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15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में टूरिस्ट पुलिस तैनात: राज्यसभा में बोले पर्यटन मंत्री शेखावत

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15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में टूरिस्ट पुलिस तैनात: राज्यसभा में बोले पर्यटन मंत्री शेखावत

सारांश

देश के 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में टूरिस्ट पुलिस पहले से तैनात है — यह जानकारी पर्यटन मंत्री शेखावत ने राज्यसभा में दी। केंद्र ने प्रशिक्षण मॉड्यूल और अध्ययन रिपोर्ट भेजी है, लेकिन राज्यों को कोई वित्तीय पैकेज नहीं दिया गया।

मुख्य बातें

केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने राज्यसभा में बताया कि 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में टूरिस्ट पुलिस तैनात है।
तैनाती वाले राज्यों में तेलंगाना, गोवा, केरल, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर सहित अन्य प्रमुख पर्यटन राज्य शामिल हैं।
BPR&D ने योजना पर अध्ययन कर व्यापक रिपोर्ट तैयार की; IITTM ने प्रशिक्षण मॉड्यूल बनाया जो गृह मंत्रालय के माध्यम से राज्यों को भेजा गया।
केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने राज्यों को टूरिस्ट पुलिस इकाइयों के लिए कोई विशेष वित्तीय सहायता नहीं दी है।
पर्यटन मंत्रालय ने नई दिल्ली में सभी राज्यों के DGP और IGP का राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया।

केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने 25 जुलाई 2025 को राज्यसभा में जानकारी दी कि देश के 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष टूरिस्ट पुलिस की तैनाती की जा चुकी है। सांसद चंद्रकांत हंडोरे के प्रश्न के उत्तर में मंत्री ने इस योजना की विस्तृत स्थिति सदन के सामने रखी।

किन राज्यों में है टूरिस्ट पुलिस

शेखावत ने बताया कि तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, दिल्ली, गोवा, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम और उत्तर प्रदेश में यात्रियों और पर्यटकों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए टूरिस्ट पुलिस तैनात है। ये वे राज्य हैं जहाँ देश के प्रमुख पर्यटन स्थल स्थित हैं और जहाँ घरेलू व विदेशी पर्यटकों की आवाजाही सर्वाधिक है।

अध्ययन और रिपोर्ट का आधार

पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (BPR&D) ने टूरिस्ट पुलिस योजना पर एक विस्तृत अध्ययन कराया और इसके निष्कर्षों के आधार पर एक व्यापक रिपोर्ट तैयार की गई, जिसका उद्देश्य इस योजना को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एकसमान रूप से लागू करना है। इसके अतिरिक्त, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टूरिज्म एंड ट्रैवल मैनेजमेंट (IITTM) के माध्यम से एक अलग अध्ययन भी कराया गया, ताकि टूरिस्ट पुलिस को पर्यटकों की जरूरतों के प्रति अधिक संवेदनशील बनाया जा सके।

शेखावत ने बताया कि 'राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में टूरिस्ट पुलिस की कार्यप्रणाली और सर्वोत्तम प्रथाओं का दस्तावेजीकरण' शीर्षक वाली यह अध्ययन रिपोर्ट सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भेजी जा चुकी है।

प्रशिक्षण और केंद्रीय समन्वय

IITTM द्वारा तैयार एक प्रशिक्षण मॉड्यूल गृह मंत्रालय को सौंपा गया, जिसे बाद में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों तक पहुँचाया गया। यह मॉड्यूल सुरक्षा प्रोटोकॉल, धोखाधड़ी की रोकथाम और विदेशी भाषाओं की बुनियादी जानकारी जैसे विषयों को समेटता है।

पर्यटन मंत्रालय ने गृह मंत्रालय और BPR&D के सहयोग से नई दिल्ली में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशकों (DGP) और पुलिस महानिरीक्षकों (IGP) का एक राष्ट्रीय सम्मेलन भी आयोजित किया, जिसमें इस योजना के क्रियान्वयन पर विचार-विमर्श किया गया।

