अमेरिका के F-1 और J-1 वीजा पर 4 साल की नई सीमा, भारतीय छात्रों की डिग्री अधूरी रह सकती है
सारांश
मुख्य बातें
फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज (FIIDS) ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) के नए नियम के तहत F-1 और J-1 वीजा पर अधिकतम चार वर्ष की अनुमत अवधि तय किए जाने से हज़ारों अंतरराष्ट्रीय छात्र — जिनमें बड़ी संख्या में भारतीय हैं — अपनी डिग्री या शोध कार्य अधूरा छोड़कर अमेरिका से बाहर जाने को मजबूर हो सकते हैं। यह नियम 16-17 जुलाई 2026 को अंतिम रूप दिया गया और सितंबर 2026 के मध्य से लागू होने वाला है। FIIDS ने अमेरिकी कांग्रेस और यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज़ (USCIS) से इस नियम को तत्काल प्रभाव से रोकने की अपील की है।
नया नियम क्या बदलता है
DHS के इस नए प्रावधान के तहत वर्षों से चली आ रही 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' नीति को समाप्त कर दिया गया है, जो विदेशी छात्रों को उनके अकादमिक कार्यक्रम की अवधि तक अमेरिका में रहने की अनुमति देती थी। अब अधिकतम चार वर्ष की सीमा लागू होगी। इसके अतिरिक्त, ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) और STEM OPT की अवधि को भी इसी चार वर्षीय सीमा में गिना जाएगा। पढ़ाई पूरी होने के बाद मिलने वाली ग्रेस पीरियड 60 दिन से घटाकर 30 दिन कर दी गई है। किसी भी विस्तार के लिए छात्रों को फॉर्म I-539 के माध्यम से USCIS से पूर्व अनुमति लेनी होगी।
डॉक्टरल और मेडिकल छात्रों पर सबसे गहरी चोट
FIIDS के अनुसार, अमेरिका में स्नातक डिग्री पूरी करने का औसत समय लगभग 52 महीने है, जबकि पीएचडी के लिए यह 5.7 वर्ष तक होता है — दोनों ही चार वर्ष की नई सीमा से अधिक हैं। J-1 रिसर्च स्कॉलर और मेडिकल प्रशिक्षुओं को अपने कार्यक्रम पूरे करने में प्रायः पाँच से सात वर्ष लगते हैं। FIIDS ने यह भी रेखांकित किया कि USCIS पहले से ही 1.1 करोड़ से अधिक लंबित मामलों के बोझ तले दबा है, जहाँ औसत प्रोसेसिंग समय लगभग एक वर्ष है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
FIIDS में नीति और रणनीति के प्रमुख खंडेराव कंद ने कहा, 'यह अमेरिका की प्रतिस्पर्धात्मकता पर खुद से किया गया घाव है। 4 साल की सीमा आधुनिक डिग्रियों के वास्तविक स्वरूप से मेल नहीं खाती।' उन्होंने आगे चेताया, 'छात्रों को कार्यक्रम या शोध के बीच में ही बाहर कर दिया जाएगा, प्रयोगशालाएँ ज़रूरी प्रतिभा खो देंगी और अमेरिका अपनी नवाचार पाइपलाइन प्रतिस्पर्धियों को सौंप देगा।' कंद ने सरकार से अपील की: 'लागू करने में देरी करें, छात्रों को बचाएं और अमेरिकी अनुसंधान व नवाचार को सुरक्षित रखें।'
आम जनता और अर्थव्यवस्था पर असर
FIIDS के आँकड़ों के अनुसार, 2025 के फॉल सेमेस्टर में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के नए दाखिलों में 17 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई — यह कोविड-19 महामारी के बाद सबसे बड़ी कमी है। संगठन के अनुमान के अनुसार, इस गिरावट से अमेरिकी अर्थव्यवस्था को $1.1 अरब डॉलर से अधिक के राजस्व का नुकसान हुआ और करीब 23,000 नौकरियों पर प्रतिकूल असर पड़ा। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी विश्वविद्यालय पहले से ही अंतरराष्ट्रीय नामांकन में गिरावट से जूझ रहे हैं।
FIIDS की माँगें और आगे का रास्ता
FIIDS ने कांग्रेस से F-1 और J-1 वीजा धारकों के लिए ड्यूरेशन-ऑफ-स्टेटस सुरक्षा बहाल करने की माँग की है। संगठन ने प्रस्ताव रखा है कि जिन कार्यक्रमों की औसत अवधि 48 महीने से अधिक है, उनके लिए कानूनी छूट दी जाए और 64 महीने तक स्वतः विस्तार की व्यवस्था हो। इसके अलावा, OPT और STEM OPT को चार वर्षीय सीमा की गणना से बाहर रखने, I-539 आवेदनों का त्वरित निपटारा करने और 60 दिन की ग्रेस पीरियड बहाल करने की भी अपील की गई है। गौरतलब है कि यह नियम लागू हुआ तो अमेरिका में पढ़ रहे लाखों भारतीय छात्रों की शैक्षणिक योजनाएँ सीधे प्रभावित होंगी।