वांग यी-जर्मनी विदेश मंत्री वार्ता: बहुपक्षवाद, मुक्त व्यापार और एक-चीन नीति पर जोर
सारांश
मुख्य बातें
चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने 21 सितंबर 2026 को जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वेडफुल से टेलीफोन पर विस्तृत वार्ता की, जिसमें दोनों देशों ने बहुपक्षवाद, मुक्त व्यापार और द्विपक्षीय संबंधों को और सुदृढ़ करने पर सहमति जताई। बीजिंग से जारी आधिकारिक विवरण के अनुसार, यह बातचीत एकतरफावाद और वैश्वीकरण-विरोधी प्रवृत्तियों की पृष्ठभूमि में हुई।
वांग यी का रुख: रणनीतिक संचार और साझा संदेश
वांग यी ने कहा कि चीन और जर्मनी विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं और चौतरफा रणनीतिक साझेदार हैं। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि एकतरफावाद और वैश्वीकरण-विरोधी माहौल के मौजूदा दबाव के बीच दोनों पक्षों के लिए रणनीतिक संचार को मज़बूत करना, आपसी विश्वास बढ़ाना और व्यावहारिक सहयोग को गहरा करना अनिवार्य है।
वांग यी के अनुसार, दोनों देशों को संयुक्त रूप से यह सकारात्मक संदेश देना चाहिए कि वे बहुपक्षवाद और मुक्त व्यापार के पक्षधर हैं। उन्होंने कहा कि इससे चीन-जर्मनी संबंधों के विकास में बाहरी देशों का भरोसा बढ़ेगा और चीन-यूरोपीय संघ संबंधों में भी रचनात्मक भूमिका निभाई जा सकेगी।
ताइवान और एक-चीन सिद्धांत: बीजिंग की स्पष्ट शर्त
वांग यी ने इस वार्ता में स्पष्ट किया कि एक-चीन सिद्धांत चीन-जर्मनी संबंधों की राजनीतिक नींव है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि जर्मनी इस सिद्धांत का पालन करते हुए ताइवान जलडमरूमध्य में शांति और स्थिरता की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाएगा, ताकि दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय आदान-प्रदान के लिए अनुकूल वातावरण बन सके।
गौरतलब है कि चीन नियमित रूप से प्रमुख यूरोपीय देशों के साथ द्विपक्षीय वार्ताओं में एक-चीन सिद्धांत की पुष्टि कराने पर जोर देता है। यह वार्ता ऐसे समय में हुई जब यूरोपीय संघ और चीन के बीच व्यापार तनाव, विशेषकर इलेक्ट्रिक वाहनों पर शुल्क को लेकर, चर्चा का विषय बना हुआ है।
जर्मनी का जवाब: उच्च स्तरीय परामर्श और EU-चीन संवाद
विदेश मंत्री जोहान वेडफुल ने कहा कि हाल के वर्षों में चीन-जर्मनी संबंधों में विकास की अच्छी गति बनी हुई है। उन्होंने जर्मनी की ओर से चीन के साथ उच्च स्तरीय आदान-प्रदान को और मज़बूत करने, चीन-जर्मनी नए दौर के अंतर-सरकारी परामर्श आयोजित करने और आर्थिक एवं व्यापारिक सहयोग को गहरा करने की इच्छा जताई।
वेडफुल ने यह भी स्पष्ट किया कि जर्मनी एक-चीन नीति का दृढ़तापूर्वक पालन करता है और इस स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं होगा। साथ ही, उन्होंने उम्मीद जताई कि चीन अंतरराष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय मामलों में अपना प्रभाव डालेगा और जर्मनी के साथ मिलकर समाधान पर विचार-विमर्श करेगा।
EU-चीन संबंधों पर प्रभाव
वेडफुल ने कहा कि जर्मनी यूरोपीय संघ और चीन को संवाद के ज़रिए अपने मतभेद उचित रूप से सुलझाने में समर्थन करता है और इस संबंध में सकारात्मक भूमिका निभाना चाहता है। यह बयान इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि जर्मनी यूरोपीय संघ की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और चीन के साथ उसके व्यापारिक हित सर्वाधिक गहरे हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता का दौर जारी है और यूरोप की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं चीन के साथ संबंधों को 'डी-रिस्किंग' के ढाँचे में पुनर्परिभाषित करने की कोशिश कर रही हैं। आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच अंतर-सरकारी परामर्श की तारीख तय होने की संभावना है।