वित्तीय सहायता का प्रावधान नहीं

शेखावत ने स्पष्ट किया कि टूरिस्ट पुलिस की अलग इकाइयाँ स्थापित करने के लिए केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय की ओर से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कोई विशेष वित्तीय सहायता या पैकेज नहीं दिया गया है। इसका अर्थ यह है कि टूरिस्ट पुलिस की तैनाती और संचालन का खर्च संबंधित राज्य सरकारें स्वयं वहन कर रही हैं।

आगे की राह

गौरतलब है कि भारत में पर्यटन क्षेत्र को मजबूत करने के लिए पर्यटकों की सुरक्षा एक अहम पहलू है, विशेष रूप से विदेशी पर्यटकों के लिए। यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर देश की हिस्सेदारी बढ़ाने के प्रयास कर रही है। आने वाले समय में शेष राज्यों में भी इस योजना के विस्तार की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इन इकाइयों की गुणवत्ता और प्रभावशीलता एक-समान है या नहीं — खासकर जब केंद्र ने कोई वित्तीय पैकेज नहीं दिया और क्रियान्वयन पूरी तरह राज्यों पर छोड़ दिया गया है। प्रशिक्षण मॉड्यूल और अध्ययन रिपोर्ट भेजना एक कदम है, लेकिन बिना बाध्यकारी मानकों और स्वतंत्र मूल्यांकन तंत्र के, यह योजना कागज़ी अनुपालन तक सिमट सकती है। विदेशी पर्यटकों से जुड़ी घटनाएँ बार-बार यह दिखाती हैं कि सुरक्षा का अहसास और वास्तविक सुरक्षा — दोनों में फ़र्क होता है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में टूरिस्ट पुलिस किन राज्यों में तैनात है?
पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के अनुसार, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, दिल्ली, गोवा, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम और उत्तर प्रदेश — कुल 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में टूरिस्ट पुलिस तैनात है।
टूरिस्ट पुलिस योजना के लिए केंद्र सरकार ने राज्यों को क्या मदद दी है?
केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने राज्यों को IITTM द्वारा तैयार प्रशिक्षण मॉड्यूल और BPR&D की अध्ययन रिपोर्ट उपलब्ध कराई है। हालाँकि, टूरिस्ट पुलिस इकाइयाँ स्थापित करने के लिए केंद्र की ओर से कोई विशेष वित्तीय सहायता या पैकेज नहीं दिया गया है।
IITTM का टूरिस्ट पुलिस प्रशिक्षण मॉड्यूल क्या है?
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टूरिज्म एंड ट्रैवल मैनेजमेंट (IITTM) ने एक प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किया है जो सुरक्षा प्रोटोकॉल, धोखाधड़ी की रोकथाम और विदेशी भाषाओं की बुनियादी जानकारी को कवर करता है। यह मॉड्यूल गृह मंत्रालय के माध्यम से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों तक पहुँचाया गया है।
राज्यसभा में टूरिस्ट पुलिस पर सवाल किसने पूछा था?
सांसद चंद्रकांत हंडोरे ने राज्यसभा में प्रमुख पर्यटन स्थलों पर टूरिस्ट पुलिस योजना की वर्तमान स्थिति और मानकीकृत प्रशिक्षण मॉड्यूल के बारे में सवाल पूछा था, जिसके जवाब में पर्यटन मंत्री शेखावत ने यह जानकारी दी।
क्या बाकी राज्यों में भी टूरिस्ट पुलिस लागू होगी?
फिलहाल केंद्र सरकार ने BPR&D की रिपोर्ट के आधार पर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इस योजना को समान रूप से लागू करने की दिशा में कदम उठाए हैं। हालाँकि, शेष राज्यों में तैनाती की कोई निश्चित समयसीमा अभी तक घोषित नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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