कि समझौता बस होने ही वाला है, तो कभी चेतावनी देते हैं कि यदि बातचीत विफल होती है तो फिर से सैन्य कार्रवाई की जा सकती है।
वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, ट्रंप के बुधवार के बाद संघर्ष विराम को आगे बढ़ाने की संभावना कम है, जिससे कूटनीतिक प्रयासों में और तेजी आ गई है।
रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि ईरान अमेरिका की शर्तों पर सहमत नहीं होता है, तो उसे पुलों और बिजली संयंत्रों जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों को निशाना बनाने वाले हमलों का सामना करना पड़ सकता है।
हालांकि, ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह दबाव में आकर बातचीत नहीं करेगा। ईरान की संसद के स्पीकर और एक प्रमुख वार्ताकार मोहम्मद बाकिर गालिबफ ने कहा कि तेहरान 'धमकियों के साये में' बातचीत स्वीकार नहीं करेगा।
यह गतिरोध दोनों पक्षों के बीच गहरे अविश्वास को दर्शाता है। ईरानी अधिकारी वाशिंगटन की कूटनीति के प्रति प्रतिबद्धता पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि दोनों पक्ष संभावित बातचीत की तैयारियाँ जारी रखे हुए हैं।
अनिश्चितता के बावजूद, अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि एक प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान जाने की संभावना है। हालाँकि, इसका समय और इसमें कौन शामिल होगा, यह अभी तय नहीं किया गया है।
हॉरमज़ जलडमरूमध्य के रणनीतिक महत्व को देखते हुए मौजूदा बातचीत के परिणाम का क्षेत्रीय स्थिरता, वैश्विक ऊर्जा बाजारों और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है।