बेली फैट से छुटकारा पाने के लिए उड्डियान बंध: एक प्रभावी उपाय
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, १६ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। योग सदियों से हमारी प्राचीन परंपरा में मन और प्राण को संतुलित करने का एक प्रभावशाली माध्यम रहा है। इनमें से एक महत्वपूर्ण प्राणायाम है 'उड्डियान बंध', जो शरीर को अनेक लाभ प्रदान करता है।
'उड्डियान' शब्द का उद्गम संस्कृत के 'उड्डि' से है, जिसका अर्थ है ऊपर उठना। इस प्राणायाम के दौरान, व्यक्ति को अपनी सांस पूरी तरह से बाहर छोड़नी होती है और खाली पेट को अंदर की ओर और ऊपर की दिशा में (रीढ़ की तरफ) खींचना होता है। इसके नियमित अभ्यास से पेट के अंगों का कार्य सही तरीके से होता है, जिससे पेट और कमर की चर्बी घटती है। यह चिड़चिड़ापन, क्रोध और अवसाद को भी दूर करता है। इसके अतिरिक्त, यह मधुमेह को नियंत्रित करने और प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में भी सहायक है।
आयुष मंत्रालय ने इस प्राणायाम के महत्व को उजागर करते हुए इसे रोजाना करने की सलाह दी है। इसे पेट का ताला भी कहा गया है। मंत्रालय के अनुसार, यह पाचन तंत्र को मजबूत बनाने, पेट की मांसपेशियों को टोन करने, शरीर को भीतर से शुद्ध करने और प्राण ऊर्जा को उठाने में मदद करता है। यह पेट की चर्बी को कम करने में भी सहायक है।
उड्डियान बंध केवल एक शारीरिक अभ्यास नहीं है, बल्कि यह शरीर को भीतर से शुद्ध करने की एक कलात्मक प्रक्रिया है। यह पाचन तंत्र को सशक्त बनाने और पेट की मांसपेशियों को टोन करने के लिए सबसे प्रभावी योग क्रियाओं में से एक है।
मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगासन ने इसके अभ्यास की सरल विधि बताई है। इसके अनुसार, सबसे पहले पद्मासन, वज्रासन या सुखासन में बैठें। अब गहरी सांस लें और मुंह और नाक से पूरी सांस बाहर छोड़ें। सांस रोककर पेट को जितना संभव हो सके अंदर और ऊपर खींचें।
१०-२० सेकंड तक इस स्थिति को बनाए रखें, फिर धीरे-धीरे पेट को ढीला छोड़ें और सांस लें। फिर सामान्य स्थिति में लौट आएं। शुरुआत में ३-५ बार करें, धीरे-धीरे बढ़ाते रहें।
इसके नियमित अभ्यास से शरीर और मन में सकारात्मक परिवर्तन होते हैं, लेकिन गर्भवती महिलाएं, अल्सर, हृदय रोग या उच्च रक्तचाप से ग्रस्त लोगों को इसे करने से पहले एक बार योग विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह अवश्य लेनी चाहिए।