24 सितंबर 2026
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संयुक्त राष्ट्र महासभा में 51 देश यूक्रेन के साथ, रूस से तत्काल युद्धविराम की माँग

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संयुक्त राष्ट्र महासभा में 51 देश यूक्रेन के साथ, रूस से तत्काल युद्धविराम की माँग

सारांश

संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच पर 51 देशों की एकजुटता एक कड़ा संदेश है — युद्ध के साढ़े चार साल बाद भी रूस पर वैश्विक कूटनीतिक दबाव कम नहीं हुआ है। यूक्रेन मार्च 2025 से बिना शर्त युद्धविराम को तैयार है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या मास्को इस बार इस आह्वान पर ध्यान देगा।

मुख्य बातें

24 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में 51 देशों ने यूक्रेन के समर्थन में संयुक्त बयान जारी किया।
EU की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने एक्स पर पोस्ट कर रूस से तत्काल, पूर्ण और बिना शर्त युद्धविराम की माँग की।
यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने सुरक्षा परिषद बैठक से पहले काजा कल्लास और फ्रांस के मंत्री जीन नोएल बैरो के साथ संयुक्त बयान पढ़ा।
यूक्रेन मार्च 2025 से बिना शर्त युद्धविराम के लिए सहमत है; युद्ध को चार साल, छह महीने और तीस दिन हो चुके हैं।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार पिछले कुछ महीनों में हताहतों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुँची।
काला सागर में रूस द्वारा यूक्रेन के अनाज निर्यात को अवरुद्ध करने की कोशिशों पर गहरी चिंता जताई गई।

संयुक्त राष्ट्र महासभा में 24 सितंबर 2026 को 51 देशों ने यूक्रेन के समर्थन में एकजुट होकर रूस से तत्काल युद्धविराम अपनाने की अपील की। यूरोपीय संघ (EU) की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने कहा कि यूक्रेन शांति चाहता है और अब रूस को भी यही रास्ता चुनना चाहिए। यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने इस सामूहिक आह्वान को रूस के विरुद्ध वैश्विक कूटनीतिक दबाव का प्रतीक बताया।

महासभा में संयुक्त बयान

काजा कल्लास ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'संयुक्त राष्ट्र महासभा में 51 देश यूक्रेन के समर्थन में एकजुट हैं। मार्च 2025 से यूक्रेन पूर्ण, तुरंत और बिना किसी शर्त के युद्धविराम के लिए सहमत है। हम रूस से भी अपील करते हैं कि वह अब ऐसा ही करे।' उन्होंने आगे कहा कि रूस को अपनी सैन्य कार्रवाई रोकनी चाहिए, युद्धविराम स्वीकार करना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार न्यायपूर्ण एवं दीर्घकालिक शांति के लिए गंभीरता से वार्ता में शामिल होना चाहिए।

विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की यूक्रेन-केंद्रित बैठक से पहले उन्होंने काजा कल्लास और फ्रांस के यूरोप एवं विदेश मामलों के मंत्री जीन नोएल बैरो के साथ मिलकर मीडिया को संबोधित किया। सिबिहा ने कहा कि रूस से एकजुट अपील है कि वह अपनी सैन्य कार्रवाई रोके और शांति का मार्ग अपनाए।

कौन-कौन से देश शामिल हुए

सिबिहा ने समर्थन करने वाले देशों की ओर से जारी संयुक्त बयान पढ़ा, जिसमें यूरोपीय संघ के अलावा अल्बानिया, अंडोरा, ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, बोस्निया और हर्जेगोविना, बुल्गारिया, कनाडा, कोस्टा रिका, क्रोएशिया, साइप्रस, चेकिया, डेनमार्क, एस्टोनिया, फिनलैंड, फ्रांस, जॉर्जिया, जर्मनी, ग्रीस, होंडुरास, हंगरी, आइसलैंड, आयरलैंड, इज़राइल, इटली, जापान, लातविया, लिकटेंस्टीन, लिथुआनिया, लक्ज़मबर्ग, माल्टा, मोनाको, मोंटेनेग्रो, नीदरलैंड, न्यूज़ीलैंड, नॉर्थ मैसेडोनिया, नॉर्वे, पोलैंड, पुर्तगाल, कोरिया गणराज्य, मोल्दोवा गणराज्य, रोमानिया, सैन मैरिनो, स्लोवाकिया, स्लोवेनिया, स्पेन, स्वीडन, स्विट्जरलैंड और यूनाइटेड किंगडम शामिल थे।

