13 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

अधिकमास द्वादशी पर महाकालेश्वर में भस्म आरती, देश-विदेश से उमड़े श्रद्धालु

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
अधिकमास द्वादशी पर महाकालेश्वर में भस्म आरती, देश-विदेश से उमड़े श्रद्धालु

सारांश

ज्येष्ठ अधिकमास की द्वादशी पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती का दिव्य आयोजन हुआ। रातभर कतारों में खड़े रहे श्रद्धालुओं ने भोर में बाबा का राजा रूप में शृंगार देखा और 'हर-हर महादेव' के जयकारों से पूरा परिसर गुंजायमान हो उठा।

मुख्य बातें

28 मई 2025 को ज्येष्ठ अधिकमास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि पर महाकालेश्वर मंदिर में विशेष भस्म आरती संपन्न हुई।
देश-विदेश से आए श्रद्धालु बुधवार देर रात से ही कतारों में लग गए थे।
बाबा महाकाल का भांग, चंदन, सूखे मेवों और आभूषणों से राजा के रूप में विशेष शृंगार किया गया।
पंचामृत अभिषेक में दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का उपयोग हुआ; महानिर्वाणी द्वारा भस्म अर्पित की गई।
भस्म आरती जीवन की क्षणभंगुरता का प्रतीक है; अब भस्म गाय के गोबर के कंडों से तैयार होती है।

उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में 28 मई 2025 को ज्येष्ठ अधिकमास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि पर बाबा महाकाल की अलौकिक भस्म आरती का आयोजन हुआ, जिसमें देश-विदेश से आए हज़ारों श्रद्धालु सम्मिलित हुए। भोर से ही मंदिर परिसर 'हर-हर महादेव' और 'जय महाकाल' के जयकारों से गुंजायमान रहा।

रातभर कतारों में खड़े रहे भक्त

बाबा महाकाल के दर्शन की ललक में श्रद्धालुओं ने बुधवार देर रात से ही कतारों में लगना शुरू कर दिया था। रातभर प्रतीक्षा करने के बाद भी भक्तों के उत्साह में कोई कमी नहीं देखी गई — हर कोई अपने आराध्य की एक झलक पाने को आतुर था। अधिकमास की इस विशेष तिथि पर भीड़ सामान्य दिनों की तुलना में कहीं अधिक रही।

परंपरानुसार खुले मंदिर के पट

परंपरा के अनुसार भोर में भगवान वीरभद्र से आज्ञा लेकर मंदिर के पट खोले गए। पट खुलते ही उपस्थित भक्तगण उत्साह से भर उठे और जयकारे लगाने लगे। इसके बाद बाबा का जलाभिषेक किया गया, तत्पश्चात ठंडे जल और दूध, दही, घी, शहद तथा शक्कर से बने पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ।

राजा के रूप में सजे बाबा महाकाल

गुरुवार के विशेष शृंगार में बाबा का रूप अत्यंत मनोहारी था। बाबा के मस्तक पर चंद्रमा और त्रिनेत्र सजाए गए। भांग, चंदन, सूखे मेवों और आभूषणों से सुसज्जित कर उन्हें राजा के रूप में तैयार किया गया, जिसे देखकर भक्त भावविभोर हो उठे। इसके बाद महानिर्वाणी द्वारा बाबा को भस्म अर्पित की गई।

भस्म आरती का आध्यात्मिक महत्व

भस्म आरती के दौरान शंख, डमरू और घंटियों की गूंज से पूरा वातावरण दिव्य और आध्यात्मिक हो गया। बाबा महाकाल की यह दैनिक भस्म आरती सृष्टि के विनाश और पुनर्जन्म के चक्र — मृत्युलोक — के प्रतीक के रूप में की जाती है, जिसमें भस्म अर्पित कर जीवन की क्षणभंगुरता का संदेश दिया जाता है। आरती में उपयोग होने वाली भस्म गाय के गोबर से बने कंडों को जलाकर तैयार की जाती है। गौरतलब है कि पूर्व में श्मशान की चिता की राख का उपयोग होता था, किंतु अब यह भस्म प्रतीकात्मक रूप से तैयार की जाती है।

आगे का आयोजन

अधिकमास की शेष तिथियों पर भी महाकालेश्वर मंदिर में विशेष धार्मिक आयोजनों की श्रृंखला जारी रहने की संभावना है। प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उज्जैन की सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान का केंद्र भी है — अधिकमास जैसे विशेष अवसरों पर यहाँ उमड़ने वाली भीड़ स्थानीय पर्यटन और व्यापार को भी गति देती है। यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश सरकार महाकाल लोक परियोजना के ज़रिये उज्जैन को वैश्विक धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने में जुटी है। भस्म आरती की परंपरा में श्मशान राख से गोबर कंड की भस्म तक का बदलाव आधुनिकता और परंपरा के बीच संतुलन का उदाहरण है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर भीड़ के आँकड़ों तक सिमट जाती है, जबकि इस अनुष्ठान की दार्शनिक गहराई और बदलती प्रथाओं पर गंभीर चर्चा की ज़रूरत है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती क्या है और इसका महत्व क्यों है?
भस्म आरती बाबा महाकाल को प्रतिदिन भोर में अर्पित की जाने वाली विशेष आरती है, जो सृष्टि के विनाश और पुनर्जन्म के चक्र का प्रतीक है। इसमें भस्म अर्पित कर जीवन की क्षणभंगुरता का संदेश दिया जाता है। यह देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर की सबसे प्रमुख परंपरा है।
भस्म आरती में उपयोग होने वाली भस्म कैसे तैयार की जाती है?
वर्तमान में भस्म आरती के लिए गाय के गोबर से बने कंडों को जलाकर भस्म तैयार की जाती है। पहले श्मशान की चिता की राख का उपयोग होता था, लेकिन अब यह प्रतीकात्मक रूप से तैयार की जाती है।
अधिकमास द्वादशी पर भस्म आरती का विशेष महत्व क्यों है?
ज्येष्ठ अधिकमास हिंदू पंचांग में एक अतिरिक्त मास होता है, जिसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। इस माह की विशेष तिथियों पर महाकालेश्वर में दर्शन और आरती का महत्व कई गुना बढ़ जाता है, इसीलिए इस दिन असाधारण भीड़ देखने को मिली।
महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती में शामिल होने के लिए कब से कतार लगानी पड़ती है?
विशेष तिथियों पर श्रद्धालु एक दिन पहले रात से ही कतारों में लगना शुरू कर देते हैं। 28 मई को भी भक्त बुधवार देर रात से ही पंक्तिबद्ध हो गए थे और रातभर प्रतीक्षा के बाद भोर में दर्शन पाए।
भस्म आरती में बाबा महाकाल का शृंगार कैसे किया जाता है?
विशेष अवसरों पर बाबा के मस्तक पर चंद्रमा और त्रिनेत्र सजाए जाते हैं। भांग, चंदन, सूखे मेवों और आभूषणों से उन्हें राजा के रूप में तैयार किया जाता है। इससे पहले जलाभिषेक और दूध, दही, घी, शहद व शक्कर के पंचामृत से अभिषेक किया जाता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 3 महीने पहले