झांग क्वोछिंग ने 'विकास के लिए वैश्विक अभिसरण शिखर सम्मेलन' में दिया भाषण, खुलेपन और बहुपक्षवाद पर दिया जोर
सारांश
मुख्य बातें
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के केंद्रीय पोलित ब्यूरो के सदस्य एवं चीनी उप प्रधानमंत्री झांग क्वोछिंग ने 12 जून 2026 को वीडियो लिंक के माध्यम से 'विकास के लिए वैश्विक अभिसरण शिखर सम्मेलन' में भाग लिया और विश्व अर्थव्यवस्था में समावेशी विकास को बढ़ावा देने का आह्वान किया। इस शिखर सम्मेलन की मेजबानी फ्रांस ने की और इसकी अध्यक्षता फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने की।
मुख्य घटनाक्रम
झांग क्वोछिंग ने अपने संबोधन में कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग द्वारा प्रस्तावित चार वैश्विक पहलें — विश्व शांति और विकास को आगे बढ़ाने के लिए — मार्गदर्शन और प्रोत्साहन प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि विकास को प्राथमिकता देते हुए वैश्विक शासन में सुधार किया जाना चाहिए, ताकि विश्व अर्थव्यवस्था में समावेशी विकास सुनिश्चित हो सके।
खुलेपन और बहुपक्षवाद पर चीन का रुख
झांग ने जोर दिया कि विभिन्न देशों के तुलनात्मक लाभों का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन किया जाना चाहिए और एक स्वतंत्र एवं सुविधाजनक व्यापार वातावरण बनाया जाना चाहिए। उन्होंने वास्तविक बहुपक्षवाद के अभ्यास पर भी बल दिया। उनके अनुसार, संरक्षणवाद और एकतरफा दबाव वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए खतरा हैं।
चीन की वैश्विक भूमिका पर जोर
झांग क्वोछिंग ने कहा कि चीन लगातार उच्च स्तरीय खुलेपन का विस्तार कर रहा है और विभिन्न देशों के साथ विकास के अवसरों को साझा करना जारी रखेगा। उनका कहना था कि इससे विश्व अर्थव्यवस्था में अधिक निश्चितता और स्थिरता लाई जा सकेगी। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार तनाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएँ बढ़ रही हैं।
शिखर सम्मेलन की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि 'विकास के लिए वैश्विक अभिसरण शिखर सम्मेलन' एक बहुपक्षीय मंच है जिसमें विभिन्न देशों के नेता वैश्विक आर्थिक विकास और शासन सुधार पर विचार-विमर्श करते हैं। फ्रांस की मेजबानी और मैक्रॉन की अध्यक्षता में आयोजित इस सम्मेलन में चीन की भागीदारी बहुपक्षीय कूटनीति में बीजिंग की सक्रिय उपस्थिति को दर्शाती है।
आगे की राह
विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार के शिखर सम्मेलनों में चीन की सक्रिय भागीदारी वैश्विक आर्थिक नीति-निर्माण में उसकी बढ़ती भूमिका को रेखांकित करती है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चीन की ये घोषणाएँ व्यावहारिक नीतिगत कदमों में कैसे परिवर्तित होती हैं।