बयान में क्या कहा गया

संयुक्त बयान में कहा गया कि बड़े पैमाने पर यह युद्ध शुरू हुए चार साल, छह महीने और तीस दिन हो चुके हैं और इंसानी नुकसान लगातार बढ़ रहा है। देशों ने यूक्रेन में आम नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढाँचे पर रूस के बढ़ते हमलों पर गहरी चिंता जताई। संयुक्त राष्ट्र के रिकॉर्ड के अनुसार पिछले कुछ महीनों में इन हमलों की वजह से हताहतों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुँची है।

बयान में यह भी कहा गया कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर सभी देशों की संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता के साथ-साथ आत्मरक्षा के अधिकार को मान्यता देता है। सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करने, जवाबदेही तय करने और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की गई।

काला सागर और खाद्य सुरक्षा पर चिंता

बयान में खास तौर पर काला सागर में हो रहे हमलों पर चिंता जताई गई। देशों ने कहा कि रूस यूक्रेन के अनाज निर्यात को रोकने की कोशिश कर रहा है, जिससे वैश्विक खाद्य सुरक्षा खतरे में पड़ रही है। इसलिए काला सागर में जहाजों की सुरक्षित और बाधारहित आवाजाही सुनिश्चित करने वाली व्यवस्था बनाने के प्रयासों का समर्थन किया गया। यह ऐसे समय में आया है जब विकासशील देशों में खाद्यान्न की कमी और मूल्य वृद्धि पहले से ही चिंता का विषय बनी हुई है।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि यूक्रेन मार्च 2025 से बिना शर्त युद्धविराम के लिए तैयार है, लेकिन रूस ने अब तक कोई सकारात्मक संकेत नहीं दिया है। यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक के ठीक पहले आया संयुक्त बयान कूटनीतिक दबाव बढ़ाने का सुनियोजित प्रयास माना जा रहा है। अब सभी की नज़रें सुरक्षा परिषद की बैठक के नतीजों और रूस की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह पहली बार नहीं है जब महासभा के मंच से रूस को युद्धविराम के लिए कहा गया हो — और हर बार मास्को ने इसे अनसुना किया है। असली परीक्षा सुरक्षा परिषद में होती है, जहाँ रूस के वीटो अधिकार ने हर बाध्यकारी प्रस्ताव को निष्प्रभावी कर दिया है। काला सागर में अनाज निर्यात की रुकावट को कूटनीतिक बयान में जोड़ना चतुर चाल है — यह यूरोपीय एकता से परे वैश्विक दक्षिण की चिंताओं से भी जोड़ता है। लेकिन जब तक इस दबाव के पीछे कोई ठोस परिणाम-आधारित तंत्र नहीं होगा, यह घोषणापत्र कूटनीतिक अभिलेखागार में एक और दस्तावेज़ बनकर रह जाने का जोखिम उठाता है।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संयुक्त राष्ट्र महासभा में 51 देशों ने यूक्रेन के समर्थन में क्या किया?
24 सितंबर 2026 को इन 51 देशों ने एक संयुक्त बयान जारी कर रूस से तत्काल, पूर्ण और बिना शर्त युद्धविराम अपनाने की माँग की। बयान में यूक्रेन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति एकजुट समर्थन दोहराया गया।
काजा कल्लास ने एक्स पर क्या कहा?
EU की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने एक्स पर लिखा कि यूक्रेन मार्च 2025 से बिना शर्त युद्धविराम के लिए सहमत है और रूस को भी अब यही करना चाहिए। उन्होंने रूस से अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार न्यायपूर्ण और दीर्घकालिक शांति वार्ता में शामिल होने की अपील की।
यूक्रेन में युद्ध कब से चल रहा है और अब तक की स्थिति क्या है?
संयुक्त बयान के अनुसार बड़े पैमाने पर युद्ध को चार साल, छह महीने और तीस दिन हो चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र के रिकॉर्ड के मुताबिक पिछले कुछ महीनों में हताहतों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई है।
काला सागर को लेकर इन देशों की चिंता क्यों है?
बयान में कहा गया कि रूस यूक्रेन के अनाज निर्यात को बाधित करने की कोशिश कर रहा है, जिससे वैश्विक खाद्य सुरक्षा खतरे में पड़ रही है। इसीलिए काला सागर में जहाजों की सुरक्षित और बाधारहित आवाजाही सुनिश्चित करने वाली व्यवस्था का समर्थन किया गया।
क्या यह संयुक्त बयान रूस पर कोई बाध्यकारी दबाव डाल सकता है?
महासभा के बयान कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होते; वे कूटनीतिक दबाव और वैश्विक राय को प्रतिबिंबित करते हैं। बाध्यकारी कार्रवाई केवल सुरक्षा परिषद के माध्यम से संभव है, जहाँ रूस वीटो अधिकार का उपयोग कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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