संयुक्त राष्ट्र महासभा में 51 देश यूक्रेन के साथ, रूस से तत्काल युद्धविराम की माँग
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र महासभा में 24 सितंबर 2026 को 51 देशों ने यूक्रेन के समर्थन में एकजुट होकर रूस से तत्काल युद्धविराम अपनाने की अपील की। यूरोपीय संघ (EU) की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने कहा कि यूक्रेन शांति चाहता है और अब रूस को भी यही रास्ता चुनना चाहिए। यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने इस सामूहिक आह्वान को रूस के विरुद्ध वैश्विक कूटनीतिक दबाव का प्रतीक बताया।
महासभा में संयुक्त बयान
काजा कल्लास ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'संयुक्त राष्ट्र महासभा में 51 देश यूक्रेन के समर्थन में एकजुट हैं। मार्च 2025 से यूक्रेन पूर्ण, तुरंत और बिना किसी शर्त के युद्धविराम के लिए सहमत है। हम रूस से भी अपील करते हैं कि वह अब ऐसा ही करे।' उन्होंने आगे कहा कि रूस को अपनी सैन्य कार्रवाई रोकनी चाहिए, युद्धविराम स्वीकार करना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार न्यायपूर्ण एवं दीर्घकालिक शांति के लिए गंभीरता से वार्ता में शामिल होना चाहिए।
विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की यूक्रेन-केंद्रित बैठक से पहले उन्होंने काजा कल्लास और फ्रांस के यूरोप एवं विदेश मामलों के मंत्री जीन नोएल बैरो के साथ मिलकर मीडिया को संबोधित किया। सिबिहा ने कहा कि रूस से एकजुट अपील है कि वह अपनी सैन्य कार्रवाई रोके और शांति का मार्ग अपनाए।
कौन-कौन से देश शामिल हुए
सिबिहा ने समर्थन करने वाले देशों की ओर से जारी संयुक्त बयान पढ़ा, जिसमें यूरोपीय संघ के अलावा अल्बानिया, अंडोरा, ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, बोस्निया और हर्जेगोविना, बुल्गारिया, कनाडा, कोस्टा रिका, क्रोएशिया, साइप्रस, चेकिया, डेनमार्क, एस्टोनिया, फिनलैंड, फ्रांस, जॉर्जिया, जर्मनी, ग्रीस, होंडुरास, हंगरी, आइसलैंड, आयरलैंड, इज़राइल, इटली, जापान, लातविया, लिकटेंस्टीन, लिथुआनिया, लक्ज़मबर्ग, माल्टा, मोनाको, मोंटेनेग्रो, नीदरलैंड, न्यूज़ीलैंड, नॉर्थ मैसेडोनिया, नॉर्वे, पोलैंड, पुर्तगाल, कोरिया गणराज्य, मोल्दोवा गणराज्य, रोमानिया, सैन मैरिनो, स्लोवाकिया, स्लोवेनिया, स्पेन, स्वीडन, स्विट्जरलैंड और यूनाइटेड किंगडम शामिल थे।
बयान में क्या कहा गया
संयुक्त बयान में कहा गया कि बड़े पैमाने पर यह युद्ध शुरू हुए चार साल, छह महीने और तीस दिन हो चुके हैं और इंसानी नुकसान लगातार बढ़ रहा है। देशों ने यूक्रेन में आम नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढाँचे पर रूस के बढ़ते हमलों पर गहरी चिंता जताई। संयुक्त राष्ट्र के रिकॉर्ड के अनुसार पिछले कुछ महीनों में इन हमलों की वजह से हताहतों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुँची है।
बयान में यह भी कहा गया कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर सभी देशों की संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता के साथ-साथ आत्मरक्षा के अधिकार को मान्यता देता है। सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करने, जवाबदेही तय करने और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की गई।
काला सागर और खाद्य सुरक्षा पर चिंता
बयान में खास तौर पर काला सागर में हो रहे हमलों पर चिंता जताई गई। देशों ने कहा कि रूस यूक्रेन के अनाज निर्यात को रोकने की कोशिश कर रहा है, जिससे वैश्विक खाद्य सुरक्षा खतरे में पड़ रही है। इसलिए काला सागर में जहाजों की सुरक्षित और बाधारहित आवाजाही सुनिश्चित करने वाली व्यवस्था बनाने के प्रयासों का समर्थन किया गया। यह ऐसे समय में आया है जब विकासशील देशों में खाद्यान्न की कमी और मूल्य वृद्धि पहले से ही चिंता का विषय बनी हुई है।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि यूक्रेन मार्च 2025 से बिना शर्त युद्धविराम के लिए तैयार है, लेकिन रूस ने अब तक कोई सकारात्मक संकेत नहीं दिया है। यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक के ठीक पहले आया संयुक्त बयान कूटनीतिक दबाव बढ़ाने का सुनियोजित प्रयास माना जा रहा है। अब सभी की नज़रें सुरक्षा परिषद की बैठक के नतीजों और रूस की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।